Stars World : ब्रह्मांड के पहले तारे का कैसे हुआ जन्म? साइंटिस्ट ने ढूंढ़ा 1350 करोड़ वर्ष पुराना रहस्य
स्पेस साइंटिस्ट्स को ब्रह्मांड के एक अनसुलझे रहस्य का पता चला है। ताजा शोध में स्पेस में सबसे पहले तारा निर्माण की प्रक्रिया से जुड़ी अहम जानकारी मिलने का दावा किया जा रहा है।

ESO Scientist discovered Stars mystery: यूरोपियन साउथ ऑब्जर्वेटरी (ESO) के शोधकर्ताओं ने हाल ही में वेरी लार्ज टेलीस्कोप (VLT) के जरिए प्राप्त अहम डेटा का विश्लेषण किया। जिससे ब्रह्मांड के एक अनसुलझे रहस्य का पता चला है। शोधकर्ताओं को ब्रह्मांड में पहले तारों के विस्फोट के अवशेषों का पता चला है। इन्हीं अवशेषों के जरिए ब्रह्मांड के पहले तारे के निर्माण की प्रक्रिया के तह तक पहुंचने का प्रयास किया गया।
खगोलविदों ने कहा कि यह पहला मौका है जब उन्होंने ब्रह्मांड के बेहद पुराने सितारों के अवशेष देखे हैं। इससे पहले कभी भी किसी भी सितारों के इतने प्राचीन अवशेष नहीं मिले। साइंटिस्ट्स का दावा है कि ये अवशेष स्टार्स की रासायनिक संरचना से काफी मेल खाते हैं। अनुमान है कि ये अवशेष अरबों वर्ष पहले खत्म हुए तारों के ही अंश हैं।
ताजा शोध इटली के फ्लोरेंस विश्वविद्यालय की रिसर्च स्टूडेंड एंड्रिया सैकार्डी ने किया। सैकार्डी ने अपनी थीसिस में लिखा, "पहली बार बादलों में पहले सितारों के विस्फोट की साइंटिफिक पहचान सामने आई।"
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ईएसओ (European Southern Observatory) द्वारा जारी बयान में कहा गया, "शोधकर्ताओं का मानना है कि ब्रह्मांड में बनने वाले पहले सितारे आज के तारों से बहुत अलग थे। जब वे 13.5 अरब साल पहले बने, तो उनमें सिर्फ हाइड्रोजन और हीलियम गैस थी, जो प्रकृति में सबसे सरलता से उपलब्ध होने वाली गैसें हैं। ब्रह्मांड का पहला तारा सूर्य से सैकडों गुना बड़ा था। लेकिन ये सुपरनोवा के रूप में थे, जो स्पेस में शक्तिशाली विस्फोटों में जल्दी खत्म हो गए। इसके बाद गैसों से सितारों की नई पीढ़ियों के जन्म हुआ।
फ्लोरेंस विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर व एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में आज प्रकाशित अध्ययन के सह-लेखक स्टीफेनिया साल्वाडोरी ने सितारों को जन्म को लेकर अहम बातें कहीं। उन्होंने शोध लेख में कहा, " ब्रह्मांड के पहले सितारे के खत्म होने बाद वातावरण में बिखरे हुए रासायनिक तत्वों के जरिए सबसे प्राचीन सितारों का अप्रत्यक्ष रूप से अध्ययन किया जा सकता है।"
दरअसल, चिली में ईएसओ (ESO) के वेरी लार्ज टेलीस्कोप (VLT) प्राप्त डेटा से रिसर्चर्स की टीम ने तीन गैस बादल देखे, जिनकी उम्र ब्रह्मांड की कुल उम्र से महज 10 से 15% कम थी। यानी की इन गैस के बादलों का निर्माण ब्रह्मांड की निर्माण कुछ हजार वर्षों बाद हुआ। साइंटिस्ट्स का मानना है कि पहले सितारे के खत्म होते वक्त विस्फोट में कार्बन, ऑक्सीजन और मैग्नीशियम जैसे विभिन्न रासायनिक तत्व निकले जो नई पीढ़ी के सितारों की बाहरी परतों में पाए जाते हैं।
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