ईदः भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश में कोरोना से फ़ीका पड़ा त्योहार

दक्षिण एशियाई देशों में ईद पर कोरोना संक्रमण का असर दिखाई दे रहा है. ईद उल फित्र और बकरीद दुनिया भर में मुस्लिम आबादी के लिए दो सबसे बड़े त्योहार हैं. ये लगातार दूसरा साल है जब ईद उल फित्र पर कोविड-19 संक्रमण और पाबंदी का असर देखने को मिल रहा है.

भारत में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के कारण देश के अधिकांश हिस्सों में लॉकडाउन लागू है. बाज़ार वीरान पड़े हैं और आम लोगों के आने जाने पर पाबंदी लगी हुई है, इसके चलते दुकानदारों की आजीविका पर बुरा असर हो रहा है.

coronavirus impact low key celebration of Eid festivals in India, Pakistan, Bangladesh

हिंदी समाचार वेबसाइट अमर उजाला के मुताबिक इस बार दुकानदारों को अच्छे क़ारोबार की उम्मीद थी लेकिन कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने सबको सदमे में डाल दिया है.

कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले को देखकर लोगों से घरों पर ही ईद की नमाज अदा करने की अपील की गई है. नई दिल्ली के फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम डॉ. मुफ़्ती मोहम्मद मुकर्रम ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "अस्पतालों में बेड नहीं है, दवाएँ और वैक्सीन उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए मैंने लोगों से घरों में ही नमाज पढ़ने की अपील की है."

भारत के अजमेर दरगाह के दीवान (धार्मिक गुरु) सैयद ज़ैनुल आबेदीन अली ख़ान ने भी लोगों से सादगी से ईद उल फ़ितर का जश्न मनाने की अपील की है, उन्होंने संक्रमण को देखते हुए लोगों से जश्न नहीं मनाने की अपील की है.

पाकिस्तान में भी कम है रौनक

भारत ही नहीं पाकिस्तान में भी ईद से पहले सख़्त पाबंदियां लागू की गई हैं. पाकिस्तान के प्रमुख टीवी चैनल जियो टीवी न्यूज़ की वेबसाइट के मुताबिक 11 मई तक कोरोना संक्रमण से पाकिस्तान में 19 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

पाकिस्तान सरकार ने आठ से 16 मई के बीच पूरी तरह लॉकडाउन लागू कर दिया है. हालांकि प्रमुख शहरों में ईद को लेकर लोग ख़रीददारी करते नज़र आए.

अंग्रेजी अखबार द डॉन ने लाहौर के कुछ दुकानदारों का इंटरव्यू किया है जिनकी शिकायत है कि कोविड के चलते ख़रीददारी पर असर पड़ा है. यही स्थिति पाकिस्तान की व्यवसायिक राजधानी कराची में भी देखने को मिली.

एक अन्य प्रमुख अंग्रेजी दैनिक द न्यूज़ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक बाज़ार में भीड़भाड़ के चलते ट्रैफिक जाम की स्थिति देखने को मिली.

पाकिस्तान में सरकार ने कोविड-19 प्रोटोकॉल के तहत लोगों को ईद की नमाज पढ़ने को लेकर प्रावधान जारी किए हैं. गाइडलाइंस में कहा गया है कि अगर मस्जिद में नमाज पढ़ी जाए तो दरवाजे और खिड़कियां खोल कर रखे जाएं. यह भी कहा गया है कि नमाज़ को संक्षिप्त रखा जाए, बुजुर्ग और 15 साल से कम उम्र के लोग घर पर नमाज अदा करें.

लोगों की उपस्थिति पर नियंत्रण रखने के लिए शिफ्टों में नमाज पढ़ने की व्यवस्था भी की गई है. पाकिस्तान के योजना मंत्री असद उमर ने भी लोगों से इस ईद के मौके पर घर पर ही सुरक्षित रहने की अपील की है.

श्रीलंका में मुस्लिम धर्म और सांस्कृतिक मामलों के विभाग ने ईद के मौके पर सभी मस्जिदों के बंद रखने की घोषणा की है. मुस्लिम वक्फ़ बोर्ड ने भी लोगों से घरों में भी नमाज पढ़ने की अपील की है. मालदीव के स्वास्थ्य अधिकारियों ने भी लोगों से बाहर निकलकर नमाज अदा करने से बचने की अपील की है.

बांग्लादेश में 'पिछले साल जैसी ईद'

बांग्लादेश में भी कुछ पाबंदियां लागू की गई है लेकिन ईद को लेकर यहां के बाज़ारों में काफ़ी गहमागहमी देखने को मिली. अंग्रेजी वेबसाइट डेली स्टार ने 26 अप्रैल को लिखा है कि शॉपिंग सेंटर और शॉपिंग मॉल्स में भीड़भाड़ दिख रही है, सरकार ने ईद उल फ़ितर के जश्न के लिए दुकानों और मॉल्स को खोलने की अनुमति दी है.

बांग्लादेश में लोग ईद के जश्न के लिए अपने अपने घरों की तरफ लौट रहे हैं, लोगों के बड़ी संख्या में लौटने से हादसे भी देखने को मिले हैं. 12 मई को क्षमता से ज़्यादा सवारी वाले नाव में भगदड़ होने से कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई.

बांग्लादेश के स्वास्थ्य मंत्री ज़ाहिद मालेक ने लोगों के व्यवहार की आलोचना करते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण के लॉकडाउन को देखते हुए लोगों का एक जगह से दूसरी जगह इस तरह जाना आत्मघाती है.

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने लोगों से यात्रा नहीं करने की अपील की है.

बांग्लादेश की न्यूज़ वेबसाइट डेली स्टार ने 12 मई को एक रिपोर्ट प्रकाशित की है जिसकी हेडलाइन है- ईद तो है लेकिन खुशी नहीं है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि किस तरह से लोग परंपरागत तौर पर गले लगने और हाथ मिलाने जैसे रिवाजों पर कोरोना संक्रमण के चलते पाबंदी लगी हुई है.

रिपोर्ट लिखा गया है, "इस साल की ईद भी पिछले साल जैसी ही है - लॉकडाउन वाली."

(बीबीसी मॉनिटरिंग दुनिया भर के टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित होने वाली ख़बरों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करता है. आप बीबीसी मॉनिटरिंग की खबरें ट्विटर और फ़ेसबुक पर भी पढ़ सकते हैं)

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