Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

PM मोदी को हराने के लिए फ्रांस ने रची थी साजिश? भारत के सबसे भरोसेमंद पार्टनर पर सनसनीखेज आरोप

France Accused Of Interfering In 2024 Lok Sabha Elections: क्या भारत के 2024 के लोकसभा चुनाव को लक्ष्य बनाकर अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने सुनियोजित तरीके से प्रोपेगेंडा फैलाया, और क्या एक खास राजनीतिक पार्टी को लाखों डॉलर दिए, ताकि नरेन्द्र मोदी को फिर से सरकार बनाने से रोका जा सके?

ये सनसनीखेज खुलासा किया गया है, जिसमें कहा गया है, कि साजिश का लक्ष्य भारतीय जनता पार्टी (BJP) को हराना और अपने वफादार लोगों को सत्ता में बिठाकर अपना वर्चस्व स्थापित करना था।

France Accused Of Interfering In 2024 Lok Sabha Elections

खुलासा किया गया है, कि चुनाव तय होने से करीब पांच साल पहले ही ऐसी गतिविधियां शुरू हो गई थीं, जबकि बड़ी संख्या में बीजेपी विरोधी मीडिया आउटलेट्स ने भारी मात्रा में नकदी के बदले इस साजिश में हाथ मिलाया था।

खुलासा किया गया है, कि फ्रांसीसी मीडिया ने मोदी सरकार को निशाना बनाकर दर्जनों लेख प्रकाशित किए, ताकि उस प्रोपेगेंडा को आधार बनाकर मोदी सरकार 3.0 को रोका जा सके।

फ्रांसीसी मीडिया में, भारतीय चुनावों को निशाने पर रखकर एजेंडा-आधारित लेख, रिपोर्ट और विश्लेषण प्रकाशित किए गये। ले मोंडे, ले सोइर, ला क्रॉइक्स (इंटरनेशनल), ले टेम्प्स, रिपोर्टर और रेडियो फ्रांस इंटरनेशनेल (आरएफआई) सहित दर्जनों समाचार पत्रों और मीडिया आउटलेट्स में प्रोपेगेंडा रिपोर्ट्स प्रकाशित किए गये, जिसका मकसद भारतीय चुनाव को लेकर मोदी के खिलाफ एक राय को मजबूत करना था और इसके लिए बड़ी सावधानी से तथ्यों से छेड़छाड़ किए गये।

खुलासा किया गया है, कि फ्रांसीसी मीडिया में छपे ज्यादातर लेख और विश्लेषण, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बदनाम करने, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को बदनाम करने और एक खास राजनीतिक पार्टी को भारत के लोकतंत्र के रक्षक के रूप में पेश करने के मकसद के साथ लिखा गया।

सबसे ज्यादा परेशान करने वाला तथ्य यह है, कि सभी मीडिया आउटलेट्स ने नरेन्द्र मोदी को "तानाशाह" करार देने की रेस लगाई गई और दावा किया गया, कि भारत पर एक "सत्तावादी शासन" का शासन है।

फ्रांसीसी मीडिया पर ये खुलासा किसने किया?

डिसइन्फॉर्मेशन लैब नाम के एक रिसर्च ग्रुप ने कुछ प्रमुख फ्रांसीसी समाचार पत्रों और मीडिया आउटलेट्स का दस्तावेजीकरण किया है, जो अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ-साथ भारत में मतदाताओं को गुमराह करने के मकसद से अपने नैरेटिव और एजेंडों को आगे बढ़ा रहे थे। खुलासा किया गया है, कि इस बार, आश्चर्यजनक रूप से, फ्रांस के सबसे पुराने और प्रभावशाली माने जाने वाले समाचार पत्र, ले मोंडे सहित फ्रांसीसी मीडिया आउटलेट भी इस बीजेपी-विरोधी और मोदी-विरोधी प्रचार अभियान में शामिल हो गए हैं।

डिसइन्फॉर्मेशन लैब के मुताबिक, अकेले फ्रांसीसी अखबार ले मोंडे ने बड़ी संख्या में लेख प्रकाशित किए, जिनमें तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा गया था और उस आधार पर मोदी को 'तानाशाह' करार दिया गया था। जो भारत में बढ़ते इस्लामोफोबिया से लेकर भारत की 'अलोकतांत्रिक प्रकृति', 'मुसलमानों को कलंकित करने' से लेकर 'बढ़ती तानाशाही' तक के मनगढ़ंत विषयों पर आधारित थे।

इस तरह के सभी एजेंडा-आधारित प्रचार कथित तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका की खुफिया एजेंसियों के इशारे पर पब्लिश किए गये। ये वो अमेरिका है, जो खुद को लोकतंत्र का स्वर्ग बताता है, मगर इसी अमेरिका में गलत ट्रायल चलाकर डोनाल्ड ट्रंप को हश मनी केस में दोषी साबित किया गया है और अब उन्हें सजा सुनाने की तैयार की जा रही है।

इसी तरह, यूनाइटेड किंगडम की जासूसी एजेंसियों ने भी भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को निशाना बनाने वाली सामग्रियों को प्रकाशित करवाया और उनका प्रचार-प्रसार करवाया।

फ्रांस में कैसे आगे बढ़ाया गया मोदी विरोधी एजेंडे?

फ्रांस में मोदी-विरोधी और बीजेपी-विरोधी प्रचार और यहां तक ​​कि इंटरव्यू भी प्रकाशित किए गए, जिससे भारतीय लोकसभा चुनावों पर असर डाला जा सके। इनका नेतृत्व क्रिस्टोफ जैफरलॉट नामक एक फ्रांसीसी राजनीतिक वैज्ञानिक ने किया, जिन्हें 'सीजे' के नाम से भी जाना जाता है।

क्रिस्टोफ जैफरलॉट के लेख को संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के देशों से भारी मात्रा में समर्थन दिया गया। यह भी अफवाह है, कि सीजे को चीन से संरक्षण प्राप्त है।

सीजे की हर सामग्री को फ्रांसीसी मीडिया ने उत्साहपूर्वक प्रकाशित किया। चूंकि, फ्रांस में इस प्रोपेगेंडा में सीजे ने अग्रणी भूमिका निभाई थी, इसलिए उन्हें न सिर्फ फ्रांसीसी मीडिया पोर्टलों ने प्रमुखता से छापा, बल्कि भारतीय मीडिया में भी उनके न्यूज आर्टिकिल को कोट किया गया।

भारतीय मीडिया में द इंडियन एक्सप्रेस, द वायर समेत कई वामपंथी मीडिया ऑउटलेट्स ने सीजे के बयानो को अपने आर्टिकिल में जगह दी। सभी अंतरराष्ट्रीय और भारतीय मीडिया आउटलेट्स ने क्रिस्टोफ जैफरलॉट को एक राजनीतिक टिप्पणीकार और भारतीय चुनावों के विशेषज्ञ के रूप में चित्रित किया।

आपको बता दें, कि सरकार से सरकार के स्तर पर बात करें, तो भारत और फ्रांस के बीच काफी अच्छे संबंध रहे हैं। इस साल गणतंत्र दिवस के मौके पर जब जो बाइडेन ने मेहमान बनने से इनकार कर दिया, तो मोदी सरकार के आमंत्रण को फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने फौरन स्वीकार कर लिया था। और उससे पहले फ्रांस ने भी प्रधानमंत्री मोदी को बतौर राजकीय मेहमान आमंत्रित किया था और पेरिस में पीएम मोदी का भव्य स्वागत किया गया था।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+