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पाकिस्तान में रिश्तेदारी में शादी करने से फैलतीं जेनेटिक बीमारियां

इस्लामाबाद, 08 फरवरी। पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में रहने वाले 56 साल के गफूर हुसैन शाह एक टीचर हैं और आठ बच्चों के पिता भी. पाकिस्तान के कबाइली रिवाजों की जिक्र करते हुए शाह कहते हैं कि उनसे उम्मीद की जाती है कि वे अपने बच्चों की शादी रिश्तेदारी में ही करेंगें.

लेकिन शाह को रिश्तेदारी के दायरे में की जाने वाली ऐसी शादियों का जोखिम मालूम है. 1987 में शाह की शादी अपनी ममेरी बहन से हुई. इस शादी से हुए तीन बच्चे जीन संबंधी बीमारियों से जूझ रहे हैं. डीडब्ल्यू से बात करते हुए शाह ने कहा कि एक बेटे के मस्तिष्क का सामान्य रूप से विकास नहीं हुआ. एक बेटी को स्पीच डिसऑर्डर है और एक बेटी को सुनने में दिक्कत होती है.

टीचर शाह कहते हैं, "मुझे सबसे ज्यादा अफसोस इस बात का है कि वे पढ़ लिख नहीं सके." पत्नी और अपनी ढलती उम्र का जिक्र करते हुए वह कहते हैं, "मुझे हमेशा उनकी चिंता लगी रहती है....मेरी पत्नी और मेरे जाने के बाद उनकी देखभाल कौन करेगा?"

थैलेसीमिया भी जेनेटिक डिसऑर्डर से होने वाली एक बीमारी है

ऐसी शादियों की वजह से होने वाली जीन संबंधी बीमारियों के बारे में जानते हुए भी शाह खुद को मजबूर महसूस करते हैं. वह कहते हैं कि बच्चों की शादी रिश्तेदारी में कराने को लेकर उन पर समाज का बहुत दबाव है. बड़े पारिवारिक दायरे के भीतर बच्चों की शादी से इनकार करने वाले अकसर बहिष्कृत से कर दिए जाते हैं.

शाह कहते हैं कि एक बेटे और दो बेटियों की शादी उन्हें करीबी रिश्तेदारी में करनी पड़ी. शाह के परिवार की मेडिकल हिस्ट्री में रक्त संबंधी बीमारियां (ब्लड डिसऑर्डर), सीखने की क्षमता संबंधी दोष, अंधापन व बहरेपन के मामले सामने आ चुके हैं. डॉक्टर इसके लिए करीबी दायरे के भीतर प्रजनन को जिम्मेदार ठहराते हैं.

पाकिस्तान में जेनेटिक म्यूटेशन की समस्या

पाकिस्तान में जेनेटिक म्यूटेशन को लेकर 2017 में एक रिपोर्ट आई. इस रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की जनसंख्या की हेट्रोजिनस कंपोजिशन में एक ही विरासत वाली संतानों का स्तर बहुत ऊंचा है. इसी के कारण जीन संबंधी बीमारियां सामने आ रही हैं.

रिपोर्ट, पाकिस्तान का जेनेटिक म्यूटेशन डाटाबेस पेश करती है. इस डाटाबेस की उन म्यूटेशंस को ट्रैक किया जा सकता है जो इस तरह की बीमारियों के लिए जिम्मेदार हैं. डाटाबेस के मुताबिक पाकिस्तान में सामने आने वाली अलग अलग किस्म की जीन संबंधी 130 बीमारियों के मामले में 1,000 से ज्यादा म्यूटेशनों का पता चला है.

गर्भावस्था में ही पता चल सकेगी जेनेटिक गड़बड़ी

हुमा अरशद चीमा एक डॉक्टर हैं. वह पैदाइश से लेकर वयस्क होने तक बच्चों के स्वास्थ्य, व्यवहार और उनकी मनोदशा पर नजर रखती हैं. जीन संबंधी बीमारियों की एक्सपर्ट चीमा ने डीडब्ल्यू से बात करते हुए कहा कि करीबी दायरे में प्रजनन की वजह से पाकिस्तान पर जीन संबंधी बीमारियां बोझ बन गई हैं.

डॉक्टर चीमा के मुताबिक जिन जातियों या कबीलों में परिवार के भीतर शादी आम है, वहां खास डिसऑर्डरों को देखा जा सकता है. पाकिस्तान में फिलहाल विरासती ब्लड डिसऑर्डर थैलेसेमिया सबसे आम है. इस बीमारी में खून की लाल रक्त कणिकाएं ऑक्सीजन को नहीं सोख पाती हैं.

