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Dalai Lama: दलाई लामा की खोज कैसे की जाती है, जानिए चीन क्यों करना चाहता है बौद्ध धर्मगुरु को कंट्रोल?

दलाई लामा को अपनी जमीन, अपना देश, अपना वतन छोड़े 63 साल गुजर चुके हैं, लेकिन उनकी अहिंसा के विचार से पैदा हुआ चीन के शासकों का डर आज भी खत्म नहीं हो पाया है।

How Dalai Lama Choosen

How Dalai Lama Chosen: अमेरिका की पूर्व स्पीकर नैंसी पेलोसी इस वक्त धर्मशाला में हैं, जहां उन्होंने तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा से मुलाकात की है। इसके साथ ही नैंसी पेलोसी ने चीन पर निशाना भी साधा है।

लेकिन, क्या आप जानते हैं, कि दलाई लामा कैसे चुने जाते हैं। अपनी इस स्टोरी में आज हम समझते हैं, कि दलाई लामा की तलाश कैसे की जाती है।

तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा को चुना नहीं, बल्कि खोजा जाता है और वो बनाए नहीं, बल्कि पाए जाते हैं। उनके पास शरीर को चुनने की शक्ति होती है और माना जाता है, कि दलाई लामा का पुनर्जन्म होता है, जिसका अर्थ ये है, कि वर्तमान दलाई लामा असल में अपने पहले वाले दलाई लामा के ही पुनर्जन्म हैं।

दलाई लामा का उत्तराधिकारी कौन होगा, इसे किसी मतदाना के जरिए या फिर वंश के जरिए नहीं, बल्कि एक परंपरा के जरिए चुना जाता है और ये खोज काफी दिलचस्प होती है। माना जाता है, जब दलाई लामा अपने शरीर को छोड़ते हैं, तो वो कुछ ऐसे संकेत छोड़ जाते हैं, जिसके जरिए नये दलाई लामा को खोजा जाता है। मौजूदा दलाई लामा जब दो साल के थे, उस वक्त उन्हें खोजा गया था और अब वो करीब 90 साल के होने वाले हैं।

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कैसे होती है दलाई लामा की खोज?

पुनर्जन्म लेने वाले दलाई लामा की खोज की जिम्मेदारी गेलगुपा परंपरा के उच्च लामाओं और तिब्बती सरकार की होती है। इस प्रक्रिया में कई साल लग सकते हैं। 14वें (वर्तमान) दलाई लामा, जिनका असली नाम तेनसिन ग्यात्सो है, उन्हें खोजने में चार साल लग गए थे।

खोज आम तौर पर उनकी खोज तिब्बत तक ही सीमित रहती है, लेकिन, वर्तमान दलाई लामा ने कहा है, कि एक संभावना है, कि उनका पुनर्जन्म नहीं होगा और अगर उनका पुनर्जन्म होता है, तो वो चीन में या फिर चीनी शासन के अधीन किसी क्षेत्र में नहीं होगा। दलाई लामा की खोज संकेतों के आधार पर शुरू होती है और माना जाता है, कि उच्च लामाओं को कोई दर्शन मिल सकता है या फिर उन्हें दलाई लामा से संबंधित कोई सपना आ सकता है।

यदि पिछले दलाई लामा का अंतिम संस्कार किया गया होता है, तो वे पुनर्जन्म की दिशा का संकेत देने के लिए धुएं की दिशा की तरफ देखते हैं। दिलचस्प बात ये है, कि दलाई लामा के निधन के बाद ही उनकी खोज शुरू की जाती है और जब तक नये दलाई लामा नहीं मिल जाते हैं, तब तक वो पद खाली रहता है।

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खोज के बाद होता है परीक्षण

दलाई लामा की खोज के लिए लामा मध्य तिब्बत की पवित्र झील ल्हमो ला-त्सो में ध्यान करते हैं, और किस दिशा में खोज करनी है, इसके दर्शन या संकेत की प्रतीक्षा करते हैं। यह एक मान्यता से संबंधित है, कि झील की महिला अभिभावक आत्मा ने पहले दलाई लामा से वादा किया था, कि वह पुनर्जन्म वंश की रक्षा करेगी। जब इन दर्शनों का पालन किया जाता है, और एक लड़का मिल जाता है, तो यह सुनिश्चित करने के लिए, कि वो ही असल में दलाई लामा के पुनर्जन्म हैं, कई परीक्षणों की एक श्रृंखला होती है।

इसके मानदंड का एक गुप्त समूह है, जिसके आधार पर बच्चे का परीक्षण किया जाता है। इसके अलावा, मुख्य परीक्षा में लड़के को कई वस्तुओं के साथ यह देखने के लिए प्रस्तुत करना शामिल है, कि क्या वह पिछले दलाई लामा से संबंधित वस्तुओं का चयन कर सकता है। इस दौरान नये लड़के के पास पूर्व दलाई लामा से संबंधिक गुप्त चीजों को रखा जाता है और लड़के को असली सामान चुनना होता है।

