प्रमिला जयपाल, इल्हान उमर.. एक 'भारतीय' दूसरी पाकिस्तान की पिट्ठू.. PM मोदी के दौरे में उगल रहीं जहर, कौन हैं?
PM Modi US Visit: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अमेरिका दौरे को बाइडेन प्रशासन ऐतिहासिक कह रहा है और पीएम मोदी के राजकीय दौरे पर दुनियाभर की नजर है। बाइडेन परिवार आज शाम प्रधानमंत्री मोदी के लिए अंतरंग डिनर कार्यक्रम का आयोजन करने वाला है, तो कल प्रधानमंत्री मोदी, अमेरिकी संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करने वाले हैं।
लेकिन, प्रधानमंत्री मोदी की इस राजकीय यात्र से कुछ लोग खुश नहीं हैं और उनमें से दो लोगों का नाम सबसे आगे हैं। पहला नाम है प्रमिला जयपाल का, जो भारतीय मूल की हैं, लेकिन उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अमेरिका में मुहिम चलाया है, जबकि दूसरी इल्हान उमर हैं, जो पाकिस्तान परस्त हैं और उन्होंने एक बार फिर से भारत के खिलाफ जहर उगला है।

प्रमिला जयपाल ने क्या किया है?
प्रमिला जयपाल, जो अपने भारत विरोधी एजेंडे के लिए कुख्यात रही हैं, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अमेरिका दौरे को लेकर मुहिम चलाया है और 70 सांसदों से एक पत्र पर साइन करवाया है, जिसमें लोकतंत्र और मानवाधिकार के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना की गई है।
प्रमिला जयपाल ने मुहिम चलाते हुए 70 सांसदों से दस्तखत करवाकर एक चिट्ठी राष्ट्रपति जो बाइडेन को भेजी है, जिसमें उनसे मांग की गई है, कि जब वो भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात करें, तो वो 'भारत में लोकतंत्र की स्थिति और मानवाधिकार उल्लंघन' को लेकर सवाल उठाएं।
द हिन्दू की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के 70 सांसदों ने, जिनमें सीनेटर्स और संसद के प्रतिनिधि शामिल हैं, उन्होंने लिखा है, कि "स्वतंत्र, विश्वसनीय रिपोर्टों की एक श्रृंखला भारत में राजनीतिक स्थान के सिकुड़ने, धार्मिक असहिष्णुता के बढ़ने, नागरिक समाज संगठनों और पत्रकारों को निशाना बनाने और प्रेस की स्वतंत्रता और इंटरनेट तक पहुंच पर बढ़ते प्रतिबंधों की ओर परेशान करने वाले संकेतों को दर्शाती है।"
इस अभियान का नेतृत्व प्रमिला जयपाल ने किया है, जो अपने भारत विरोधी एजेंडे के लिए हमेशा से कुख्यात रही हैं और उनसे इसी बात की उम्मीद भी की जा रही थी।

कौन हैं प्रमिला जयपाल?
प्रमिला जयपाल, भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद हैं और अमेरिका की उन सांसदों और नेताओं की फेहरिस्त में आती हैं, जो अपने भारत विरोधी एजेंडे के लिए जानी जाती हैं। प्रमिला अकसर भारत के खिलाफ जहर उगलती रहती हैं। लिहाजा, भारत ने उन्हें भाव देना बिल्कुल बंद कर दिया है और पिछले दिनों प्रमिला जयपाल ने इस बात को लेकर बौखलाहट भी दिखाई थी, जब इसी साल फरवरी में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया था।
प्रमिला जयपाल भारत सरकार के कश्मीर से अनुच्छेद 370 निरस्त करने के फैसले की जमकर आलोचना करते हुए एक कैम्पेन तक चला चुकी हैं। जिसमें उन्होंने मोदी सरकार के फैसले की जोरदार तरीके से विरोध करने की कोशिश की थी, और उनका साथ अमेरिका की मुस्लिम सांसदों ने दिया था।
प्रमिला जयपाल कश्मीर घाटी में प्रतिबंधों को हटाने की मांग को लेकर अमेरिका की प्रतिनिधि सभा में एक द्विदलीय प्रस्ताव भी पेश कर चुकी हैं, जो संसद में गिर गया था।
पाकिस्तान परस्त इल्हान उमर को जानिए
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अमेरिकी संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करने वाले हैं और अमेरिका की मुस्लिम सांसद इल्हान उमर ने ट्वीट करते हुए कहा है, कि वो पीएम मोदी के भाषण के दौरान संसद का बहिष्कार करेंगी।
इल्हान उमर ने जहर उगलते हुए कहा है, कि "प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने धार्मिक अल्पसंख्यकों का दमन किया है, हिंसक हिंदू राष्ट्रवादी समूहों को गले लगाया है, और पत्रकारों/मानवाधिकार अधिवक्ताओं को निशाना बनाया है। इसलिए, मैं मोदी के भाषण में शामिल नहीं होऊंगी।"
इल्हान उमर को लेकर पहले से ही इस बात का अंदाजा था, क्योंकि वो हिन्दू विरोधी, भारत विरोधी और पाकिस्तान परस्त एजेंडा चलाने के लिए कुख्यात रही हैं। वो पिछले साल पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से भी मिल चुकी हैं और उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का दौरा किया था, जिसका भारत ने सख्त विरोध किया था। वहीं, बाद में इल्हान उमर को अमेरिका की विदेश मामलों की समिति से बाहर निकाल दिया गया था।

जहरीली बयानबाजी में हैं माहिर
इल्हान उमर, सोमाली मूल की अमेरिकी नागरिक हैं, जो राष्ट्रपति जो बाइडेन की डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता हैं। इल्हान उमर ने भारत के खिलाफ जहर उगलने के लिए कुख्यात हैं और पिछले साल उन्होंने पीओके का भी दौरा किया था, जिसपर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई थी।
पीओके की अपनी यात्रा के बाद उन्होंने कहा था, कि कश्मीर को संयुक्त राज्य अमेरिका से ज्यादा ध्यान देना चाहिए, जिसकी भारत ने कड़ी निंदा की थी। इल्हान उमर की मानसिकता वही है, जो पाकिस्तानी नेताओं की होती है, जो अमेरिका जैसे देश में रहने के बाद भी अपनी संकीर्ण और सांप्रदायिक मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाई हैं।
इल्हान उमर ने पीओके का दौरा करने के बाद कहा था, कि 'मुझे नहीं लगता है कि, कांग्रेस में (अमेरिकी संसद में) इसके (कश्मीर) बारे में किसी भी तरह की कोई बात की जा रही है, या फिर प्रशासन (बाइडेन प्रशासन) के अंदर ही किसी तरह की बात की जा रही है'। कहा जाता है, कि इल्हान उमर को भारत के खिलाफ बोलने के लिए पाकिस्तान की तरफ से फंडिंग की जाती है।












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