अनुवांशिक बीमारियों का पता लगाने वाली जेनेटिक टेस्टिंग और प्री नैटल स्क्रीनिंग अभी पाकिस्तान में व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है. चीमा के मुताबिक देश के ज्यादा अस्पतालों और क्लीनिकों में जेनेटिक बीमारियों का इलाज करने की क्षमता भी नहीं है.

चेचेरे या ममेरे भाई बहनों से शादी क्यों?

कराची में रहने वाले हेल्थ एक्सपर्ट शिराज उद दौलाह के मुताबिक परिवार के भीतर शादियों का रिश्ता इस्लाम की परंपराओं से जुड़ा है, " मैंने मौलवियों से कहा कि वे जीन संबंधी बीमारियों के बारे में जागरूकता फैलाने में मदद करें, लोगों को समझाएं कि चेचेरे या ममेरे भाई बहन के साथ होने वाली शादियां जेनेटिक बीमारियां को बढ़ाने में भूमिका निभा रही हैं."

शिराज उद दौलाह के मुताबिक मौलवियों ने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया. मौलवियों ने दावा किया कि ऐसी शादियां इस्लाम के शरिया कानून और पैंगबर मोहम्मद की परंपराओं के मुताबिक होती हैं.

अपने परिवार में ऐसी बीमारियों से जूझने वाले टीचर शाह कहते हैं कि ज्यादातर परिवार ऐसी शादियां इसीलिए करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनका धर्म ये कहता है. शाह के मुताबिक अगर सरकार भी ऐसी शादियों को गैरकानूनी घोषित करे, तो उसे भी तीखे विरोध का सामना करना पड़ेगा.

पाकिस्तान के दुर्गम इलाकों में कबाइली और जातीय सिस्टम आज भी बहुत मजबूत है. चीमा के मुताबिक पंजाब में आज भी कास्ट सिस्टम बहुत ताकतवर है. इसके कारण अंतर्जातीय विवाह नहीं होते हैं और जीन संबंधी बीमारियों के लिए मुफीद माहौल बनता है.

पाकिस्तान के पश्चिमी सूबे बलोचिस्तान में कबाइली सिस्टम बहुत मजबूत है. गुलाम हुसैन बलोच, बलोचिस्तान के रहने वाले हैं. हुसैन के मुताबिक अपने कबीले के बाहर शादी करना एक बड़ा सामाजिक गुनाह सा है. सिंध प्रांत में भी कबीले या कास्ट के बाहर शादी करने पर हत्याएं तक हो जाती हैं.

स्वास्थ्य अधिकारी का पक्ष

मार्च 2020 में पंजाब की प्रांतीय सरकार ने जेनेटिक बीमारियों को रोकने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया. अब लाहौर के चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में मुफ्त जेनेटिक स्क्रीनिंग सर्विस शुरू की गई है. जर्मन कंपनी सेंटोजीन डायग्नोस्टिक और कुछ अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की मदद से ऐसी सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं.

चीमा कहती हैं प्री नैटल स्क्रीन के जरिए बच्चे में जीन संबंधी बीमारी का पता लगाया जा सकता है. इससे मां बाप को फैसला करने में मदद मिलेगी. अनुवांशिक बीमारी का जल्द पता चलने पर इलाज में भी मदद मिलेगी.

पंजाब हेल्थ डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने अपना नाम न बताने की शर्त पर डीडब्ल्यू से कहा, "हमने जेनेटिक डिसऑर्डर के शक में पाकिस्तान के 30,000 परिवारों की स्क्रीनिंग की है."

हेल्थ एक्सपर्ट शिराज उद दौलाह के मुताबिक जरूरत लोगों की मानसिकता बदलने की है, "धार्मिक मामलों में लोग आंख बंद करके भरोसा करते हैं और वे कोई भी तर्क सुनना नहीं चाहते हैं." शिराज आगे कहते हैं, "अगर सरकार सारे मौलवियों से कहे कि वे बढ़ती जीन संबंधी बीमारियों के बारे में जागरूकता फैलाएं और उसे कजिन के साथ शादी से जोड़े तो शायद ज्यादा पाकिस्तानी ध्यान देंगे."

रिपोर्ट: एस. खान, इस्लामाबाद

Source: DW

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