'इतना टैरिफ लगा दूंगा कि आपका सिर चकरा जाएगा', ट्रंप ने ऐसा क्यों कहा, किसको दी चेतावनी?
Donald trump India Pakistan: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को फिर दावा किया कि उन्होंने इस साल भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित परमाणु संघर्ष को रोकने में सीधे भूमिका निभाई। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के अधिकारियों से बात की और चेतावनी दी कि अगर दोनों देश संघर्ष जारी रखेंगे तो अमेरिका व्यापारिक सौदे रोक देगा।
ट्रंप के अनुसार, इस हस्तक्षेप से दोनों देशों के बीच तनाव कम हुआ और युद्ध की संभावना टली। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने व्यापार दबाव का इस्तेमाल कर सात या उससे अधिक विमानों के नुकसान के दौरान स्थिति को नियंत्रण में रखा।

डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?
डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कैबिनेट बैठक के दौरान कहा कि, 'मैंने एक बहुत ही शानदार इंसान, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की। मैंने पूछा कि आपके और पाकिस्तान के बीच क्या चल रहा है। फिर मैंने पाकिस्तान से व्यापार के बारे में बात की। मैंने पूछा कि आपके और भारत के बीच क्या चल रहा है? नफ़रत ज़बरदस्त थी। यह बहुत लंबे समय से चल रहा है, जैसे, कभी-कभी सैकड़ों सालों से अलग-अलग नामों से... मैंने कहा, मैं आपके साथ कोई व्यापार समझौता नहीं करना चाहता... आप लोग परमाणु युद्ध में उलझ जाएंगे।
'मैंने कहा, कल मुझे फिर से फ़ोन करना, लेकिन हम आपके साथ कोई समझौता नहीं करेंगे, वरना हम आप पर इतने ज़्यादा टैरिफ लगा देंगे कि आपका सिर घूम जाएगा... लगभग पांच घंटे के अंदर, यह हो गया... अब शायद यह फिर से शुरू हो जाए। मुझे नहीं पता। मुझे ऐसा नहीं लगता लेकिन अगर ऐसा हुआ तो मैं इसे रोक दूंगा। हम ऐसी चीज़ें नहीं होने दे सकते।
6 फाइटर जेट भी गिरे
पूर्व राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि संघर्ष के दौरान सात या अधिक फाइटर जेट ढह गए। उन्होंने कहा, "मैंने देखा कि वे लड़ रहे थे, फिर मैंने देखा कि सात जेट मार गिराए गए। ये बहुत बड़ी क्षति थी, एक जेट की कीमत लगभग 1.5 करोड़ डॉलर थी।" ट्रंप ने पहले भी जुलाई में इस तरह का दावा किया था कि भारत और पाकिस्तान परमाणु संघर्ष के करीब थे और उन्होंने हस्तक्षेप किया।
ट्रंप के दावों को भारत कर चुका है खारिज
ट्रंप के दावों के बावजूद भारत ने बार-बार स्पष्ट किया है कि भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने या सीजफायर स्थापित करने में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं थी। भारतीय अधिकारियों के अनुसार, 10 मई को पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) ने सीधे अपने भारतीय समकक्ष से संपर्क किया। दोनों पक्षों के बीच संवाद के बाद ही सीजफायर पर सहमति बनी और दोनों देशों के सैन्य बलों ने तुरंत संघर्ष रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए। भारत की ओर से यह कदम पूरी तरह द्विपक्षीय प्रक्रिया का हिस्सा था, और इसमें किसी विदेशी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं पड़ी। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार की बातचीत और सहमति दोनों देशों के बीच सीधे नियंत्रण और भरोसे पर आधारित थी, जिससे किसी तीसरे पक्ष की भूमिका की संभावना पूरी तरह खारिज हो जाती है।
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किसी भी तीसरे देश के दखल मंजूर नहीं- भारत
इसके अलावा, भारतीय सेना और संबंधित विभागों ने भी तुरंत स्थिति की समीक्षा की और सीमा पर अतिरिक्त सतर्कता बरती गई। इससे यह सुनिश्चित किया गया कि सीमा पर तनाव और बढ़े नहीं और स्थानीय नागरिक प्रभावित न हों। भारत की इस स्पष्ट नीति ने यह संदेश भी दिया कि वह किसी भी तीसरे देश के दबाव या दखल के बिना अपने हितों और सुरक्षा के प्रति सतर्क और सक्रिय है।
इस तरह, भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर की प्रक्रिया पूरी तरह द्विपक्षीय संवाद और समझौते पर आधारित रही, और किसी बाहरी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं पड़ी।












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