डोमिनिका ने अवैध एंट्री मामले में मेहुल चोकसी के खिलाफ बंद किया केस
नई दिल्ली, 20 मई। डोमिनिका ने मेहुल चोकसी के अवैध एंट्री केस को बंद कर दिया है। भगोड़े हीरा व्यापारी ने जोरदार तरीके से दावा किया था कि उसे एंटीगुआ और बारबुडा से अपहरण कर लिया गया था। उसे उसकी इच्छा के विरुद्ध डोमिनिका ले जाया गया था। वहीं अब डोनमिका के अधिकारियों ने द्वीप राष्ट्र में उसके अवैध प्रवेश के मामले को बंद कर दिया है।

30 जून 2018 को ऋण रकम को एनपीए घोषित कर दिया गया और इससे आईएफसीआई को 22 करोड़ का नुकसान हुआ। आईएफसीआई का आरोप है कि मेहुल चोकसी ने मूल्य निर्धारकों के साथ मिलकर धोखाधड़ी की। अपनी जूलरी का आकलन बढ़ा चढ़ाकर दिखाया। आईएफसीआई का आरोप है कि मेहुल चोकसी ने वर्ष 2016 में 25 करोड़ का ऋण मांगा था।
मेहुल चोकसी एंटीगुआ से लापता हो गया था। 2018 में वह अपने भतीजे नीरव मोदी के साथ मिलकर पंजाब नेशनल बैंक को हजारों करोड़ रुपये का घोटाला करने के बाद भारत से भाग गया। अधिकारियों ने 900 किमी से अधिक दूर डोमिनिकन द्वीप समूह में उसका पता लिया था। उसे 26 मई को एंटीगुआ और बारबुडा से अवैध रूप से देश में प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया।
मामले में एंटीगुआ पुलिस कि शिकायत पर सफाई देते हुए मेहुल चोकसी ने दावा किया कि वह एक एंटीगुआ का नागरिक था। वह डेनिमिका अपने मन से नहीं आया उसे जबरन वहां लाया गया था। मामले की चांज में रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के एजेंट भी शामिल थे। लेकिन भारतीय अधिकारियों ने मेहुल के दावों को सही नहीं माना और डोमिनिका से उसे भारत को सौंपने की मांग की। वहीं अब मेहुल को डोमिनिका अवैध एंट्री मामला बंद होने के बाद राहत मिल गई है।












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