भारत को नहीं भाया ब्रिटिश संसद में कश्मीर मुद्दे पर चर्चा
लंदन। ब्रिटेन की संसद के एक कमेटी रूम में कश्मीर के राजनीतिक हालात और मानवाधिकारों की स्थिति पर गुरुवार को चर्चा होगी। ब्रिटेन में भारत के उच्चायोग ने इस बात पर नाराजगी जतायी है। ब्रिटेन में भारत के उप उच्चयुक्त डॉ वीरेन्द्र पाल ने इस पर गहरी आपत्ति जताते हुए कहा कि समाज के कुछ तबके दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्ते के पक्ष में नहीं हैं।

डॉ वीरेन्द्र पाल ने कहा कि यह भारत और ब्रिटेन के मजबूत संबंधों की सेहत के लिए ठीक नहीं है। दरअसल, वार्ड हाउस ऑफ कामंस में ब्रैडफोर्ड ईस्ट का प्रतिनिधित्व करते हैं। ब्रैडफोर्ड सिटी वही इलाका है, जहां ब्रिटेन में पाकिस्तानी मूल के सबसे ज्यादा लोग रहते हैं। इससे पहले भी उस इलाके से जुड़े कुछ सांसद कश्मीर को लेकर दबाव बना चुके हैं।
ब्रिटेन के इस फैसले पर भारत और दक्षिण एशिया के भारत के मित्र देशों की नाराजगी के बाद इस बहस का स्थान बदल दिया गया है। कहा गया है कि बहस मुख्य संसद भवन में नहीं, कमेटी के चेंबर में होगी। हालांकि, बहस को आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड किया जायेगा। अब 20 सांसद इस चर्चा में हिस्सा लेंगे।
ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त ने एक बयान में कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान की सेना द्वारा घुसपैठियों को मदद और आतंकवादियों को भारत में प्रवेश कराने के लिए उन्हें कवर फायर देना एक निर्विवाद तथ्य है। आतंकवादी और जिहादी तत्वों को किसी तरह से बढ़ावा देकर भारत को युद्ध के लिए न उकसाया जाये।
गौरतलब है कि, हाल ही में ब्रिटेन के उप प्रधानमंत्री निक क्लेग ने कहा था कि कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाक के बीच ब्रिटेन मध्यस्थता नहीं करना चाहता। उन्होंने कहा, कश्मीर समस्या का हल सिर्फ भारत- पाक ही वार्ता के जरिये कर सकते हैं।












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