आठ साल की निकोल हैं दुनिया की सबसे कम उम्र की खगोल वैज्ञानिक

ब्राजीलिया, 01 अक्टूबर। ब्राजील की रहने वाली निकोल जब चलना सीख रही थीं तो वो आसमान के सितारों तक पहुंचने के लिए बाहें फैला दिया करती थीं. आज सिर्फ आठ साल की उम्र में उन्हें दुनिया की सबसे कम उम्र की खगोल वैज्ञानिक के रूप में जाना जाता है.

आज वो नासा से जुड़े एक कार्यक्रम के तहत अंतरिक्ष में नए नए क्षुद्र ग्रहों की तलाश कर रही हैं, अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों में भाग ले रही हैं और देश में अंतरिक्ष और विज्ञान के क्षेत्रों से जुड़े बड़े लोगों से मिल रही हैं. उनका कमरा सौर मंडल के पोस्टरों, रॉकेटों के छोटे छोटे मॉडलों से और स्टार वॉर्स फिल्म के किरदारों के पुतलों से भरा हुआ है.

प्रांस का इंटरनैशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर

खोज चुकी हैं नए क्षुद्र ग्रह

इसी कमरे में वो अपने कंप्यूटर पर काम करती हैं और दो बड़ी बड़ी स्क्रीनों पर आसमान की तस्वीरों का अध्ययन करती हैं. वो जिस कार्यक्रम के साथ जुड़ी हुई हैं उसका नाम है "एस्टेरॉयड हंटर्स". इसका उद्देश्य है बच्चों और युवाओं का विज्ञान से परिचय कराना और उन्हें खुद अंतरिक्ष में खोज करने का मौका देना.

यह प्रोजेक्ट इंटरनैशनल एस्ट्रोनॉमिकल सर्च कोलैबोरेशन कार्यक्रम के तहत चलता है, जो नासा के साथ संबद्ध एक विज्ञान कार्यक्रम है. ब्राजील का विज्ञान मंत्रालय इसमें साझेदार है.

गहरे भूरे रंग के बालों और ऊंची आवाज वाली निकोल गर्व से बताती हैं कि उन्होंने 18 क्षुद्र गृह खोज भी लिए हैं. उन्होंने बताया, "मैं उनका नाम ब्राजील के वैज्ञानिकों या मेरे मम्मी और पापा के नाम पर रखूंगी." उनके द्वारा की गई खोजों के प्रमाणन में सालों लग सकते हैं लेकिन अगर ऐसा हो जाएगा तो वो क्षुद्र गृह खोजने वाली दुनिया की सब उम्र की व्यक्ति बन जाएंगी.

अभी तक यह रिकॉर्ड इटली की रहने वाली 18-वर्षीय लुइगी सन्निनो के पास है. निकोल ब्राजील के पूर्वोत्तर में फोर्तालेजा शहर में एक स्कॉलरशिप की बदौलत एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ती हैं. उनके खगोल विज्ञान के शिक्षक हेलिओमार्जिओ रोद्रिगेज मोरेरा कहते हैं, "वो वाकई सब पहचान लेती है. वो तस्वीरों में क्षुद्र ग्रहों की तरह दिखने वाले बिंदुओं को तुरंत देख लेती है और अक्सर अपनी कक्षा के बाकी बच्चों को भी सलाह देती है जब उन्हें संशय होता है कि उन्हें क्षुद्र ग्रह मिला नहीं."

मोरेरा ने यह भी बताया, "सबसे जरूरी बात यह है कि वो अपना ज्ञान दूसरी बच्चों के साथ साझा करती है. वो विज्ञान के प्रसार में योगदान देती है." निकोल का परिवार फोर्तालेजा से करीब 1100 किलोमीटर दूर मचियो का रहने वाला है. वो लोग उसे स्कॉलरशिप मिलने के बाद इस साल की शुरुआत में फोर्तालेजा जा कर रहने लगे.

उनके पिता कम्प्यूटर वैज्ञानिक हैं और उन्हें दूर से ही अपनी नौकरी करते रहने की इजाजत मिल गई. उनकी मां 43-वर्षीय जिल्मा जानका क्राफ्ट उद्योग में काम करती हैं. वो बताती हैं, "खगोल विज्ञान को लेकर वो गंभीर है इसका अहसास हमें तब हुआ जब उसने चार साल की होने पर अपने जन्मदिन के तोहफे में एक टेलिस्कोप मांगी. मैं तो उस समय जानती भी नहीं थी कि टेलिस्कोप क्या चीज होती है."

निकोल टेलिस्कोप पाने के लिए इतनी आतुर थीं कि उन्होंने अपने माता-पिता से कहा कि उसके बाद वो किसी भी जन्मदिन पर कोई तोहफा नहीं मांगेगी. फिर भी यह तोहफा उनके परिवार के लिए काफी महंगा था और निकोल को वह तभी मिल पाया जब वो सात साल की हुईं. उनकी मां ने बताया कि टेलिस्कोप खरीदने के लिए उनके सारे दोस्तों ने भी पैसे मिलाए.

निकोल अब एक एयरोस्पेस इंजीनियर बनना चाहती हैं. वो कहती हैं, "मैं राकेट बनाना चाहती हूं. मैं फ्लोरिडा में नासा के केनेडी स्पेस सेंटर जाना चाहती और वहां के रॉकेटों को देखना चाहती हूं. मैं यह भी चाहती हूं कि ब्राजील में सभी बच्चे विज्ञान तक पहुंच सकें."

सीके/ (एएफपी)

Source: DW

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