अभी दो साल तक लागू रहेगी फिजिकल डिस्टेंसिंग, वर्ना फिर मौत का तांडव करेगा कोरोना !
नई दिल्ली। अगर फिजिकल या सोशल डिस्टेंसिंग के नियम को एकबार में खत्म कर दिया गया तो कोरोना के दोबारा फैलने का खतरा है। अगर इस महामारी का दोबारा आक्रमण हुआ तो मौजूदा वक्त से भी बड़ी तबाही झेलनी होगी। कोरोना को जड़ से मिटाने के लिए अभी किसी न किसी रूप में दो साल तक फिजिकल डिस्टेंडिंग का पालन करना होगा। सोशल डिस्टेंडिंग के कुछ निर्देंशों को दिसम्बर 2022 तक पालन करना होगा तभी कोरोना से मुक्ति मिलेगी। सोशल डिस्टेंडिंग का केवल एक दौर, कोरोना से निबटने के लिए काफी नहीं है। इसे कई रूपों में और कई चरणों में लागू करना होगा। यह नयी जानकारी हार्वर्ड विश्वविद्यालय के एक नये शोध में सामने आयी है। विश्व प्रसिद्ध विज्ञान पत्रिका 'साइंस’ में मंगलवार को इस रिसर्च का प्रकाशन किया गया है। अमेरिका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन से इस निष्कर्ष को प्राप्त किया है। इस शोध के बाद अमेरिका में सवाल पूछा जाने लगा है कि कोरोना से बचाव के लिए लागू बंदिशें कब खत्म की जाएं। कोरोना ने सबसे अधिक अमेरिका में ही मौत का तांडव मचाया है।

फिर प्रस्फूटित हो सकता है कोरोना
शोधकर्ताओं के मुताबिक, आने समय में कोरोना वायरस के उठान को कई कारण प्रभावित करेंगे। इनमें मौसम और रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रमुख कारण होगा। शोधकर्ताओं ने अमेरिकी डाटा के अध्ययन के बाद पाया है कि कोरोना के शांत होने के बाद पैंडेमिक इन्फ्लूएंजा से मिलती जुलती एक मौसमी बीमारी प्रस्फूटित हो सकती है। अध्ययन में पाया गया है कि कोरोना वायरस के फैलाव की जो प्रवृति है उसके मुताबिक बचाव की रणनीति दीर्घकालिक होनी चाहिए। दिसम्बर से फरवरी के महीने को फ्लू सीजन माना जाता है। उस समय अगर सोशल डिस्टेंडिंग का नियम लागू नहीं रहेगा तब कोरोना वायरस की संक्रामकता बढ़ जाने की संभावना है। उस समय मौसमी फ्लू और कोरोना से होने वाली सर्दी खांसी में अंतर करना मुश्किल हो जाएगा और जिससे स्थिति बिगड़ सकती है। उस समय भी अतिरिक्त अस्पतालों की जरूरत होगी।

सोशल डिस्टेंसिंग के लॉन्ग टर्म प्लान की जरूरत
भौतिक और इंसानी जरूरतों के लिए सोशल डिस्टेंडिंग के कठोर नियमों में हल्की छूट दी जा सकती है लेकिन इसको एकाएक हटा लेना गलत होगा। कोरोना से सुरक्षा के लिए यह जरूरी है कि अभी कुछ समय तक शारीरिक दूरी का पालन किया जाए। अगर राजनीतिक या सामाजिक दबाव में शारीरिक दूरी बनाये रखने के नियमों का हटाया गया तो इससे बड़ी तबाही आ सकती है। कोरोना को लेकर विशेषज्ञों और सरकार के बीच तालमेल बहुत जरूरी है। अमेरिका के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इनफेक्शस डिजीजेज के डायरेक्टर एंथॉनी फॉस ने हाल ही में एक बड़ा बयान दिया था। फॉस ने कहा था कि उन्होंने फरवरी में राष्ट्रपति ट्रंप को लॉकडाउन की सलाह दी थी लेकिन तब उनकी बात नहीं मानी गयी थी। अब कोरोना ने अमेरिका को मौत का कुआं बना दिया है। आरोप के मुताबिक, विश्व में सबसे अधिक मौत अमेरिका में इसलिए हुई क्यों कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समय पर सावधानी नहीं बरती। इस महाशक्तिमान देश में कोरोना मृतकों की संख्या 26 हजार के पार पहुंच गयी है जब कि संक्रमितों की तादाद 6 लाख से अधिक हो गयी है।

30 अप्रैल तक है सोशल डिस्टेंडिंग
अभी अमेरिका में सोशल डिस्टेंसिंग का नियम 30 अप्रैल तक लागू है। लेकिन जिस गति से यहां मौत की संख्या बढ़ रही है उसको देख कर यही लगता है कि अब यह प्रवाधान न केवल आगे बढ़ेगा बल्कि पहले से कठोर भी होगा। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इनफेक्शस डिजीजेज के डायरेक्टर एंथॉनी फॉस ने कहा है कि कोरोना से बचाव के लिए टीका तैयार किया जा रहा है। ये टीका तीन चरणों में तैयार होता है जिसका एक चरण पूरा हो चुका है। इसके तैयार होने में अभी समय लगेगा। इसलिए सबसे जरूरी यही है कि सोशल डिस्टेंसिंग का ईमानदारी पूर्वक पालन किया जाए।












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