विदेशी मीडिया के निशाने पर मोदी सरकार, कोरोना संकट पर हो रही है जमकर आलोचना

विदेशी मीडिया में भारत में कोरोना वायरस की स्थिति को लेकर भारत सरकार की जमकर आलोचना की जा रही है।

नई दिल्ली, मई 02: पिछले 24 घंटे में भारत ने कोरोना के नये मामलों को लेकर विश्व रिकॉर्ड कायम किया है। 4 लाख से ज्यादा लोग कोरोना वायरस से नये संक्रमित मिले हैं, जबकि साढ़े 3 हजार से ज्यादा लोग कोरोना वायरस की चपेट में आने से मारे गये हैं। भारत के अस्पताल ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे हैं और सिर्फ अप्रैल महीने में हजारों लोगों की जान सिर्फ ऑक्सीजन नहीं मिलने की वजह से हुई है। चाहे राजधानी दिल्ली हो या फिर उत्तर प्रदेश या पंजाब या बिहार... हर जगह की स्थिति बेहद खराब है। भारत में इस वक्त कोरोना वायरस के 32 लाख से ज्यादा एक्टिव केस हैं। पिछली बार की तुलना में ये वायरस इस बार युवाओं को भी बड़ी संख्या में अपना शिकार बना रहे हैं और सैकड़ों युवा अपनी जान इस जानलेवा वायरस की चपेट में आने से गंवा चुके हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जमकर आलोचना की जा रही है। खासकर विदेशी मीडिया के निशाने पर डायरेक्ट प्रधानमंत्री हैं और विदेश मीडिया इस आपात स्थिति के लिए सीधे भारत सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही है। इंटरनेशनल मीडिया भारत सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

सरकार की आलोचना

इंटरनेशनल मीडिया ने मोदी सरकार की भूमिका पर कई सवाल खड़े किए हैं। अमेरिकन मीडिया हो या फिर ऑस्ट्रेलियन मीडिया या फिर ब्रिटिश मीडिया...जिस देश की मीडिया भी स्वतंत्र है वो सरकार पर सवाल उठाने से नहीं चूक रही है। कई इंटरनेशनल मीडिया ने लिखा है कि भारत की जो मौजूदा स्थिति है, उसके लिए केन्द्र की सरकार और प्रधानमंत्री मोदी जिम्मेदार हैं। इन रिपोर्ट्स में कोरोना संकट के बीच होने वाली चुनावी रैलियों और कुंभ मेलों के आयोजन पर भी सवाल उठाए गये हैं।

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    टाइम मैगजीन की रिपोर्ट

    विश्व विख्यात अमेरिकन मैगजीन टाइम की रिपोर्ट में मोदी सरकार के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए गये हैं। टाइम ने How Modi Failed US नाम से भारत को लेकर रिपोर्ट छापी है, जिसमें भारत सरकार की खूब आलोचना की गई है। हालांकि इस रिपोर्ट को भारतीय पत्रकार राणा अयूब ने लिखा है, जिन्हें वामपंथी पत्रकार माना जाता है और उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एकतरफा आलोचना करने के लिए भी जाना जाता है। राणा अयूब अपने आर्टिकिल्स में हमेशा से नरेन्द्र मोदी की आलोचना करती रही हैं। टाइम मैगजीन के लेख में राणा अयूब ने लिखा है कि 'भारत की मजबूत सरकार ने परिस्थितियों को नजरअंदाज किया है'। टाइम मैगजीन की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कुंभ मेले को 'सांकेतिक तौर' पर मनाने की अपील करने में देर कर दी। टाइम मैगजीन ने ये भी लिखा है कि भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या में इजाफा होता रहा और भारत के नेता लगातार चुनाव प्रचार कर रहे थे।

