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डोनाल्ड ट्रंप फिर लड़ेंगे 2024 अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव, जानिए कितनी बड़ी होगी चुनौती, क्या जीत पाएंगे?

पिछली बार चुनाव हारने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप लगातार चुनाव में फर्जीवाड़े का आरोप लगा रहे हैं और मध्यावधि चुनाव में मिली हार को भी उन्होंने धांधली ही करार दिया है।

Donald Trump News: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लगातार तीसरी बार राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है और अब डोनाल्ड ट्रंप 2024 में अमेरिका में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में उतरने के लिए अपनी रिपब्लिकन पार्टी के अंदर नामिनेशन की तलाश करेंगे। अपनी दावेदारी का ऐलान करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज में ही भाषण दिए और कहा, "अमेरिका को फिर से महान और गौरवशाली बनाने के लिए, मैं आज रात संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति पद के लिए अपनी उम्मीदवारी की घोषणा कर रहा हूं।" डोनाल्ड ट्रम्प ने ये घोषणा फ्लोरिडा स्थिति अपने घर मार-ए-लागो में एकत्रित हुई भीड़ के सामने ये घोषणा की, जो उनके चुनावी कैम्पेन का मुख्यालय होने वाला है। लेकिन, सवाल ये है, कि दोबारा राष्ट्रपति बनने के लिए डोनाल्ड ट्रंप अपनी ही पार्टी के अंदर समर्थन हासिल कर पाएंगे और अगर उन्हें समर्थन मिल भी जाता है, तो क्या चुनाव में वो जीत हासिल कर पाएंगे?

ट्रंप को लेकर पार्टी में कैसी राय?

ट्रंप को लेकर पार्टी में कैसी राय?

डोनाल्ड ट्रंप के बर्ताव से उनकी रिपब्लिकन पार्टी के अंदर ही कई दिग्गज नेता नाराज रहे हैं, खासकर पिछसे साल 6 जनवरी को अमेरिकी संसद पर ट्रंप समर्थकों के हमले के बाद डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के समर्थन में अपनी ही पार्टी के कई नेताओं ने वोट डाला था, जिनसे ट्रंप ने बैर पाल रखी है। वहीं, मध्यावधि चुनाव में बाइडेन के खिलाफ भारी नाराजगी होने के बाद भी डोनाल्ट ट्रंप वोटर्स को अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के पक्ष में नहीं कर सके, जबकि उन्होंने काफी आक्रामक चुनावी अभियान चलाया था। सीनेट में डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी बहुमत हासिल करने में नाकाम हो गई और हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में अभी तक बहुमत की सीमा रेखा को छू नहीं पाई है। वहीं, ट्रंप के करीबी नेताओं का कहना है, कि पूर्व राष्ट्रपति ने रिपब्लिकन पार्टी के अंदर नेताओं से एक बंद कमरे में बात की है और उन्हें उम्मीद है, कि आने वाले महीनों में उन्हें प्राथमिक चुनौती का सामना करना पड़ेगा। हालांकि, ट्रंप ने पार्टी को चेतावनी देते हुए कहा है, कि अगर रिपब्लिकन पार्टी व्हाइट हाउस को वापस जीतना चाहती है, तो पार्टी "राजनेता या पारंपरिक उम्मीदवार" को नामांकित नहीं कर सकती है। ट्रंप ने कहा, "यह मेरा अभियान नहीं होगा, यह हमारा अभियान होगा।"

अभी भी झूठ के सहारे ट्रंप

अभी भी झूठ के सहारे ट्रंप

पिछली बार चुनाव हारने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप लगातार चुनाव में फर्जीवाड़े का आरोप लगा रहे हैं और मध्यावधि चुनाव में मिली हार को भी उन्होंने धांधली ही करार दिया है। इसके साथ ही डोनाल्ड ट्रंप ने आगामी चुनाव में बैलेट पेपर से मतदान करवाने की मांग की है और अमेरिका की चुनाव प्रणाली की तुलना "तीसरी दुनिया के देशों" से कर दी। लेकिन, ट्रम्प के कई शीर्ष सलाहकारों ने चिंता व्यक्त की है, कि पिछले राष्ट्रपति चुनाव के बारे में साजिशों को बढ़ावा देने की उनकी नियत, उनके लिए 2024 में राष्ट्रीय चुनाव जीतना और कठिन बना देगी। डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा है कि, "नेवादा और एरिजोना में डेमोक्रेट्स को हर तरह के वोट मिल रहे हैं। यह कितना शर्मनाक है कि ऐसा होने दिया जा सकता है!" डोनाल्ड ट्रंप ने अपने एक और पोस्ट में लिखा है कि,"तो मैरिकोपा काउंटी में भी उन्हें वोट मिल रहा है।" डोनाल्ड ट्रंप ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए लिखा कि, "बड़ी संख्या में वोटिंग मशीनों ने काम नहीं किया, लेकिन सिर्फ उन जगहों पर जो रिपब्लिकन जिले हैं"। लिहाजा, ट्रंप के झूठ को पार्टी का भी साथ नहीं मिल रहा है, लेकिन उनके समर्थक जरूर उनकी बातों पर झूमते हैं।

