कोरोना के डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ कम प्रभावी दिखी वैक्सीन, बूस्टर डोज की पड़ेगी जरूरत- UK स्टडी
नई दिल्ली, अगस्त 19। ब्रिटेन की एक स्टडी में सामने आया है कि कोरोना के डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ वैक्सीन कम प्रभावी है। इस स्टडी के परिणामों से पता चलता है कि डेल्टा वेरिएंट को मात देने के लिए बूस्टर डोज की जरूरत पड़ेगी। यह अध्ययन पूरी तरह से वैक्सीनेट लोगों पर किया गया और सामने आया कि इन लोगों को बूस्टर डोज देने की जरूरत है।
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डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ कम प्रभावी दिखी वैक्सीन
स्टडी के परिणामों के मुताबिक, फाइजर-बायोनटेक और एस्ट्रेजेनेका की वैक्सीन ने पूर्ण टीकाकरण के बाद भी 90 दिनों के अंदर अपनी प्रभावकारिता खो दी और अल्फा वेरिएंट के मुकाबले डेल्टा वेरिएंट पर ये दोनों वैक्सीन कम प्रभावी दिखी। ये स्टडी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के द्वारा की गई है। आपको बता दें कि दुनिया के अधिकांश देशों में फाइजर और एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन ही लगाई जा रही है।
स्टडी के मुताबिक, संक्रमण को रोकने में फाइजर या एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की प्रभावशीलता क्रमशः 75 प्रतिशत और 61 प्रतिशत तक गिर गई। वहीं टीकों के दूसरे शॉट के 90 दिन बाद इस प्रभावकारिता में 85 और 68 प्रतिशत तक की कमी आई। शोधकर्ताओं ने ये स्टडी उन लोगों पर की, जिन्हें पूरी तरह से वैक्सीनेट हुए 2 हफ्ते ही हुए थे।
इस स्टडी के बाद भी शोधकर्ताओं का ये सुझाव है कि फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन और ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन अभी भी कोविड -19 के डेल्टा संस्करण के कारण नए संक्रमणों से अच्छी सुरक्षा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि इस वैक्सीन की दोनों खुराक अभी भी कम से कम उसी स्तर की सुरक्षा प्रदान करती है, जैसे कि कोरोना के प्राकृतिक वेरिएंट से ये सुरक्षा दिलाती हैं।
अमेरिका ने बूस्टर डोज को किया है अनिवार्य
आपको बता दें कि यूके की ये स्टडी कहीं ना कहीं बूस्टर डोज की सिफारिशों को मजबूती प्रदान करती है। वैसे भी अमेरिका ने हाल ही में बूस्टर डोज को अपने यहां अनिवार्य कर दिया है। 20 सितंबर से अमेरिका में बूस्टर डोज लगना भी शुरू हो जाएगी। अमेरिका के बाद भारत में भी बूस्टर डोज को अनिवार्य करने की सिफारिश की गई है।












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