उल्टी दिशा में घूमने लगा पृथ्वी का केंद्र, जानें इस शोध को लेकर क्या कह रहे हैं वैज्ञानिक ?
पृथ्वी का आंतरिक केंद्र उल्टी दिशा में घूमने लगा है। यह जानकारी एक शोध पर आधारित है। इसके मुताबिक पहले कुछ वर्षों तक आंतरिक केंद्र का घूमना बंद हुआ और फिर उल्टी दिशा में घूमने लगा।

एक नए शोध का नतीजा चौंकाने वाला है। इसके मुताबिक धरती के आंतरिक केंद्र ने उल्टी दिशा में घूमना शुरू कर दिया है। पहले इसमें कुछ वक्त के लिए ठहराव आया और फिर इसने विपरीत दिशा में घूमना शुरू कर दिया। हालांकि, नई रिसर्च पर वैज्ञानिकों के बीच मतभेद उभरने के भी आसार हैं। क्योंकि, इसपर पहले भी कुछ रिसर्च हुए हैं और सबके निष्कर्षों में काफी अंतर है। शोधार्थियों का यह भी अनुमान है कि आने वाले कुछ दशकों के बाद एक बार फिर पृथ्वी का आंतरिक केंद्र अपने घूमने की दिशा बदल लेगा।

पृथ्वी के केंद्र की घूमने की दिशा उल्टी हुई
एक शोध के आधार पर बताया गया है कि पृथ्वी का आंतरिक केंद्र (Earth's solid inner core) जो कि गर्म लोहे के बॉलनुमा है, उसने अपने घूर्णन को रोक दिया है और विपरीत दिशा में घूमने लगा है। पृथ्वी का आंतरिक केंद्र इसकी सतह से मोटे तौर पर 5,000 किलोमीटर नीचे बताया जाता है। एएफपी की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह 'धरती के अंदर धरती' की तरह है और तरल धातू से बने बाहरी केंद्र में स्वतंत्र रूप से घूम सकता है। हालांकि, पृथ्वी का आंतरिक केंद्र (inner core ) कैसे घूमता है और कैसे इसकी दिशा बदलती है, यह वैज्ञानिकों के बीच बहस का मुद्दा है और ताजा रिसर्च के विवादास्पद साबित होने से इनकार नहीं किया जा सकता।

2009 के करीब पृथ्वी के आंतिक केंद्र में लगी ब्रेक- शोध
धरती के आंतरिक केंद्र के बारे में जितना कुछ भी ज्ञात है, वह भूकंप की वजह से पैदा हुई भूकंपीय तरंगों में अंतर को मापने और कई बार परमाणु विस्फोटों से पता चल पाया है। यह (तरंगें) पृथ्वी के मध्य से होकर गुजरता है। आंतरिक केंद्र की गतिशीलता को ट्रैक करने के लिए 6 दशकों में हुए भूकंपों से पैदा हुई भूकंपीय तरंगों का विश्लेषण किया गया है, जो कि नेचर जियोसाइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है। चीन की पेकिंग यूनिवर्सिटी से जुड़े इस शोध पत्र के लेखक शिआओ डॉन्ग और यी यैंग के मुताबिक उन्होंने पाया है कि आंतरिक केंद्र का घूमना, '2009 के आसपास लगभग ठहर गया और उसके बाद विपरीत दिशा में घूमने लगा।'

पृथ्वी के सतह पर पड़ने वाले प्रभाव की जानकारी नहीं- शोधकर्ता
उन्होंने एजेंसी को बताया, 'हम मानते हैं कि आंतरिक केंद्र घूमता है, धरती की सतह के सापेक्ष, पीछे और आगे, जैसे कि एक झूला। ' 'घूमने का एक चक्र करीब 7 दशकों का होता है..' मतलब, उनके मुताबिक मोटे तौर पर हर 35 साल में इसकी घूमने की दिशा बदल जाती है। उनका कहना है इससे पहले इसके घूमने की दिशा 1970 के दशक में बदली थी और अब अनुमान है कि 2040 के दशक के मध्य में बदलेगी। हालांकि, अभी तक इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है कि आंतरिक केंद्र में बदलावों का धरती की सतह कितना प्रभाव पड़ता है। वैसे शोधकर्ताओं का मानना है कि पृथ्वी की सभी परतों, आंतरिक केंद्र से लेकर इसकी सतह तक सबके साथ वास्तविक संबंध है।

इस शोध के निष्कर्ष पर क्या सवाल उठ रहे हैं ?
शोधार्थियों ने कहा है कि 'हमें यकीन है कि हमारा रिसर्च कुछ शोधकर्ताओं को ऐसे मॉडल बनाने और उसका परीक्षण करने के लिए प्रेरित कर सकता है, जो पूरी पृथ्वी को एक एकीकृत गतिशील प्रणाली के रूप में मानें।' हालांकि, जो एक्सपर्ट इस शोध से नहीं जुड़े हैं, वह इसके निष्कर्षों को लेकर सावधान हैं। उनका कहना है कि कई और सिद्धांत भी हैं और यह चेतावनी भी दे रहे हैं कि पृथ्वी के केंद्र को लेकर अभी भी कई रहस्य कायम हैं। मसलन, दक्षिणी कैलिफोर्निया के एक भूकंपविज्ञानी जॉन विडाले ने कहा है, 'यह बेहतरीन वैज्ञानिकों की ओर से बहुत सारे डेटा के आधार पर बहुत ही सावधानीपूर्वक किया गया शोध है...' '(लेकिन) मेरे विचार से कोई भी मॉडल सभी डेटा को विस्तार से नहीं बताता है।'

अलग रिसर्च में अलग नतीजा
विडाले ने अपनी रिसर्च पिछले साल प्रकाशित की थी, जिसमें उनके मुताबिक धरती का आंतरिक केंद्र ज्यादा तेजी से दोलन करता है और लगभग हर 6 साल में अपनी दिशा बदल लेता है। उनका शोध 1960 के दशक और 1970 की दशक की शुरुआत में हुए दो परमाणु विस्फोटों से पैदा हुए भूकंपीय तरंगों पर आधारित था। दोनों रिसर्च में पिछली बार दिशा बदलने का समय लगभग एक ही है, जिसे कि विडाले 'महज संयोग' बता रहे हैं। एक और थ्योरी है, जिसे कि विडाले अच्छे तथ्यों पर आधारित बताते हैं। इसके मुताबिक पृथ्वी का आंतरिक हिस्सा 2001 से 2013 के बीच बहुत ही तेजी से खिसका था और तब से शांत पड़ा है।

क्यों सारे नतीजे माने जाते हैं विवादास्पद ?
वहीं, ऑस्ट्रेलिया के नेशनल यूनिवर्सिटी के भूभौतिकी वैज्ञानिक हर्वोजे त्कालसिक का एक रिसर्च प्रकाशित है, जिसमें कहा गया है कि पृथ्वी के आंतरिक केंद्र का प्रत्येक चक्र 20 से 30 वर्षों का है, जबकि, नए शोध में इसे 70 साल बताया गया है। उन्होंने कहा है कि 'ये सारे गणितीय मॉडलों के गलत होने की संभावना ज्यादा है, क्योंकि यह देखे गए डेटा के विश्लेषण पर आधारित हैं, ना कि आवश्यकतानुसार जुटाए गए डेटा पर आधारित।' 'इसलिए भूभौतिकीय समुदाय इन निष्कर्षों पर बंट जाएंगे और यह विषय विवादास्पद ही बना रहेगा।'(तस्वीरें- सांकेतिक)












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