गज़ा सीमा पर फ़लस्तीनियों का प्रदर्शन, एक किसान की मौत
फ़लस्तीनी अधिकारियों का कहना है कि गज़ा पट्टी में प्रदर्शन शुरु होने से पहले इसराइली टैंक से चली गोलियों से एक फ़लस्तीनी किसान की मौत हो गई है.
फ़लस्तीनियों का ये प्रदर्शन दक्षिण गज़ा के ख़ान यूनिस के शहर समेत फ़लस्तीन-इसराइल सीमा से सटे कुल पांच इलाक़ों में आयोजित किया जा रहा है.
इसराइली सेना का कहना है कि सुरक्षा बाड़ के पास संदिग्ध हरकत देखने पर टैंक ने दो लोगों पर गोलियां चलाई थी.
छह सप्ताह तक चलने वाले इन प्रदर्शनों के लिए इसराइल की सीमा के नज़दीक फ़लस्तीनियों ने टेंट लगा दिए हैं. इस विरोध प्रदर्शन को 'ग्रेट मार्च ऑफ़ रिटर्न' कहा जा रहा है.
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फ़लस्तीन का कहना है कि उत्तरी गज़ा में जबालिया के नज़दीक और दक्षिण में रफ़ाह के नज़दीक इसराइली सेना के हमले में कई फ़लस्तीनी घायल हुए हैं.
फ़लस्तीनी स्वास्थ्य आधिकारियों ने मृतक की पहचान 27 साल के ओमर समूर के तौर पर की है और एक अन्य व्यक्ति के घायल होने की ख़बर दी है.
बीबीसी गज़ा संवाददाता रुश्दी अबालूफ़ ने ख़बर दी है कि टैंक से चलाई गई गोलियां जिन दो लोगों को लगी हैं वो खेत में धनिया तोड़ रहे थे.
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'ग्रेट मार्च ऑफ़ रिटर्न' शुक्रवार 30 मार्च से शुरू हो रहा है. फ़लस्तीनी इस दिन को 'लैंड डे' के तौर पर मनाते हैं. साल 1976 में इसी दिन ज़मीन पर कब्ज़े को ले कर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान इसराइली सुरक्षाबलों में छह फ़लस्तीनियों को मार दिया था.
गज़ा सीमा के साथ-साथ नो-गो ज़ोन बनाया गया है. सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इसराइली सेना लगातार इसकी निगरानी करती है. इसराइल में चेतावनी दी है कि कोई भी इस ज़ोन में क़दम ना रखे.
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गज़ा पट्टी पर काम करने वाली फ़लस्तीनी चरमपंथी समूह हमास ने आरोप लगाया है कि इसराइल एक फ़लस्तीनी किसान को मार कर फ़लस्तीनियों को डराना चाहता है और कहना चाहता है कि वो इन प्रदर्शनों में हिस्सा ना लें.
इसराइली विदेश मंत्रालय ने कहा है, "इस विरोध प्रदर्शन के ज़रिए वो जानबूझ कर इसराइल के साथ झगड़ा बढ़ाना चाहता है" और "अगर किसी तरह की कोई झड़प हुई तो इसले लिए हमास और प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले फ़लस्तीनी संगठन ज़िम्मेदार होंगे."
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प्रदर्शनों के लिए फ़लस्तीनियों ने इसराइली सीमा के नज़दीक पांच मुख्य कैंप लगाए हैं. ये कैंप इसराइली सीमा के नज़दीक मौजूद बेट हनून से ले कर मिस्र की सीमा के नज़दीक रफ़ाह तक फैले हैं.
ये प्रदर्शन 15 मई को ख़त्म होंगे. इस दिन को फ़लस्तीनी नकबा यानी कयामत का दिन कहते हैं. साल 1948 में इसी दिन विवादित क्षेत्र इसराइल का गठन हुआ था और हज़ारों की संख्या में फ़लस्तीनियों को अपने घर से बेघर होना पड़ा था.












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