नया संकट लेकर आया कोरोना वायरस, Long COVID बन रहा है सुसाइड की वजह!

नई दिल्ली, 08 सितंबर: कोरोना महामारी ने लाखों लोगों की जिंदगी को तबाह कर दिया है। कोरोना के शिकार हुए करोड़ों भले कोविड से ठीक हो गई लेकिन उनका असर आज भी उन पर देखा जा सकता है। कई लोग कोरोना से तो ठीक हो गए लेकिन अन्य बीमारियों ने जकड़ लिया, वहीं कुछ लोगों की यादाश्त पर भी असर पड़ा है। जिसका नतीज यह हुआ है कोरोना के उभरने के बाद लोगों में सुसाइड की प्रवृति बढ़ी है।

Coronavirus brought a new crisis, Long COVID is causing SELF KILLING

रॉयटर्स की खबर के मुताबिक, शहर डलास के रहने वाले 56 साल के स्कॉट कोरोना की जकड़ से कभी बाहर नहीं निकल पाए। 2020 में कोरोना के शिकार हुए कोरोना से ठीक होने के बाद कई और बीमारियों के शिकार हो गए। इसके बाद उनकी यादाश्त में कमजोर होती गई। जिसके बाद वह अवसाद से ग्रस्त हो गए। कुछ समय बात स्कॉट ने सुसाइड कर ली। टेलर ने अपने दोस्त को लिखे आखिरी संदेश में कहा, किसी को फिक्र नहीं है, किसी के पास सुनने का समय नहीं है।

टेलर ने आगे लिखा था, मुझे कपड़े धोने में दिक्कत होती है, थकान, दर्द और पीठ की तकलीफ पीछा ही नहीं छोड़ती। मेरा सिर घूमता है, जी मिचलाता है, उल्टी होती है और दस्त भी रहते हैं। ऐसा लगता है कि मैं कुछ कह रहा हूं, लेकिन समझ नहीं आता क्या कह रहा हूं। लॉन्ग कोविड एक जटिल मेडिकल कंडीशन है जिसका निदान करना कठिन हो सकता है क्योंकि इसमें 200 से अधिक लक्षण होते हैं। जिनमें से कुछ अन्य बीमारियों के जैसी हो सकती हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार इसमें थकावट और संज्ञानात्मक हानि से लेकर दर्द, बुखार और दिल की धड़कन आदि शामिल हो सकती हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ और ब्रिटेन की डेटा कलेक्शन एजेंसी के अब कई वैज्ञानिक इस पर अब सबूत इकठ्ठा कर रहे हैं कि लॉन्ग कोविड के मामलों में डिप्रेशन और आत्महत्या के कितने मामले हैं और यह कितनी मौतों के लिए जिम्मेदार है।

अमेरिका के 20 बड़े अस्पतालों में 1.3 मिलियन व्यस्कों के डेटा पर किए गए एनेलिसिस के अनुसार 19,000 लोगों में मई 2020 से जुलाई 2020 के बीच लॉन्ग कोविड की पहचान हुई। यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन के हेल्थ मेट्रिक एंड इवैलुएशन के अनुसार, जबकि कई लॉन्ग कोविड के मरीज समय के साथ ठीक हो गए। करीब 15 प्रतिशत लोग 12 महीने बाद भी लक्षणों का सामना कर रहे हैं।इसका कोई सत्यापित इलाज नहीं है और इसके लक्षण कई बार पीड़ितों को काम करने लायक नहीं छोड़ते।

अमेरिकी सरकार के अकाउंटेबिलिटी ऑफिस के मार्च में किए गए आंकलन के अनुसार, केवल अमेरिका में ही कोविड के कारण 23 मिलियन लोगों के लिए दिमागी बीमारी और आत्महत्या का खतरा बढ़ गया है। एक ब्रिटिश सरकार का सलाहकार समूह व्यापक आबादी की तुलना में लंबे कोविड रोगियों के लिए आत्महत्या के जोखिम का अध्ययन कर रहा है, जबकि राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (ONS) इस बात की जांच कर रहा है कि क्या यह एक लंबे कोविड रोगी के आत्महत्या के जोखिम का आकलन कर सकता है जैसा कि अन्य लोगों के लिए करता है।

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