इमरान खान के इस्लामी ब्रदरहुड को बड़ा झटका, पाकिस्तान छोड़ अमेरिका के ग्रुप में तुर्की शामिल

तुर्की के राष्ट्रपति ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अमेरिका पूरी तरह से तुर्की पर भरोसा कर सकता है और अफगानिस्तान में सिर्फ तुर्की ही अमेरिका का सबसे विश्वसनीय सहयोगी है।

वॉशिंगटन/अंकारा, जून 14: इस्लामिक ब्रदरहुड का सपना लेकर सऊदी अरब तक से पंगे लेने वाले इमरान खान को तुर्की ने बड़ा झटका दिया है और तुर्की अमेरिका वाली ग्रुप में जाकर खड़ा हो गया है। तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने साफ तौर पर अमेरिका को कहा है कि वो तुर्की पर भरोसा कर सकता है और तुर्की अमेरिका का भरोसा कभी नहीं तोड़ेगा।

अमेरिका को दिलाया भरोसा

अमेरिका को दिलाया भरोसा

दरअसल, अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना निकल रही है और अमेरिका को अभी भी अफगानिस्तान में आतंकियों पर भरोसा नहीं है। ऐसे में अमेरिका चाहता है कि अफगानिस्तान में उसे कोई देश मदद करेगा। ऐसे में तुर्की के राष्ट्रपति ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अमेरिका पूरी तरह से तुर्की पर भरोसा कर सकता है और अफगानिस्तान में सिर्फ तुर्की ही अमेरिका का सबसे विश्वसनीय सहयोगी है। माना जा रहा है कि तुर्की के राष्ट्रपति अमेरिका के साथ अपने संबंध सुधारना चाहता है और वो अफगानिस्तान में अमेरिका की मदद कर वो राष्ट्रपति जो बाइडेने के विश्वासपात्र होना चाहते हैं। वहीं, तुर्की पश्चिमी देशों के सैन्य संगठन नाटो का भी हिस्सा है और तुर्की के सैनिक नाटो की तरफ से अफगानिस्तान में मौजूद हैं, ऐसे में तुर्की के राष्ट्रपति का ये बयान काफी अहम माना जा रहा है। तुर्की के राष्ट्रपति ने राजधानी अंकारा में ब्रसेल्स रवाना होने से पहले मीडिया से बात करते हुए कहा कि 'अमेरिका जल्द ही अफगानिस्तान छोड़ने की तैयारी कर रहा है और जिस क्षण से वे चले गए हैं, वहां शांति प्रक्रिया को बनाए रखने वाला एकमात्र विश्वसनीय देश स्पष्ट रूप से तुर्की है।'

अफगानिस्तान में रहेगी तुर्की की सेना

अफगानिस्तान में रहेगी तुर्की की सेना

यूएस सेंट्रल कमांड ने पिछले हफ्ते कहा कि अमेरिकी सेना की अफगानिस्तान से 50 प्रतिशत से ज्यादा निकल गई है। वहीं, तुर्की ने कहा है कि वह काबुल हवाई अड्डे की सुरक्षा के लिए अफगानिस्तान में सैनिकों को रखने के लिए तैयार है, जो पश्चिमी राजनयिकों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अफगानिस्तान से सुरक्षित निकलने के लिए बेहद जरूरी है। एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने रविवार को कहा कि तुर्की के अधिकारियों ने अमेरिकी अधिकारियों को अपने अफगानिस्तान के आगे की कार्ययोजना के बारे में पहले से ही बता दिया है। और तुर्की ने कहा है कि तुर्की के इस कदम से अमेरिका काफी खुश है और अमेरिका ने तुर्की को कहा है कि वो अफगानिस्तान पर तुर्की से आगे की कार्यवाबी को लेकर बात करेगा।

अफगानिस्तान पर अमेरिका की चिंता

अफगानिस्तान पर अमेरिका की चिंता

अफगानिस्तान के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के एक अधिकारी ने कहा कि काबुल में हामिद करजई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए एक सुरक्षा ढांचे पर काम चल रहा है। जिसे जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा, लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि सरकार ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि हवाई अड्डे की जिम्मेदारियों को तुर्की के सुरक्षाबलों को सौंपना है या नहीं। वहीं, अमेरिका और गठबंधन सुरक्षा बलों (नाटो) की पूर्ण वापसी के बाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की सुरक्षा अफगानिस्तान के सहयोगियों के लिए एक प्रमुख चिंता का विषय रही है। जिसको लेकर नाटो के सदस्यों में बात होने वाली है। लेकिन, तुर्की के राष्ट्रपति ने जिस तरीके से आगे बढ़कर अफगानिस्तान में अमेरिका की चिंता को दूर किया है, उसने जो बाइडेन की परेशानी को बहुत हद तक कम जरूर कर दिया होगा।

पाकिस्तान को बड़ा झटका

पाकिस्तान को बड़ा झटका

सऊदी अरब से पाकिस्तान ने इसीलिए बैर मोल लिया था, ताकि वो तुर्की के करीब आगर नया इस्लामिक ब्रदरहुड बना सके। लेकिन, तुर्की ने खुद को अमेरिका का विश्वासपात्र बताकर पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया है। ऐसा इसलिए क्योंकि, अमेरिका लंबे वक्त से पाकिस्तान में सैन्य अड्डा मांग रहा है और पाकिस्तान की तरफ से मोलभाव दिया जा रहा है, ऐसे मे अमेरिका की नजरों से भी पाकिस्तान गिरा है और ना वो तुर्की का रह पाया और ना ही सऊदी अरब का। दरअसल, पाकिस्तान कोई और खेल खेलने की फिराक में था। पाकिस्तान चाहता था कि वो तुर्की और ईरान के साथ नया इस्लामिक गुट बनाकर ना सिर्फ सऊदी अरब को झटका दे, बल्कि बीच से पैसा भी कमाए। लेकिन, तुर्की की आर्थिक स्थिति खुद खराब है और वो किसी हाल में अमेरिका की नाराजगी मोल लेना नहीं चाहता है। वहीं, ईरान खुद परमाणु ऊर्जा को लेकर अमेरिका से बातचीत के जरिए प्रतिबंधों को खत्म करवाना चाहता है। ऐसे में अब पाकिस्तान इसलिए फंस गया है कि क्या वो अमेरिका को सैन्य अड्डा दे या नहीं दे?

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