पृथ्वी की तरफ आसमान से आ रही आफत! आधे रास्ते पहुंचा परमाणु बम से भी ज्यादा शक्तिशाली एस्टेरॉयड

वाशिंगटन, 03 दिसंबर। पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस समेत कई प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रही है। इस बीच अब अंतरिक्ष से भी धरती की ओर बड़ी तबाही आ रही है। हाल ही में नासा के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि पृथ्वी को ओर तेजी से एक एस्टेरॉयड बढ़ रहा है, जिसकी अगर हमारे प्लैनेट से टक्कर होती है तो यह कई परमाणु बमों के फटने जितनी तबाही मचा सकता है। हालांकि अभी यह धरती से काफी दूर है।

धरती की तरफ आसमान से आ रही तबाही

धरती की तरफ आसमान से आ रही तबाही

गौरतलब है कि हाल ही में नासा ने अपने नए मिशन डबल ऐस्टेरॉयड रीडायरेक्शन टेस्ट (डीएआरटी) को लॉन्च किया है, जो अंतरिक्ष में पृथ्वी के लिए खतरा बनने वाले एस्टेरॉयड का रास्ता मोड़ सकेगा। हालांकि यह मिशन अभी टेस्ट की प्रक्रिया में है, लेकिन उससे पहले ही आसमान से पृथ्वी की तरफ बड़ी आफत आ रही हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक इस एस्टेरॉयड की रफ्तार 4 मील प्रति सेकंड है।

परमाणु बम से भी ज्यादा शक्तिशाली

परमाणु बम से भी ज्यादा शक्तिशाली

विशालकाय एस्टेरॉयड यानी उल्कापिंड को वैज्ञानिकों ने 4660 Nereus (2018 एएच) नाम दिया है, जो कि परमाणु बम से भी ज्यादा शक्तिशाली है। इसके साइज की बात करें तो यह पेरिस के एफिल टॉवर जितना बड़ा है। अगर धरती से इसकी टक्कर होती है तो हो सकता है पूरा का पूरा एक देश ही नक्शे से गायब हो जाए। नासा के मुताबिक यह एस्टेरॉयड पृथ्वी के सबसे करीब 11 दिसंबर को होगा।

धरती पर मच सकती है तबाही!

धरती पर मच सकती है तबाही!

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस 'दुश्मन' की टक्कर पृथ्वी के ऑर्बिट से हो सकती है, जिस वजह से हमारी धरती पर भी तबाही मच सकती है। राहत की बात ये है कि पृथ्वी से इसकी टक्कर की संभावना ना के बराबर है, यह हमारे नजदीक से होकर निकल जाएगा। हालांकि पृथ्वी की ग्रेविटी अभी भी एक खतरा बनी हुई है, अगर ग्रेविटी ने एस्टेरॉयड को अपनी ओर खींच लिया तो विनाश होना निश्चित है।

पृथ्वी और चांद की दूरी का 10 गुना

पृथ्वी और चांद की दूरी का 10 गुना

नासा के वैज्ञानिकों का मानना है कि यह पृथ्वी से नहीं टकराएगा क्योंकि एस्टेरॉयड का वर्तमान डायरेक्शन पृथ्वी से लगभग 4.5 मिलियन किलोमीटर (लगभग 2,796,170 मील) दूर है। यानी एस्टेरॉयड और पृथ्वी के बीच लाखों मील की दूरी होगी। आपको बता दें कि यह यह पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी से बारह गुना अधिक है। पहली बार 4660 Nereus की खोज 1982 में हुई थी, तब से ही वैज्ञानिक इस पर नजर बनाए हुए हैं।

काफी धीमी है एस्टेरॉयड की रफ्तार

काफी धीमी है एस्टेरॉयड की रफ्तार

तब से लेकर यह अब पृथ्वी के काफी करीब पहुंच चुका है। 2018 में यह पृथ्वी से सिर्फ 296,758 किमी (या 184,396 मील) दूरी पर था, यह पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी से कम है। हालाकि, सबसे बुरी बात यह है कि एस्टेरॉयड की धीमी रफ्तार ने वैज्ञानिकों के लिए इसे आते हुए देखना लगभग असंभव बना दिया है। पहली बात इतने बड़े एस्टेरॉयड को गुजरने के बाद से अब तक कोई भी पृथ्वी के इतने करीब नहीं आया।

और तीन बार धरती के करीब से गुजरेगा ये एस्टेरॉयड

और तीन बार धरती के करीब से गुजरेगा ये एस्टेरॉयड

वैज्ञानिकों के मुताबिक भविष्य में साल 2028 तक भी पृथ्वी के इतने करीब से किसी एस्टेरॉयड के गुजरने की उम्मीद नहीं है। नासा के मुताबिक 4660 Nereus एक बार फिर 2 मार्च 2031 को धरती के करीब से गुजरेगा और इसके बाद नवंबर 2050 को फिर से धरती के करीब आएगा। अनुमान है कि साल 2060 के बाद यह फिर से पृथ्वी के करीब आ सकता है। हालांकि अभी वर्तमान में इस एस्टेरॉयड से पृथ्वी को कोई खतरा नहीं है। अगर किसी वजह से यह हमसे टकराता है तो लाखों लोगों की जान जा सकती है।

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