इस देश में मिला रहस्यमयी माया कैलेंडर, हाथ लगे 2300 साल पुराने ‘सात हिरण’, दिनों के होते थे 260 नाम
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने बुधवार को कहा है कि, माया कैलेंडर के ये टुकड़े उत्तरी ग्वाटेमाला के जंगलों में सैन बार्टोलो पुरातत्व स्थल पर पाए गए थे।
वॉशिंगटन, अप्रैल 16: माया कैलेंडर को लेकर वैज्ञानिकों ने अभी तक जो सोच बना रखी थी, वो सोच उस वक्त हैरानी में बदल गईं, जब अमेरिका के ग्वाटेमाला में एक पिरामिड के खंडहरों में माया कैलेंडर के अवशेष मिले। माना जा रहा है, कि माया कैलेंडर को लेकर की गई ये खोज, प्राचीन संस्कृति को करीब से जानने के दरवाजे खोल सकते हैं और इस कैलेंडर ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है।

वैज्ञानिकों को मिला माया कैलेंडर
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, रिसर्चर्स में ग्वाटेमाला में एक पिरामिड के खंडहरों के अंदर से माया कैलेंडर के अवशेष खोजने में कामयाबी हासिल की है और ये माया कैलेंडर करीब 2 हजार 300 साल पुराना है और इस माया कैलेंडर का प्रतिनिधित्व दुर्लभ 'सात हिरण' कर रहे हैं, जिसे एग्लीफ कहा जाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, ये खोज प्राचीन संस्कृति की प्रसिद्ध उपलब्धियों में से एक है और इस कैलेंडर की खोज से साबित हो गया है, कि प्राचीन काल में सिर्फ चिन्हों या प्रतीकों का ही नहीं, बल्कि अक्षरों का भी इस्तेमाल होता था।

शोधकर्ताओं ने क्या कहा
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने बुधवार को कहा है कि, माया कैलेंडर के ये टुकड़े उत्तरी ग्वाटेमाला के जंगलों में सैन बार्टोलो पुरातत्व स्थल पर पाए गए थे। ये जगह साल 2001 में उस वक्त सुर्खियों में आया था, जब यहां पर माया कैलेंडर के ही कुछ रंगीन अवशेष मिले थे, जो ईशा पूर्व 100 साल यानि आज ले करीब 2100 साल पुराने थे और उसके बाद से ही इस जगह पर वैज्ञानिक लगातार रिसर्च कर रहे थे। हालांकि, माया कैलेंडर के इस अवशेष के मिलने के बाद अब वैज्ञानिक कुछ भी अंदाजा नहीं लगा पा रहे हैं, कि आखिर कब से माया कैलेंडर का इस्तेमाल किया जाता रहा है।

माया कैलेंडर की खासियत
आज जो सामान्य कैलेंडर इस्तेमाल किया जाता है, उसमें हम एक साल तक की जानकारियों का संग्रह तैयार करते हैं, यानि आजकर के कैलेंडर में 356 दिन होते हैं। लेकिन, माया कैलेंडर में 18 हजार 980 दिनों की एक साथ गणना कर कैलेंडर तैयार किया जाता था। यानि, अभी हमें हर साल कैलेंडर बदलने की जरूरत होती है, लेकिन माया कैलेंडर को बदलने के लिए 18 हजार 980 दिन यानि 52 सालों का इंतजार करना पड़ता। यानि, एक माया कैलेंडर में 52 सालों की जानकारियां दर्ज की जाती थीं। वैज्ञानिकों का मानना है कि, माया कैलेंडर का इस्तेमाल उत्तरी और मध्य अमेरिका के स्वदेशी लोग पिछले हजारों सालों से करते आ रहे हैं।

‘सात हिरणों’ के चिन्ह के अवशेष का मतलब
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्वाटेवाला में माया उत्खनन स्थल पर सैन बार्टोलो नामक स्थान पर कुछ टुकड़े मिले हैं, जिन्हें चूना पत्थर से बनाया गया है और उनमें से एक टुकड़े पर 'सात हिरणों' के चिन्ह मिले हैं, जबकि जो दूसरा टुकड़ा मिला है, उसके ऊपर प्राचीन भाषाओं में कुछ लिखा गया है, लिहाजा वैज्ञानिकों के लिए ये काफी आश्चर्य की बात है। रिपोर्ट के मुताबिक, जिस पिरामिड से माया कैलेंडर मिला है, वो करीब 30 मीटर लंबा है। वहीं, हिरण के जो चित्र मिले हैं, उनमें से सातवें नंबर के हिरण के ऊपर माया लेखन में कुछ लिखा हुआ है, जिसे पढ़ने में फिलहाल वैज्ञानिक असमर्थ हैं। इस कैलेंडर में अलग अलग दिनों के 260 नाम हैं।

दीवारों से जुड़े थे टुकड़े
यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सॉस में मेसोअमेरिकन आर्ट के प्रोफेसर डेविड स्टुअर्ट ने इस रिसर्च को अंजाम दिया है और उनका ये रिसर्च जर्नल साइंस एडवांसेज में प्रकाशित किया गया है। प्रोफेसर डेविड स्टुअर्ट ने कहा कि, 'सफेद प्लास्टर के दो छोटे टुकड़े मिले हैं, जिनमें से एक पत्थर का टुकड़ा दीवार के साथ जुड़ा था'। उन्होंने कहा कि, ऐसा लगता है कि, इस दीवार को माया सभ्यता के दौरान ही जानबूझकर नष्ट कर दिया गया था, जब वो शायद किसी और दीवार का पुनर्निमाण कर रहे होंगे और फिर ये क्षेत्र पिरामिड के तौर पर विकसित हुआ। उन्होंने कहा कि, दोनों टुकड़े एक साथ फिट होते हैं, जिसपर काले रंग से लिखा गया है। ये माया कैलेंडर 'सात हिरण' के निशान के साथ खुलती है, जिसको पढ़ना काफी मुश्किल है।

चार तरह के माया कैलेंडर
प्रोफेसर डेविड स्टुअर्ट ने कहा कि, 'इस रिसर्च के दौरान जो भी पेंटिंग मिली हैं, वो बुरी तरह से टूटे हुए हैं'। उन्होंने कहा कि, ऐसा लगता है कि, ये जगह प्राचीन काल में शायद कोई बाजार या फिर कोई सभास्थल रहा होगा। उन्होंने कहा कि, माया सभ्यता के दौरान लोगों के पास चार तरह के माया कैलेंडर होते थे और उस वक्त के लोग समय के बारे में हिसाब रखने में काफी दिलचस्पी रखते थे।

अलग अलग तरीके से मापते थे समय
प्रोफेस डेविड ने कहा कि, माया सभ्यता के दौरान लोगों के पास समय के बारे में गणना करने के लिए कई तरीके होते थे, जिनमें से एक तरीका माया कैलेंडर था, जिसे उस वक्त काफी पवित्र माना जाता था और इसकी पहचान ही 'सात दुर्लभ हिरणों' से होता है। प्रोफेस डेविड के मुताबिक, इस कैलेंडर के जरिए सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों की चाल का भी गणना किया जाता था और इस कैलेंडर में दिनों के 260 अलग अलग नाम होते थे, यानि 260 दिनों का कैलेंडर, जिसे त्जोल्किन कहा जाता है। (सभी तस्वीर-फाइल)
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