चीन-तालिबान में गठजोड़ होने से, अफगानिस्तान की इस मुस्लिम आबादी में हड़कंप क्यों है

काबुल, 27 अगस्त: काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद जिस तरह से चीन ने तालिबान का स्वागत किया है, उससे अफगानिस्तान में रह रही सिर्फ हिंदू और सिखों को ही जान का डर नहीं सता रहा है, सरकार समर्थक अफगानों के अलावा भी एक मुस्लिम आबादी है, जो बहुत ज्यादा दहशत में आ चुकी है। यह मुस्लिम आबादी है, चीन के उत्पीड़न से जान बचाकर अफगानिस्तान में शरण लेकर रहने वाले उइगर मुसलमानों की। इनके पूर्वज चीन छोड़कर अफगानिस्तान आ गए थे, लेकिन अब लग रहा है कि वापस फिर से चीन के यातना घरों में जाना पड़ेगा। उन्हें डर है कि तालिबान जबरन ड्रैगन के हवाले कर देगा और फिर से वही सब यातनाएं झेलनी पड़ेंगी। क्योंकि, उनके हक में आवाज उठाने की हिम्मत चीन के सामने कोई भी मुस्लिम देश नहीं कर पाता।

'वो मुझे खोजते हुए आ जाएंगे, क्योंकि मैं चीन की हूं'

'वो मुझे खोजते हुए आ जाएंगे, क्योंकि मैं चीन की हूं'

अफगानिस्तान में रह रहे उइगर मुसलमान इस बात को लेकर डरे हुए हैं कि 'चाइनीज माइग्रेंट' का दर्जा होने के चलते तालिबान उन्हें निश्चित रूप से चीन को प्रत्यार्पित कर देगा। रेडियो फ्री एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान में अभी जो माहौल बना हुआ है उसमें यहां रहने वाले अनुमानित 2,000 उइगर मुसलमान भी हैं, जो अपने साथ बड़ी अनहोनी की आशंका से दहशत में हैं। 10 वर्ष से ज्यादा समय से अपने पति के साथ अफगानिस्तान में शरण ली हुई एक उइगर महिला ने कहा है कि उसे दोनों तरह से खतरा नजर आ रहा है। महिला होने के नाते तालिबान के बर्ताव को लेकर चिंता है कि वे उसके साथ क्या सलूक करेंगे और 'चीनी प्रवासी' का दर्जा होने के चलते वापस चीन भेजे जाने का खतरा अलग सता रहा है। उसने कहा, 'मैं आतंकित हूं कि वो मुझे खोजते हुए आ जाएंगे, क्योंकि मैं चीन की हूं।'

'हमसे कोई नहीं पूछ रहा कि क्या बीत रही है'

'हमसे कोई नहीं पूछ रहा कि क्या बीत रही है'

लगभग हर उइगर मुसलमान इसी तरह की आशंकाओं से घबराया हुआ है। उन्हीं में से मामत नाम का एक उइगर मुसलमान भी है, जिसके पूर्वज चीन से यहां आ गए थे। उसने काफी चिंतित होकर कहा है कि, 'मोटे तौर पर काबुल में 80 उइगर परिवार असमंजस की स्थिति में जी रहे हैं और तालिबान के शासन में अपनी जिंदगी को लेकर सहमे हुए हैं।' उसने आगे कहा कि 'कजाकिस्तान कजाकों को अफगानिस्तान से निकाल रहा है, उज्बेकिस्तान उज्बेक को ले जा रहा है, तुर्की और बाकी सभी देश अपने नागरिकों को यहां से ले जा रहे हैं, लेकिन कोई पूछ भी नहीं रहा है कि हमारे पर क्या बीत रही है। हमारी (उइगर मुसलमानों की) कोई मदद नहीं कर रहा है।'

तालिबान उइगर मुसलमानों की लड़कियों को उठा रहा है

तालिबान उइगर मुसलमानों की लड़कियों को उठा रहा है

रेडियो फ्री एशिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक कई लोगों ने यहां तक जानकारी दी है कि तालिबान के आतंकवादी उइगर मुसलमानों के घरों में घुस रहे हैं और लड़कियों को उठाकर ले जा रहे हैं। चीन की ओर से उइगरों के खिलाफ अपनाई जाने वाली दमनकारी नीति में पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सहभागिता पर अमेरिका के एक रिसर्च ग्रुप ने इसी महीने एक रिपोर्ट भी जारी की थी। उइगर मानवाधिकार प्रोजेक्ट और ऑक्सस सोसाइटी फॉर सेंट्रल एशियन अफेयर्स ने जो रिपोर्ट दी है, उससे पता चलता है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान में रहने वाले उइगर मुसलमानों के लिए चीन की सरकार क्या तरीका अपनाती है। पिछले महीने नीदरलैंड के अर्नहेम शहर ने चीन के वुहान शहर के साथ सहयोग के लिए सिस्टर सिटी का संबंध इसलिए तोड़ लिया था, क्योंकि उसने उइगर मुसलमानों के साथ चीन के बर्ताव को नरसंहार माना था। (आखिरी दोनों तस्वीर-सांकेतिक)

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