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    यदि केवल एक लड़के की खोज हो पाती है, तो उच्च लामा, तिब्बत सरकार को रिपोर्ट करने से पहले प्रख्यात धार्मिक और धर्मनिरपेक्ष हस्तियों के साथ अपने निष्कर्षों की पुष्टि करते हैं। यदि एक से ज्यादा लड़के मिलते हैं, तो अधिकारियों और भिक्षुओं द्वारा एक सार्वजनिक लॉट निकाला जाता है। लड़के और उसके परिवार को ल्हासा ले जाया जाता है, जहां लड़का आध्यात्मिक नेतृत्व की तैयारी के लिए पिछले जन्मों में संचित ज्ञान को पुनः प्राप्त करने के लिए बौद्ध सूत्र का अध्ययन करता है।

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    चीनी ताकत से होता है मुकाबला

    वर्तमान दलाई लामा, जिनका नाम तेनज़िन ग्यात्सो है, उनकी पहचान उनके पूर्ववर्ती के पुनर्जन्म के रूप में की गई थी, जब वे सिर्फ दो वर्ष के थे। बचपन से ही दलाई लामा का सामना चीनी ताकत से होता रहा है, जिन्होंने न केवल उनके प्रिय तिब्बत पर अधिकार कर लिया, बल्कि उन्हें और कई अन्य तिब्बतियों को भी भारत में निर्वासन के लिए मजबूर कर दिया।

    इसके बाद से दलाई लामा हमेशा चीन के निशाने पर रहे हैं। दलाई लामा के उत्तराधिकारी का चयन करना तिब्बतियों के हाथों में है। लेकिन, एक थिंक टैंक पॉलिसी रिसर्च ग्रुप (POREG) के मुताबिक, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार अगले दलाई लामा के चयन में अंतिम अधिकार के अपने दावों पर कायम है।

    चीन पहले ही, अगला दलाई लामा को कैसे चुना जाएगा, ये तय करने के लिए आदेश पारित कर चुका है। इनमें से 1 सितंबर, 2007 का आदेश (आदेश संख्या 5) है, जो तिब्बती बौद्ध धर्म में जीवित बुद्धों के पुनर्जन्म के प्रबंधन पर उपायों की रूपरेखा तैयार करता है। इस आदेश के मुताबिक, अगले दलाई लामा के लिए पुनर्जन्म के आवेदन को चीन के सभी बौद्ध मंदिरों द्वारा पुनर्जन्म लामाओं को पहचानने की अनुमति देने से पहले भरा जाना चाहिए।

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    चीन ने सारे अधिकार अपने हाथ में लिए

    इस तरह से चीनी राज्य ने खुद को अंतिम मध्यस्थ बना लिया है, कि क्या दलाई लामा का पुनर्जन्म होता है या नहीं? इसकी वजह से ये कहने की जरुरत नहीं है, कि देश और विदेश में तिब्बतियों में घोर निराशा का भाव है। पुनर्जन्म वह विश्वास प्रणाली है, जो तिब्बत में प्रचलित है।

    इसके अनुसार, एक उच्च लामा अपने परिनिर्वाण के बाद मानव रूप में जन्म लेते हैं, जिसका अर्थ है संसार, कर्म और पुनर्जन्म से मुक्ति। चीन ने तिब्बतियों की इस परंपरा और इस विश्वास पर लगातार हमला किया है और चीनी अधिकारी अगले लामा का चयन करने के अपने अधिकार का दावा करने पर डटे हुए हैं। चीन, दलाई लामा की संस्था के महत्व से अवगत है इसलिए उसने बौद्ध निवास के कब्जे के बाद तिब्बत और दलाई लामा को अपने अधीन लाने की कोशिश में कोई कसर नहीं छोड़ा है। इसके लिए चीन ने नई सिर्फ कई चालें चलीं, योजनाएं बनाईं बल्कि इतिहास को भी तोड़-मरोड़ कर पेश किया है।

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    भगवान बुद्ध के माने जाते हैं स्वरूप

    दलाई लामा को भगवान बुद्ध का ही स्वरूप माना जाता है और दलाई लामा ने हमेशा भगवान बुद्ध के बताए मार्ग के रूप में अहिंसा की वकालत की है। जबकि चीन की विस्तारवादी मानसिकता की वजह से लाखों तिब्बती आज भी या तो निर्वासन में जीवन जी रहे हैं या फिर तिब्बत में रहकर कम्युनिस्टों की गुलामी झेलने को मजबूर हैं।

    1989 में उन्हें इसी वजह से शांति के लिए नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। बौद्ध शिक्षा में उनकी दीक्षा का सबसे पसंदीदा और मशहूर विषय कालचक्र तंत्र है, जो बौद्ध धर्म की सबसे जटिल शिक्षा मानी जाती है। तिब्बती आध्यात्मिक गुरु का कहना है, 'दूसरों के जीवन को बदलने का रास्ता प्रेम में है, गुस्से में नहीं।'

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