पार्टी के अंदर से चुनौती

पार्टी के अंदर से चुनौती

डोनाल्ड ट्रंप फिर से चुनाव लड़ने की घोषणा जरूर कर चुके हैं, लेकिन उन्हें अपनी ही पार्टी के अंदर से गंभीर चुनौती मिलने का अनुमान है। रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार दूसरी बार फ्लोरिडा के गवर्नर बने रॉन डेसेंटिस, जिन्हें ट्रंप 2.0 कहा जाता है, वो भी राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपनी दावेदारी का ऐलान कर सकते हैं। हालांकि, रॉन डेसेंटिस भले ही खुद को राष्ट्रपति पद का दावेदार ना मान रहे हों, लेकिन उनकी बढ़ती लोकप्रियता ने डोनाल्ड ट्रंप को परेशान कर रखा है। दोनों नेता कई महीनों से आमने-सामने हैं और कई मौकों पर एक-दूसरे पर सार्वजनिक चुटकियां ले चुके हैं। फ्लोरिडा में रॉन डेसेंटिस की बड़ी जीत के बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है, कि अगर रॉन डेसेंटिस उन्हें रिपब्लिकन पार्टी के अंदर राष्ट्रपति पद के नामांकन के लिए चुनौती देते हैं, तो फिर रॉन डेसेंटिस के बारे में हानिकारक खुलासे किए जाएंगे।

रॉन डेसेंटिस कौन हैं?

रॉन डेसेंटिस कौन हैं?

44 साल के रॉन डेसेंटिस साल 2012 में पहली बार हॉउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के लिए चुने गये थे और उसके 6 सालों के बाद साल 2018 में वो पहली बार गवर्नर बने। रॉन डेसेंटिस खुद को 'ब्लू कॉलर जड़ वाला मूल फ्लोरिडियन' के तौर पर वर्णित करते हैं। उन्होंने येल यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है, जहां वे विश्वविद्यालय बेसबॉल टीम के कप्तान थे। इसके बाद वे हार्वर्ड लॉ स्कूल गए। हार्वर्ड में पढ़ाई के दौरान ही वो JAG ऑफिसर के तौर पर अमेरिकी नौसेना की लॉ विंग में शामिल हुए और 2010 में उन्होंने रिटायर्टमेंट ले ली और फिर वो राजनीति में प्रवेश कर गये। साल 2012 में पहली बार वो फ्लोरिडा से हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के सदस्य बने और उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन के शुरूआती दिनों में उनका अभियान मुख्य तौर पर टैक्स कम करने तक सीमित रखा और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की उन्होंने खुलकर आलोचना की।

ट्रंप के खिलाफ चल रहा है मुकदमा

ट्रंप के खिलाफ चल रहा है मुकदमा

अगर डोनाल्ड ट्रंप पार्टी के अंदर से आने वाली इन चुनौतियों को अपने रास्ते से हटा भी लेते हैं, फिर भी उनकी समस्याएं कम नहीं होंगी। 6 जनवरी 2021 को अमेरिकी संसद कैपिटल हिल पर ट्रंप समर्थकों के हमले को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ केस भी चल रहा है। इस केस के तहत सीधे तौर पर आरोपी ट्रंप हैं, जिसके लिए उनसे एक बार पूछताछ भी हो चुकी है। वहीं, डोनाल्ड ट्रंप की बेटी और उनके दर्जनों करीबियों से भी पूछताछ की गई है और ऐसी संभावना है, कि जिस वक्त अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के आयोजन किए जाएंगे, उसी के आपसास इस केस का भी फैसला आएगा और अगर फैसला ट्रंप के खिलाफ आता है, तो फिर डोनाल्ड ट्रंप की उम्मीदवारी अपने आप ही खारिज हो जाएगी। हां, एक संभावना ये भी है, कि अगर फैसला उनके पक्ष में आता है, तो वो इसका फायदा भी उठा सकते हैं।

बेहद लोकप्रिय भी हैं डोनाल्ड ट्रंप

बेहद लोकप्रिय भी हैं डोनाल्ड ट्रंप

हालांकि, इसके बावजूद कि अमेरिकी इतिहास में डोनाल्ड ट्रंप एक मात्र ऐसे राष्ट्रपति रहे हैं, जिनपर दो बार महाभियोग का मुकदमा चल चुका है, जिनके ऊपर राष्ट्रपति पद पर रहते हुए अपने ही देश की संसद पर कब्जा करने की कोशिश का मुकदमा चल रहा हो, लेकिन इन सबके बाद भी डोनाल्ड ट्रंप रिपब्लिकन पार्टी के आम कार्यकर्ताओं के बीच बाकी नेताओं के मुकाबले काफी ज्यादा लोकप्रिय हैं और यही वजह है, कि पार्टी उन्हें रोकने में नाकाम हो जाती है और ट्रंप के पक्ष में ये सबसे बड़ी बात है। ट्रंप की उग्र राजनीतिक भाषोँ पर अमेरिका में तालियां बजती हैं, भले ही वो झूठ ही क्यों न हों, लेकिन ट्रंप अपने विरोधियों पर इसी वजह से भारी भी पड़ते हैं।

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