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'Donald Trump को नहीं मिलेगा नोबल शांति पुरस्कार', किसने फेरा अरमानों पर पानी और क्या बताई वजह?

'डोनाल्ड ट्रंप को इस बार नोबल प्राइज नहीं मिलेगा।' ये दावा हम नहीं बल्कि कुछ विशेषज्ञ कर रहे हैं। दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का नोबेल शांति पुरस्कार जीतने की कोशिश इस साल फिर से चर्चा का विषय बन गया है। हर साल यह अनुमान लगाया जाता है कि यह प्रतिष्ठित पुरस्कार किसे मिलेगा। लेकिन इस बार मामला इसलिए दिलचस्प बन गया है क्योंकि इसे पाने की तलब पाले हुए अमेरिका राष्ट्रपति ऊट-पटांग दावे कर रहे हैं। उनका नाम भी उस सूची में शामिल है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि उनके जीतने की संभावना बहुत कम है।

किस आधार पर मिलता है नोबेल?

नॉर्वे की नोबेल समिति आमतौर पर शांति की स्थिरता, अंतरराष्ट्रीय भाईचारे और संस्थागत सहयोग पर ध्यान केंद्रित करती है। समिति उन व्यक्तियों या संगठनों को इस पुरस्कार से नवाजा जाता है है, जिन्होंने लंबे समय तक शांति को बढ़ावा देने के लिए ठोस प्रयास किए हों। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का रिकॉर्ड इस दृष्टिकोण से कमजोर है, क्योंकि उन्होंने कई बार बहुपक्षीय संस्थाओं को नज़रअंदाज़ किया और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया।

Donald Trump

ट्रंप की खुद की उम्मीदें

ट्रंप लंबे समय से नोबेल पुरस्कार की चर्चा में बने रहना चाहते हैं। उन्होंने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र में कहा था, "हर कोई कहता है कि मुझे नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए।" हालांकि, नोबेल पुरस्कार के लिए कोई भी व्यक्ति खुद को नामांकित नहीं कर सकता। इसके बावजूद ट्रंप के समर्थक और कुछ अमेरिकी सांसद लगातार उनके नाम की सिफारिश करते रहे हैं। ये बात भी जगजाहिर की ट्रंप दूसरों पर दबाव डालकर या लालच देकर उनको ये सम्मान दिलवाने की वकालत करने के लिए भी कह रहे हैं। उदाहरण के लिए पाकिस्तान।

फिर क्यों हो रही चर्चा?

ट्रंप को 2018 से लेकर अब तक कई बार नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया जा चुका है। अमेरिकी प्रतिनिधि क्लाउडिया टेनी ने दिसंबर में फिर से उनका नाम आगे बढ़ाया था, यह कहते हुए कि ट्रंप ने अब्राहम समझौते के जरिए 2020 में इज़रायल और कई अरब देशों के बीच संबंध सामान्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि नोबेल समिति की बैठक में उनके नाम पर वास्तव में विचार किया गया या नहीं।

क्यों रेस के घोड़े नहीं हैं ट्रंप?

इस साल इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पाकिस्तान सरकार द्वारा किया गया ट्रंप का नामांकन समय सीमा के बाद आया, इसलिए उसे इस साल के लिए नहीं माना गया। ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में "सात युद्ध समाप्त किए" और अब "आठवें युद्ध" यानी इज़रायल-हमास संघर्ष को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर दोनों पक्ष उनकी शांति योजना पर सहमत हो जाते हैं, तो गाज़ा में युद्ध समाप्त हो सकता है।

नारेबाजी से फर्क पड़ता है क्या?

गुरुवार को इज़रायल के तेल अवीव में बंधक परिवारों और उनके समर्थकों ने "ट्रंप को नोबेल पुरस्कार दो" के नारे लगाए। यह समर्थन उनके प्रयासों को लेकर जनता के उत्साह को दर्शाता है। हालांकि, नोबेल समिति आमतौर पर लंबी अवधि के शांति प्रयासों को प्राथमिकता देती है, न कि किसी एक त्वरित समझौते को।

विशेषज्ञों ने उतारा नोबेल का भूत

हेनरी जैक्सन सोसाइटी के इतिहासकार थियो ज़ेनौ का कहना है कि ट्रंप के प्रयास अभी तक दीर्घकालिक शांति के रूप में स्थापित नहीं हुए हैं। उन्होंने कहा, "अल्पावधि में लड़ाई रोकने और संघर्ष की जड़ें खत्म करने में बड़ा अंतर होता है।" ज़ेनौ ने यह भी कहा कि ट्रंप का जलवायु परिवर्तन पर नकारात्मक रुख उन्हें समिति की नजर में कमजोर बनाता है, क्योंकि जलवायु परिवर्तन अब दुनिया की सबसे बड़ी शांति चुनौतियों में से एक है।

ओबामा की कोशिशें और ट्रंप की हवा-बाजी

नोबेल समिति को 2009 में भी आलोचना झेलनी पड़ी थी जब उसने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को उनके पहले कार्यकाल के केवल नौ महीने बाद यह पुरस्कार दे दिया था। उस समय कई लोगों ने कहा था कि ओबामा को पुरस्कार के योग्य काम करने का पर्याप्त समय नहीं मिला था। इसी कारण अब समिति किसी भी राजनीतिक दबाव में आने से बचना चाहती है।

राजनीतिक दबाव का कितना असर?

नीना ग्रेगर, जो ओस्लो शांति अनुसंधान संस्थान की निदेशक हैं, का कहना है कि ट्रंप का लगातार नोबेल की चर्चा में रहना उनके खिलाफ जा सकता है। उन्होंने कहा कि समिति ऐसे व्यक्ति को पुरस्कृत नहीं करना चाहेगी, जो खुद पर राजनीतिक दबाव बनाकर पुरस्कार पाने की कोशिश कर रहा हो। उनके अनुसार, ट्रंप के शांति पुरस्कार जीतने की संभावना "बहुत कम" है, क्योंकि उनकी बयानबाजी और नीतियां किसी शांतिपूर्ण दृष्टिकोण की झलक नहीं देतीं।

नोबेल की घोषणा और ट्रंप ने टपकाई लार!

इस हफ्ते नोबेल पुरस्कारों की घोषणा शुरू हो चुकी है। सोमवार को चिकित्सा पुरस्कार, मंगलवार को भौतिकी, बुधवार को रसायन विज्ञान, और गुरुवार को साहित्य पुरस्कार घोषित किए गए। अब सोमवार को अर्थशास्त्र पुरस्कार का ऐलान होगा। इसी क्रम में यह देखा जाएगा कि इस बार का नोबेल शांति पुरस्कार किसे मिलता है - क्या वाकई ट्रंप का नाम इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल होता है या नहीं।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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