अमेरिका में हिरणों में पाई गई कोविड-19 की एंटीबॉडी, वैज्ञानिकों की बढ़ी चिंता
वाशिंगटन, 3 अगस्त। कोरोना वायरस महामारी इंसानों के लिए कहर बनकर आई है। पिछले डेढ़ साल से ज्यादा समय से लोग डर के साये में जी रहे हैं। लेकिन इस संक्रमण से जानवर अछूते हों ऐसा भी नहीं हैं। अमेरिका में जानवरों के ऊपर कोविड-19 को लेकर किए गए अध्ययन में पाया गया है कि संयुक्त राज्य के पूर्वोत्तर हिस्से में सफेद पूंछ वाले एक तिहाई हिरणों में कोविड-19 वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी विकसित हुई है। शरीर में एंटीबॉडी होने का मतलब दर्शाता है कि ये हिरण कोरोना वायरस से संक्रमित हुए थे।

शोधकर्ताओं ने सफेद पूंछ वाले हिरण, ओडोकोइलियस वर्जिनियनस को सीरो-निगरानी के लिए चुना था। इन्हें चुनने के लिए इस सबूत के आधार बनाया गया कि इन हिरणों में कोविड के लिए उच्च आत्मीयता वाले रिसेप्टर्स हैं।
अध्ययन में कहा गया है कि 40 प्रतिशत नमूनों में एंटीबॉडी का पता चला है, जो बताता है कि सफेद पूंछ वाले हिरण कोविड-19 के संपर्क में हैं।
वायरस का भंडार
पिछले प्रयोगशाला प्रयोगों से पता चला था कि हिरण कोविड-19 से संक्रमित हो सकता है और वायरस को अन्य हिरणों तक पहुंचा सकता है। शोध के निष्कर्ष इंसानों में टीकाकरण के बाद भी कोविड-19 वायरस के जानवरों में पहुंचने के चलते चिंता बढ़ाने वाले हैं। शोधकर्ताओं को डर है कि वायरस के ये नए भंडार कोरोना वायरस को अन्य प्रजातियों में जाने और वहां फिर इंसानों में वापस फैलने की वजह बन सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने साल 2021 के जनवरी से मार्च के बीच वन्यजीव निगरानी के जरिए 385 ब्लड सैंपल एकत्र किए जिनमें से 152 सैंपल में एंटीबॉडी पाई गई। ये सैंपल मिशीगन, पेंसिलवेनिया, इलिनॉयस और न्यूयॉर्क के क्षेत्रों से एकत्र किए गए थे।
अमेरिकी कृषि विभाग के प्रवक्ता के हवाले से नेचर मैगजीन को बताया है कि सैंपल में एंटीबॉडी के प्रतिशत को देखते हुए ये संभावना है कि अन्य राज्यों में भी हिरणों में संक्रमण पहुंचा होगा।
पहले भी हुआ है जानवरों में संक्रमण
कोविड-19 का जानवरों में पाए जाने का ये इकलौता मामला नहीं है। इंडोनेशिया की राजधानी के चिड़ियाघर में दो दुर्लभ सुमात्रा बाघ कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद ठीक हो रहे हैं।
भारत में भी हैदराबाद के नेहरू जूलॉजिकल पार्क में 8 एशियाई शेरों में कोरोना वायरस का संक्रमण पाया गया था। भारत में इंसानों से जानवरों में संक्रमण का ये पहला मामला था। शेरों को लगभग दो सप्ताह तक दवा पर रखने के बाद लक्षण कम हो गया था। सैंपल के विश्लेषण से पता चला था कि संक्रमण किसी प्रकार की चिंता का कारण नहीं था।












Click it and Unblock the Notifications