Trump का 'उड़ता हुआ किला' क्यों लौटा वापस? उड़ान भरते ही 'एयर फोर्स वन' में आई तकनीकी दिक्कत
Donald Trump Air Force Emergency Return: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के स्विट्जरलैंड दौरे के दौरान एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राष्ट्रपति को ले जा रहे दुनिया के सबसे सुरक्षित विमान 'एयर फोर्स वन' (Air Force One) में तकनीकी खराबी आने के कारण उसे बीच रास्ते से वापस लौटना पड़ा।
राष्ट्रपति और उनके प्रतिनिधिमंडल को ले जा रहे इस विमान को एहतियात के तौर पर बीच रास्ते से वापस वाशिंगटन के पास स्थित जॉइंट बेस एंड्रयूज (Joint Base Andrews) पर उतारना पड़ा।

क्या थी तकनीकी खराबी?
व्हाइट हाउस रैपिड रिस्पांस (White House Rapid Response) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, विमान के चालक दल (AF1 Crew) ने उड़ान के दौरान विमान में एक मामूली टेक्निकल समस्या की पहचान की थी। सुरक्षा प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए, रिस्क न लेते हुए चालक दल ने विमान को वापस बेस पर ले जाने का निर्णय लिया।
सुरक्षित उतरे राष्ट्रपति ट्रंप
विमान की जॉइंट बेस एंड्रयूज पर सुरक्षित लैंडिंग हुई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति और उनके साथ मौजूद टीम पूरी तरह सुरक्षित है। लैंडिंग के तुरंत बाद तकनीकी टीम ने विमान की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, समस्या को मामूली बताया गया है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा के कड़े नियमों के तहत विमान को पूरी तरह फिट पाए जाने तक उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
लगभग एक घंटे बाद विमान के चालक दल ने तकनीकी समस्या का पता लगाया और एहतियात के तौर पर विमान को वापस बेस पर उतारने का निर्णय लिया। इसके बाद ट्रंप दूसरे विमान, 'एयरफोर्स C-32' पर सवार होकर अपनी दावोस यात्रा के लिए रवाना हुए।
यात्रा पर असर: दूसरे विमान से भरेंगे उड़ान
व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति ट्रंप का स्विट्जरलैंड दौरा रद्द नहीं किया गया है। राष्ट्रपति और उनकी टीम अब एक दूसरे विमान (Standby Aircraft) पर सवार होंगे। इस बदलाव के बाद वे अपनी निर्धारित स्विट्जरलैंड यात्रा को जारी रखेंगे। इस देरी के कारण राष्ट्रपति के कुछ शुरुआती कार्यक्रमों के समय में थोड़ा बदलाव होने की संभावना है।
एयर फोर्स वन: दुनिया का उड़ता हुआ किला
बता दें कि एयर फोर्स वन केवल एक विमान नहीं है, बल्कि इसे 'उड़ता हुआ पेंटागन' कहा जाता है। यह परमाणु हमले को झेलने में सक्षम है और इसमें अत्याधुनिक संचार व सुरक्षा प्रणालियाँ लगी होती हैं। ऐसी उन्नत तकनीक वाले विमान में 'इलेक्ट्रिकल फॉल्ट' आना दुर्लभ माना जाता है, यही कारण है कि इस घटना ने सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।












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