टूटने के कगार पर पहुंचा बोस्निया और हर्जेगोविना, संघर्ष के बीच भारत ने पढ़ाया शांति का पाठ
दक्षिण-पूर्वी यूरोपीय देश बोस्निया और हर्जेगोविना में चमर पर संघर्ष पहुंच चुका है, जिसको लेकर भारत ने यूनाइटेड नेशंस में शांति की अपील की है।
नई दिल्ली, नवंबर 05: बोस्निया और हर्जेगोविना के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच भारत सरकार की तरफ से आधिकारिक पक्ष यूनाइटेड नेशंस में रखा गया है। भारत का मानना है कि बोस्निया और हर्जेगोविना के सामने आने वाली चुनौतियों को उसके नेताओं द्वारा बातचीत, आपसी समझ और सहानुभूति के माध्यम से दूर किया जा सकता है।

विवाद पर क्या बोला भारत?
गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में काउंसलर ने कहा कि, दोनों देशों को आपसी समझ और बातचीत के आधार पर ही मतभेदों को सुलझाना चाहिए। आपको बता दें कि, बाल्कन देश वर्तमान में अपने राजनीतिक नेताओं में फूट की वजह से टूटने की कगार पर पहुंच गया है। इससे पहले, संयुक्त राष्ट्र के नेताओं ने डेटन शांति समझौते के कार्यान्वयन में प्रगति की समीक्षा की, जो एक एकल संप्रभु राज्य के रूप में बोस्निया और हर्जेगोविना के विचारशील क्षेत्रों के अस्तित्व की पुष्टि करता है।

राजनीतिक दरार की निंदा
राजनीतिक दरार की निंदा करते हुए यूनाइटेड नेशंस में भारत के स्थायी मिशन के काउंसलर माथुर ने कहा कि, बोस्निया और हर्जेगोविना में हालिया बहस में पिछले दो दशकों में हुई "प्रगति को कमजोर करने की क्षमता" है। उन्होंने कहा कि, "यह महत्वपूर्ण है कि सभी पक्षों को एक समझौतावादी दृष्टिकोण अपनाने और विवादास्पद मुद्दे को हल करने के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।" वार्ता के माध्यम से सुलह का आह्वान करते हुए भारतीय दूत ने जोर देकर कहा कि, शांति के लिए सामान्य रूपरेखा समझौता संघर्ष को हल करने का आधार प्रदान करता है।

यूएनएससी ने अपनाया अनोखा संकल्प
इस बीच, सत्र के दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने कक्षाओं और स्कूलों की सुरक्षा के लिए एक अनूठा प्रस्ताव अपनाया और संघर्षरत पक्षों से शिक्षा के अधिकार की तुरंत रक्षा करने का आग्रह किया है 29 अक्टूबर को अपने आधिकारिक बयान में संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि, यह बच्चों की बढ़ाई बाधित नहीं हो, उसको लेकर ये अनूठा संकल्प अपनाया गया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सदस्य देशों से यह सुनिश्चित करने के लिए घरेलू विधायी ढांचे को अपनाने के लिए कहा कि, उनकी अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रतिबद्धताएं पूरी हों, जिसमें स्कूलों, बच्चों, शिक्षकों और अन्य नागरिकों पर हमलों को रोकने के लिए व्यापक उपाय शामिल हैं।
बोस्निया और हर्जेगोविना विवाद क्या है?
आपको बता दें कि, बोस्निया और हर्जेगोविना दक्षिणपूर्व यूरोप में बाल्कन प्रायद्वीप पर स्थिति एक देश है और इसके उत्तर, पश्चिम में और दक्षिण में क्रोएशिया स्थिति है, जबकि दक्षिण में मोंटेनेग्रो स्थिति है। अफगानिस्तान की तरह ही बोस्निया और हर्जेगोविना भी लैंड लाउक्ड देश है, यानि, इस देश की एक भी सीमा समुद्र से नहीं मिलती है और इस देश के नेताओं के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है और अब बोस्निया और हर्जेगोविना पर दो हिस्सों में बंटने का खतरा काफी मंडरा रहा है।












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