Elon Musk की कंपनी मानव मस्तिष्क में चिप लगाने का करेगी ट्रायल, क्या मोबाइल फोन बन जाएगा दिमाग?

पिछले साल अप्रैल महीने में एलन मस्क की कंपनी न्यूरालिंक ने एक ऐसा सुपर चिप बनाया था, जिसे इंसानी शरीर में लगाया जा सकता है और इसका ट्रायल बंदर और सूअर पर सफलता के साथ किया गया था।

वॉशिंगटन, जनवरी 21: सुअर और बंदर के दिमाग में कामयाबी के साथ चिप लगाने के बाद एलन मस्क की कंपनी 'न्यूरालिंक' जल्द ही इंसानों के दिमाग में चिप लगाने का ट्रायल करने जा रही है और कंपनी ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए क्लिनिकल ट्रायल डायरेक्टर की वैकेंसी निकाली है। खुद कंपनी के डायरेक्टर एलन मस्क ने एक वीडियो जारी कर क्लिनिकल ट्रायल डायरेक्टर की भर्ती निकाली है, जो इस प्रोजेक्ट की देखरेख कर सके। यानि, बहुत जल्दी हम मानव मस्तिष्क में चिप लगा हुआ देख सकेंगे और जिस तरह से किसी मोबाइल फोन को लैपटॉप या कंप्यूटर से जोड़ते हैं, ठीक उसी तरह से चिप लगे इंसान को कम्प्यूटर से जोड़ सकते हैं।

इंसानी दिमाग में चिप

इंसानी दिमाग में चिप

पिछले साल अप्रैल महीने में एलन मस्क की कंपनी न्यूरालिंक ने एक ऐसा सुपर चिप बनाया था, जिसे इंसानी शरीर में लगाया जा सकता है। यानि, इस चिप की मदद से दिमागी सोच को बदला जा सकता है। और पिछले साल इस सुपर चिप का प्रयोग जब बंदर पर किया गया था, तो वो बंदर भी वीडियो गेम खेलने लगा था। एलन मस्क की कंपनी न्यूरालिंक ने एक वीडियो शेयर करते हुए बंदर को वीडियो गेम खेलते हुए दिखाया था और दावा किया था कि, बहुत जल्द इंसानों के दिमाग में भी चिप को लगा दिया जाएगा। वहीं, अब न्यूरालिंक कंपनी ने बकायदा अपने इस प्रोजेक्ट के लिए डायरेक्टर की वैकेंसी निकाली है। कंपनी की तरफ से कहा गया है कि, डायरेक्टर का काम दिमाग में चिप लगाने के ट्रायल का मॉनिटर करना होगा और पूरी टीम के साथ मिलकर काम करना होगा।

क्लिनिकल ट्रायल डायरेक्टर की खोज

क्लिनिकल ट्रायल डायरेक्टर की खोज

न्यूरालिंक कंपनी की तरफ से कहा गया है कि, कंपनी को एक ऐसे क्लिनिकल ट्रायल डायरेक्टर की खोज है, जो काफी लेटेस्ट डॉक्टरों और इंजीनियर्स की टीम के साथ मिलकर काम कर सके और क्लिनिकल ट्रायल डायरेक्टर को उन लोगों के साथ भी काम करना होगा, जिनके दिमाग में चिप लगाई जानी है। कंपनी न्यूरालिंक ने यह वैकेंसी कैलिफोर्नियां स्थिति अपने रिसर्ट सेंटर फ्रेमोंट के लिए निकाली है, जहां उम्मीदवार को कम्प्यूटर की सुविधा, खाना और 'दुनिया को बदलने का अवसर' मिलेगा। निकाली गई वैकेंसी से पता चलता है कि, उम्मीदवार को न्यूरालिंक के क्लिनिकल रिसर्च को सक्षम बनाने के साथ साथ तमाम नियमों का पालन करते हुए काम करना होगा।

एक साल के अंदर ट्रायल

एक साल के अंदर ट्रायल

हालांकि, वैकेंसी में यह नहीं बताया गया है कि, परीक्षण कब शुरू होने वाला है, लेकिन एलन मस्क ने पिछले महीने खुलासा किया था कि, एक साल से कम वक्त बचा है। जिसका मतलब ये है, कि इंसानों के दिमाग में चिप लगाने का काम इसी साल से शुरू हो सकता है। एलन मस्क ने वॉल स्ट्रीट जर्नल के सीईओ के साथ एक लाइव-स्ट्रीम साक्षात्कार के दौरान कहा कि, "न्यूरालिंक का चिप बंदरों में अच्छी तरह से काम कर रहा है और हम वास्तव में बहुत सारे परीक्षण कर रहे हैं और पुष्टि कर रहे हैं कि यह बहुत सुरक्षित और भरोसेमंद है और न्यूरोलिंक डिवाइस को सुरक्षित रूप से हटाया भी जा सकता है।"

