तो क्‍या BCG के टीके की वजह से भारत में कोरोना वायरस से हुई है कम तबाही!

लंदन। कोरोना वायरस संकट के बीच एक ऐसी खबर आई है जो भारत समेत उन देशों के लिए वरदान की तरह जहां पर टीबी की रोकथाम के लिए बीसीजी यानी बैसेलियस कैलमैटे-गुएरिन वैक्‍सीन का प्रयोग आज भी किया जाता है। ब्रिटेन के अखबार डेली मेल की एक रिपोर्ट ने एक स्‍टडी का हवाला देते हुए कहा है कि जिन देशों में आज भी इस टीके का प्रयोग हो रहा है वहां पर कोविड-19 की वजह से मौतों का आंक‍ड़ा बाकी देशों की तुलना में छह गुना कम है।

एक सदी पहले हुआ था अविष्‍कार

एक सदी पहले हुआ था अविष्‍कार

बीसीजी वैक्‍सीन को एक सदी पहले ईजाद किया गया था और इसका मकसद टीबी के मरीजों की रोग प्रतिरोधात्‍मक क्षमता को बढ़ाना है। टीवी जो कि बैक्‍टीरिया से होने वाला इंफेक्‍शन है, उसके इस टीके के दूसरे फायदों के बारे में भी बातें होने लगी हैं। अमेरिका की जॉन हॉपकिंस ब्‍लूमबर्ग स्‍कूल ऑफ पब्लिक हेल्‍थ की तरफ से यह स्‍टडी हुई है। स्‍टडी के नतीजों को मेडिरिक्सिव पर जारी किया गया है। हेल्‍थ एक्‍सपर्ट्स की समीक्षा के बाद इसे मेडिकल जरनल में भी पब्लिश किया जाएगा।

बीसीजी से मजबूत इम्‍यून सिस्‍टम

बीसीजी से मजबूत इम्‍यून सिस्‍टम

डेली मेल की मानें तो शुरुआती ट्रायल में पता चला है कि जिन लोगों ने बीसीजी का टीका लगवाया है, उनका इम्यूनिटी सिस्टम ज्यादा मजबूत होता है और वे दूसरों के मुकाबले संक्रमण के खिलाफ खुद को ज्यादा सुरक्षित रख पाते हैं। उदाहरण के तौर पर, अमेरिकियों पर किए गए एक ट्रायल में बताया गया था कि बचपन में दी गई बीसीजी वैक्सीन टीबी के खिलाफ 60 सालों तक सुरक्षा प्रदान करती है।

पहली बार 1920 में हुआ भारत में प्रयोग

पहली बार 1920 में हुआ भारत में प्रयोग

भारत में सन् 1920 टीबी से लड़ने के लिए बीसीजी का टीका पहली बार भारत में प्रयोग किया गया था। उस समय तक भारत टीबी के मरीज दुनिया के बाकी देशों की तुलना में सबसे ज्‍यादा थे। इसके बाद स् 1948 में बड़े पैमाने पर लोगों को बीसीजी का टीका लगाया गया ताकि टीबी के खिलाफ उनकी रोग प्रतिरोधात्‍मक क्षमता को बढ़ाया जा सके। अमेरिका और दूसरे देश जैसे इटली और यूके में बीसीजी टीकाकरण को लेकर कोई भी नीति नहीं बनाई गई है। इन देशों में कोरोना महामारी के बड़े गहरे प्रभाव देखे गए हैं।

यूके में 2005 के बाद से प्रयोग न के बराबर

यूके में 2005 के बाद से प्रयोग न के बराबर

यूके में सन् 1953 से 2005 तक 10 से 14 वर्ष तक के बच्‍चों को यह टीका दिया गया था। जैसे ही टीबी का इंफेक्‍शन कम हुआ साल 2005 में सिर्फ उन्‍हीं लोगों को टीका लगाया गया जिन पर खतरा ज्‍यादा था। ये तो कहना मुश्किल है कि ये वैक्सीन दूसरे संक्रमणों से कितना बचाती है लेकिन ऐसा हो सकता है कि वैक्सीन से अंदरूनी प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा बेहतर तरीके से काम करती हो।

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