चीनी सामानों पर 60% टैक्स.. ट्रंप की घोषणा के बाद चीन में हड़कंप.. क्यों बंद हो जाएगी दुनिया की फैक्ट्री?
Donald Trump 60% Import Duty on Chinese Product: 12 फरवरी को जब डोनाल्ड ट्रंप फॉक्स न्यूज को इंटरव्यू दे रहा थे, तो रिपब्लिकन पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार से पूछा गया, कि क्या वह वास्तव में चीनी सामानों पर 60 प्रतिशत टैरिफ लगाना चाहते हैं?
तो डोनाल्ड ट्रंप ने जवाब दिया.. "नहीं, मैं कहूंगा कि ये शायद उससे भी ज्यादा हो सकता है।"
डोनाल्ड ट्रंप ने सबसे पहले चीनी सामानों पर भारी टैरिफ लगाने को लेकर 11 फरवरी को बयान दिया था और इसका प्रेशर अभी से चीनी बाजार पर पड़ने लगा है। चीनी स्टॉक मार्केट में भी डर फैलने लगा है

चीनी सामानों पर 60% से ज्यादा टैरिफ लगाने की ट्रम्प की धमकी के कारण चीनी मुद्रा युआन की हेजिंग लागत 2017 के बाद से उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। और चीन के निजी इक्विटी फंड और परिसंपत्ति प्रबंधकों के साथ हाल की बैठकों की एक सीरिज के बाद गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री मैगी वेई कहते हैं, "चीन में, स्थानीय निवेशकों के बीच सबसे ज्यादा बार पूछे जाने वाले प्रश्नों में डोनाल्ड ट्रम्प के अगले अमेरिकी राष्ट्रपति बनने पर चीन पर क्या असर हो सकता है, ये शामिल है।"
डोनाल्ड ट्रंप का बयान चीन के लिए बड़ा झटका है और चीनी निवेशकों में डर का माहौल फैल गया है, क्योंकि अमेरिका से यही संकेत हैं, कि जो बाइडेन, डोनाल्ड ट्रंप के सामने ठहर नहीं पाएंगे। और चीन अभी भी डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दंश को झेल रहा है।
चीन का शेयर बाजार, जिसका पहले से ही पतन हो रहा है और जहां प्रॉपर्टी सेक्टर त्राहिमाम कर रहा है, वो हरगिज नहीं चाहेगा, कि डोनाल्ड ट्रंप फिर से अमेरिका के राष्ट्रपति बने।
अमेरिकी टैरिफ का क्या होगा चीन पर असर?
डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका से चीन को लेकर दो संदेश भेजा है, उसका मतलब साफ है, कि चीनी सामानों की कीमत में अमेरिका में 60 प्रतिशत से ज्यादा हो जाएगी, जिसकी वजह से चीन का घरेलू बाजार, जो पिछले 3 सालों से मुश्किलों में फंसा हुआ है, उसका विश्वास टूट सकता है। वहीं, चीन, जहां बेरोजगारी दर पहले से ही रिकॉर्ड स्तर पर है, वहां बेरोजगारी और भी ज्यादा बढ़ जाएगी, कंपनियों में छंटनी शुरू हो जाएगी और कंपनियों के ऊपर बंद होने का खतरा मंडरा जाएगा।
चीनी सामानों के बिकने की सबसे बड़ी वजह उसकी कीमत का कम होना है और फर्ज कीजिए, अगर चीनी सामान महंगे हो जाएं, तो फिर उनका खरीददार कौन होगा? महंगी कीमत के साथ चीनी सामान, दूसरे देशों की सामानों के साथ कितनी देर टिक पाएंगी?
चीन की अर्थव्यवस्था उपभोक्ता मांग आधारित विकास मॉडल है, यानि उत्पादन ने चीन की अर्थव्यवस्था को तैयार किया है और अगर अमेरिकी टैरिफ देश की अर्थव्यवस्था को फिर से संभालने की शी जिनपिंग की कोशिशों को धाराशाई कर सकता है।
अमेरिकी टैरिफ बढ़ने से चीनी करेंसी के एक्सचेंज रेट में अचानक भारी इजाफा हो जाएगा, जिससे देश के एक्सचेंज मार्केट अस्थिर हो जाएगा और युआन पर खतरनाक असर होगा। और ये वो स्थिति है, जो शी जिनपिंग किसी भी हाल में नहीं चाहेंगे।
अगर चीनी मुद्रा खाई में गिरती है, तो चीनी रिएल एस्टेट मार्केट में हाहाकार मच जाएगा और डेवलपर्स डिफॉल्ट होने की स्थिति में पहुंच जाएंगे। और चीनी फाइनेंशियल सिस्टम खतरे में पड़ सकता है।

अमेरिका पर क्या होगा असर?
अमेरिका में इस साल के अंत में चुनाव होने वाले हैं और रिपब्लिकन पार्टी चीन को लेकर काफी आक्रामक है। राष्ट्रपति बाइडेन, जिन्होंने बार बार चीन के साथ संबंधों को सुधारने की कोशिश की है और जो अभी भी इसी कोशिश में लगे हुए हैं, उनके लिए स्थिति आसान नहीं होने वाली है। लिहाजा, जब 5 नवंबर को अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे, तो उस दिन चीनी करेंसी ऐतिहासिक पतन की तरफ जा सकता है।
लेकिन, ट्रंप अगर ऐसा फैसला करते हैं, तो खामियाजा सिर्फ चीन को ही नहीं उठाना होगा, बल्कि अमेरिका पर भी इसके गंभीर असर होंगे।
अमेरिका और चीन के बीच बड़े व्यापार युद्ध का खतरा, निवेशकों को डरा सकता है, जो वर्तमान में अमेरिकी शेयरों में निवेश कर रहे हैं। यदि ट्रम्प अपने 2017-2021 के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान लगाए गए टैरिफ के अलावा 60% टैरिफ और जोड़ते हैं, तो अमेरिकी उपभोक्ताओं को महंगी वस्तुओं के माध्यम से इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी चीनी सामानों पर टैरिफ बढ़ाया था, लेकिन इससे अमेरिका और चीन के बीच का व्यापार घाटा तो कम नहीं हुआ, लेकिन गुस्साए चीन ने अमेरिका से कृषि सामानों की खरीददारी बंद कर दी, जिसके बाद ट्रंप प्रशासन को करोड़ों डॉलर की संघीय सहायता किसानों को देनी पड़ी थी।
ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के एक विश्लेषण में माना गया है, कि सभी चीनी आयातों पर 60% टैक्स, प्रभावी रूप से 575 अरब डॉलर के महत्वपूर्ण व्यापार संबंध को कम कर देगा।
डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी सामानों पर जो टैरिफ लगाया था, बाइडेन प्रशासन ने अभी भी उसे कम नहीं किया है, लिहाजा चीन और अमेरिका अभी भी व्यापार युद्ध में उलझे हुए हैं। अमेरिका ने चीनी चिप इंडस्ट्री पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे चीन को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। लेकिन, अगर ट्रंप सत्ता में लौटते हैं, और अगर वाकई चीनी सामानों पर 60 प्रतिशत टैरिफ लगाते हैं, तो इससे ना सिर्फ चीन, बल्कि इसका गंभीर असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।












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