बीमार लोगों को मिलेगी मदद

बीमार लोगों को मिलेगी मदद

एलन मस्क ने कहा कि, पहला न्यूरालिंक प्रोडक्ट उन इंसानों को काफी ज्यादा फायदा पहुंचाने वाला है, जो लगवाग्रस्त हैं या फिर ऐसी बीमारियों से पीड़ित हैं, जिनसे उनका शरीर असक्षम हो गया है। ऐसे व्यक्ति सिर्फ अपने दिमाग इस्तेमाल कर बिना उंगलियों का इस्तेमाल किए स्मार्ट फोन चला सकता है और अपनी बात लोगों को बता सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर कंपनी ऐसा करने में कामयाब हो ती है तो इसका अगला चरण भी बेहद दिलचस्प होने वाला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर सब कुछ ठीक रहता है तो तीसरे चरण में इस चिप की मदद से लकवाग्रस्त इंसानों को चलने के लिए प्रेरित किया जाएगा। हालांकि, कंपनी की तरफ से अभी तक एफडीए से मंजूरी मांगी गई है और एफडीए के पास अभी तक मंजूरी लंबित है।

2016 में न्यूरालिंक की स्थापना

2016 में न्यूरालिंक की स्थापना

एलन मस्क ने साल 2016 में न्यूरालिंक की स्थापना की थी, ताकि असहाय लोगों की मदद की जा सके और कंप्यूटर के साथ मनुष्यों को मिलाकर एक ऐसा तरीका बनाया जा सके, जिससे इंसानों की मदद की जा सके। न्यूरोलिंक की प्रणाली में छोटे लचीले धागों से जुड़ी एक कंप्यूटर चिप होती है जिसे 'सिलाई-मशीन-जैसे' रोबोट द्वारा मस्तिष्क में सिला जाता है। ये डिवाइस मस्तिष्क में संकेतों को उठाता है, जिसे बाद में मोटर नियंत्रण में ट्रांसलेट किया जाता है। एलन मस्क का कहना है कि ये तकनीक मस्तिष्क में सुरक्षित साबित हुई है और इसे आसानी से हटाया जा सकता है, इसलिए न्यूरालिंक को मानव परीक्षणों से वापस रखने वाली एकमात्र चीज एफडीए की मंजूरी है।

बंदर ने खेला था वीडियो गेम

पिछले साल जिस बंदर का वीडियो जारी किया गया था, उसमें दिख रहा था कि, बंदर को पहले एक जॉयस्टिक के जरिए ऑन स्क्रिन गेम खेलने के लिए पढ़ाया गया था और इस बंदर के दिमाग में 6 हफ्ते पहले सुपर चिप लगाया गया था। वीडियो में दिख रहा था कि, बंदर जॉय स्टिक के जरिए रंगीन चौकोर इलाके की तरफ जाता है और फिर वीडियो गेम खेलने लगता है। रिपोर्ट के मुताबिक एलन मस्क की कंपनी न्यूरालिंक ने मशीन लर्निंग की मदद से जान लिया था कि बंदर चौकोर रंगीन बॉक्स की तरफ जाने वाला है। इसके साथ ही न्यूरालिंक ने यह भी जान लिया था कि बंदर के हाथों की हलचल क्या होने वाली है।

टेक्नोलॉजी जगत के 'शहंशाह'

टेक्नोलॉजी जगत के 'शहंशाह'

एलन मस्क अपने नये नये आइडियाज के लिए जाने जाते हैं। एलन मस्क की कंपनी टेस्ला विश्व की पहली इलेक्ट्रिक कार है, जिसका प्रोडक्शन भारत में शुरू करने के लिए बात चल रही है। वहीं, अंतरिक्ष में एलन मस्क लगातार नई नई क्रांतियां कर रहे हैं। एलन मस्क की कंपनी बहुत जल्द आम लोगों को अंतरिक्ष के सैर पर ले जाने वाली है वहीं अब इंसानी दिमाग को कम्प्यूटर से जोड़ने की कोशिश कर उन्होंने विज्ञान के नये चमत्कार को दुनिया के सामने रखा है। एलन मस्क ने इंसानों के दिमाग को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से जोड़ने की कोशिश की है और इस कंपनी का नाम रखा है न्यूरालिंक। एलन मस्क की ये कंपनी इंसानों के दिमाग में सुपर चिप लगाएगी। जिसकी बदौलत कम्प्यूटर के जरिए इंसानों के दिमाग की तमाम एक्टिविटी को रिकॉर्ड किया जा सकेगा और उसपर असर भी डाला जा सकेगा।

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