अफगानिस्तान: अमरुल्ला सालेह ने लगाए गंभीर आरोप, हर मानवाधिकार को कुचल रहा है तालिबान

नई दिल्ली, सितंबर 03: अपदस्थ अफगान उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने तालिबान पर युद्ध अपराध करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि विद्रोही समूह पंजशीर के सैन्य उम्र के युवाओं को माइन्स पर चलने के लिए "माइन्स क्लियरेंस टूल" के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। अफगान प्रतिरोध बलों के साथ पंजशीर में मौजूद अमरुल्ला सालेह ने दावा किया कि तालिबान ने उत्तरी प्रांत में मानवीय पहुंच को अवरुद्ध कर दिया है और क्षेत्र की फोन लाइनों और बिजली आपूर्ति को भी काट दिया है।

Deposed Afghan vice president Amrullah Saleh has accused the Taliban of committing war crimes

उन्होंने एक ट्वीट में कहा कि, तालिबान ने पंजशीर में दवाओं की सप्लाई पर रोक लगा दी है। साथ ही उसने यहां पर बिजली भी बंद कर दी है। इसके अलावा यात्रियों के प्रति भी गलत बर्ताव किया जा रहा है। लोगों को कुछ ही पैसे लेकर यात्रा करने की इजाजत है। सालेह ने लिखा है कि तालिबान यहां पर युद्ध अपराध को अंजाम दे रहे हैं। वह अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार मूल्यों को जरा सी भी तरजीह नहीं दे रहे हैं। सालेह ने इस मामले में संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक नेताओं से सहयोग की अपील की है।

तालिबान द्वारा कथित रूप से किए गए कई अत्याचारों का खुलासा करते हुए सालेह ने कहा कि कट्टरपंथी विद्रोही समूह के पास अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के लिए "शून्य सम्मान" है, और संयुक्त राष्ट्र से उनके खिलाफ कार्रवाई करने का आह्वान किया। वहीं कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि सालेह भी यहां से भागकर ताजिकिस्तान चले गए हैं। बताया जाता है कि यहां पर युद्ध के हालात ऐसे हैं कि आम लोग यहां से भागने पर मजबूर हैं।

उन्होंने दावा किया कि, पिछले 23 वर्षों में आपातकालीन अस्पताल की शुरुआत के बाद से हमने कभी भी तालिबान की पहुंच को अवरुद्ध नहीं किया। तालिबा युद्ध अपराध कर रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के लिए उनका कोई सम्मान नहीं है। हम संयुक्त राष्ट्र और विश्व के नेताओं से तालिबों (एसआईसी) के इस स्पष्ट आपराधिक और आतंकवादी व्यवहार पर ध्यान देने का आह्वान करते हैं।

15 अगस्त को अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी के देश से भाग जाने के बाद, अमरुल्ला सालेह ने देश के संविधान के अनुसार खुद को अफगानिस्तान का वैध कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित किया था। हालाँकि, सालेह के दावे को अभी तक किसी भी देश या अंतर्राष्ट्रीय निकाय जैसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है। कथित तौर पर सालेह को ट्विटर पर पोस्ट करने से रोकने के लिए पिछले महीने, तालिबान ने पंजशीर घाटी में इंटरनेट बंद कर दिया था।

इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने एक बयान में तालिबान और पंजशीर में "प्रतिरोध मोर्चा" से लड़ाई को रोकने और बातचीत के माध्यम से अपने मुद्दों को हल करने के लिए कहा है। उधर काबुल में एक रैली में महिला अधिकार कार्यकर्ताओं के एक समूह ने तालिबान और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से भविष्य की सरकार में महिलाओं के लिए निर्णय लेने की भूमिका सुनिश्चित करने के लिए कहा है। उन्होंने महिलाओं के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक अधिकारों को मान्यता देने का भी आह्वान किया है।

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