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चीन के परमाणु प्लांट से खतरनाक गैस लीक, रेडिएशन के खतरे से पूरी दुनिया में फैली सनसनी

फ्रांसीसी कंपनी ने चीन के नियंत्रण वाले क्षेत्र में दक्षिण-पूर्व एशिया में एक परमाणु संयंत्र से रेडिएशन 'रिसाव' पर खतरे की घंटी बजा दी है।

बीजिंग, जून 15: चीन के एक परमाणु संयंत्र में रेडिएशन लीक होने के डर ने पूरी दुनिया का खौफ में डाल दिया है। पिछले डेढ़ साल से पूरी दुनिया चीनी कोरोना वायरस से परेशान है और अब पता चला है कि पिछले हफ्ते से ही चीन के परमाणु संयंत्र से रेडियोएक्टिव पदार्थ लीक हो रहा है, लेकिन चीन ने इस पूरी दुनिया से छिपाकर रखा था। फ्रांसीसी पावर कंपनी ग्रुप ईडीएफ का भी चीन के इस परमाणु संयंत्र में हिस्सा है और अब इस कंपनी ने खुलासा किया है कि चीन के इस परमाणु संयंत्र से रेडिएशन लीक होने की आशंका है। (सभी तस्वीर- फाइल)

चीन ने दी नई परेशानी

चीन ने दी नई परेशानी

फ्रांसीसी कंपनी ने चीन के नियंत्रण वाले क्षेत्र में दक्षिण-पूर्व एशिया में एक परमाणु संयंत्र से रेडिएशन 'रिसाव' पर खतरे की घंटी बजा दी है। दरअसल, फ्रांस की कंपनी ने पिछले हफ्ते अमेरिकी सरकार के यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी से मदद मांगी थी और फ्रांसीसी कंपनी ने अमेरिका को साफ तौर पर चेतावनी दी थी कि चीन की कंपनी से रेडियोलॉजिकल खतरे की संभावना है। फ्रांस की कंपनी के अनुरोध के बाद अमेरिका की सरकार ने इस लीकेज को लेकर आंकलन करनी शुरू कर दी थी। फ्रांस की कंपनी ने बताया है कि ग्वांगडोंग प्रांत में चीन का परमाणु संयंत्र है, जिसमें उसकी 30 प्रतिशत की हिस्सेदारी है और चीन की इस परमाणु संयंत्र का नाम ताईशान परमाणु ऊर्जा संयंत्र है। फ्रांसीसी कंपनी ने कहा है कि ऊर्जा संयंत्र बाहर विकिरण की सीमा को बढ़ा रहा है और आशंका है कि परमाणु ऊर्जा संयंत्र से रेडिएशन हुआ है। जबकि चीन ने इस मामले पर पूरी तरह चुप्पी बनाए रखी है।

रेडियोएक्टिव विकिरण से सनसनी

रेडियोएक्टिव विकिरण से सनसनी

सीएनन की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के ताईशान न्यूक्लियर प्लांट का डिजाइन फ्रांसीसी कंपनी ईडीएफ ने किया था और इस न्यूक्लियर प्लांट के संचालन के काम में भी चीन इस कंपनी की मदद लेता है। और इस कंपनी ने अमेरिका से कहा है कि प्लांट से रेडियोएक्टिव पदार्थ बाहर लीक हो रहा है, जो काफी ज्यादा खतरनाक है। फ्रांस की कंपनी ईडीएफ के मुताबिक ताईशान न्यूक्लियर प्लांट के रिएक्टर नंबर-1 के प्राथमिक सर्किट से क्रिप्टन और जिनॉन गैस का रिसाव हुआ है। कंपनी के प्रवक्ता के मुताबिक ये गैसे अक्रिय गैसे हैं, जिनमें रेडियोएक्टिव गुण पाए जाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अगर ज्यादा मात्रा में इन गैसों का रिसाव होता है तो दुनिया बहुत बड़ी मुसीबत में आ सकती है।

रिसाव मानने को तैयार नहीं चीन

रिसाव मानने को तैयार नहीं चीन

फ्रांस की कंपनी बार बार रेडियोएक्टिव गैसों के रिसाव की बात कह रही है लेकिन चीन लगातार सभी रिपोर्ट्स को खारिज कर रहा है। चीन की सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में गैर रिसाव की खबरों का खंडन किया है। वहीं, न्यूक्लियर प्लांट के संचालक चाइना जनरल न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन यानि सीजीएन ने अपने बयान में कहा है कि गैस रिसाव से रेडिएशन नहीं हो रहा है। सीजीएन ने बयान में कहा कि कॉमर्शियल ऑपरेशन की वजह से प्लांट की सुरक्षा को लेकर काफी सख्त उपाय किए गये थे। और न्यूक्लियर प्लांट की सुरक्षा और किसी भी संभावित रेडियोएक्टिव रिसाव को लेकर कंपनी की तरफ से बेहद सख्त गाइडलाइंस तैयार किए गये थे। लिहाजा, इस संयंत्र से किसी भी तरह का रेडियेशन नहीं हो रहा है।

लगातार बैठकें कर रहा है अमेरिका

लगातार बैठकें कर रहा है अमेरिका

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन का मानना ​​है कि परमाणु संयंत्र में जो रिसाव हुआ है, उससे चीनी श्रमिकों या चीनी जनता की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं है। लेकिन, फ्रांसीसी कंपनी लगातार अमेरिका से मदद मांग रही है, ऐसे में अमेरिका के विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की लापरवाही कहीं लोगों पर भारी ना पड़ जाए। क्योंकि, कंपनी की तरफ से बार बार अमेरिका से मदद मांगी जा रही है। सीएनएन के अनुसार, अमेरिकी सरकार की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने पिछले सप्ताह स्थिति पर विचार-विमर्श और निगरानी के लिए कई बैठकें की हैं। इसके अलावा, जो बाइडेन प्रशासन ने भी स्थिति को लेकर फ्रांस की सरकार से बात की है। वहीं, सीएनन की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन ने चीन की सरकार से भी इस मामले को लेकर बात की है।

चेर्नोबिल में हो चुका है भयानक हादसा

चेर्नोबिल में हो चुका है भयानक हादसा

आपको बता दें कि यूक्रेन के चेर्नोबिल में 26 अप्रैल 1986 को भयानक परमाणु हादसा हुआ था। चेर्नोबिल न्यूक्लियर प्लांट में एक प्रणाली के परीक्षण के दौरान विनाशकारी धमाका हुआ था। जिसमें सैकड़ों लोग मारे गये थे और हादसे के बाद करीब साढ़े तीन लाख लोगों को विस्थापित होना पड़ा था। हादसे के बाद प्लांट के यूनिट नंबर-4 को कंक्रीट की बड़ी दीवार से बंद कर दिया गया था ताकि रेडियोएक्टिव पदार्थ बाहर ना आए। रिपोर्ट के मुताबित उस हादसे में जानमाल का काफी नुकसान हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र हादसे का सबसे ज्यादा असर बेलारूस पर पड़ा था।

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