    अमेरिकन मीडिया की रिपोर्ट

    टाइम मैगजीन के अलावा अमेरिका की कई बड़े अखबारों और टीवी चैनलों ने भारत में कोरोना वायरस के मामलों को प्रमुखता से छापा है। सीएनएन, न्यूयॉर्क टाइम्स, वाशिंगटन पोस्ट ने भी कोरोना संक्रमण को लेकर मोदी सरकार की आलोचना की है। सीएनएन ने एक्सपर्ट्स के हवाले से लिखा है कि भारत में कोरोना संक्रमण के मामलों को लेकर अब भी गलत आंकड़े दिखाए जा रहे हैं। इसके अलावा सीएनएन ने ये भी लिखा है कि भारत के श्मशानों में शवों का अंतिम संस्कार कराने के लिए लोगों को घंटों तक लाइन में लगा रहना पड़ता है। सीएनन ने पिछले महीने भारत को लेकर कई रिपोर्ट्स में कहा था कि भारत में कोरोना वायरस को लेकर सरकारें गंभीर नहीं हैं, जिसका खामियाजा भारत को भुगतना पड़ सकता है। वहीं न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि 'भारत में डॉक्टरों के इंतजार में लोगों की मौत हो रही है। भारत में कोरोना वायरस के दूसरे लहर ने स्थिति को काफी भयानक कर दिया है। भारत में जो आधिकारिक तौर पर मौत के आंकड़े दिखाए जा रहे हैं, वो असलियत से काफी अलग है। मौत के असली आंकड़े काफी ज्यादा हो सकते हैं'।

    'मानवता के खिलाफ गुनाह'

    ब्रिटिश न्यूज पेपर द गार्जियन ने भारत सरकार की जमकर आलोचना की है। गार्जियन अखबार ने लिखा है कि कोरोना वायरस की वजह से भारत की स्थिति बन रही है वो मानवता के खिलाफ एक जुर्म है। गार्जियन अखबार ने लिखा है कि 'हम सब मानवता के खिलाफ जुर्म का गवाह बन रहे हैं, जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके सहयोगी कह रहे हैं कि शिकायत नहीं करें'। गार्जियन की रिपोर्ट में भी चुनावी रैलियों को लेकर भारतीय नेताओं पर निशाना साधा गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत सरकार ने कोरोना के दूसरे लहर को बहुत कम करके आंका है, जिसका नतीजा भारतीय लोगों को जान देकर चुकानी पड़ रही है। गार्जियन अखबार में पीएम मोदी के श्मशान और कब्रिस्तान को लेकर दिए गये बयान को भी छापा गया है।

    ऑस्ट्रेलियन अखबार में आलोचना

    वहीं, ऑस्ट्रेलियाई अखबार ने अपने लेख का हेडलाइन में लिखा है कि 'भारतीय पीएम नरेन्द्र मोदी ने भारत को लॉकडाउन से बाहर निकालकर सर्वनाश की तरफ धकेल दिया है।' इस लेख में ऑस्ट्रेलियन अखबार ने भारतीय प्रधानमंत्री की जमकर आलोचना की है और कहा है कि कोरोना संक्रमण के इस लहर के पीछे चुनावी रैलियां, कुंभ मेला जैसे आयोजन है, जिसपर सख्ती बरतने में सरकार नाकाम रही। ऑस्ट्रेलियन अखबार ने लिखा है कि भारतीय प्रधानमंत्री ने एक्सपर्ट्स की सलाह को नजर अंदाज किया है, जिसकी वजह से भारत की ये दुर्गति हुई है। ऑस्ट्रेलियन अखबार में छपी रिपोर्ट में भारतीय पीएम नरेन्द्र मोदी की सख्त शब्दों में आलोचना की गई है, जिसके बाद ऑस्ट्रेलिया स्थिति भारतीय उच्चायोग ने अखबार की रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। भारतीय उच्चायोग ने द ऑस्ट्रेलियन अखबार के एडिटर इन चीफ क्रिस्टोफर डोरे को चिट्ठी लिखी है और रिपोर्ट को दुर्भवनापूर्ण करार दिया है। भारतीय उच्चायोग ने कोरोना महामारी से लड़ने के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गये कदमों का जिक्र किया है और कहा है कि भारत सरकार ने कैसे पूरी दुनिया को वैक्सीन सप्लाई की है। भारतीय उच्चायोग ने अपनी चिट्ठी में अखबार पर मोदी सरकार के कामकाज को कम करने के आंकने का आरोप लगाया है।

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