अब खुलेआम बिकेंगे पाकिस्तानी नेता, चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी ने दिया बहुत बड़ा ऑफर
चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी ने कहा है कि वो पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टियों के साथ अच्छे संबंध बनाने के लिए पार्टनरशिप करना चाहती है, ताकि पाकिस्तान और चीन संबंध और मजबूत हो।
इस्लामाबाद/बीजिंग, जून 18: पाकिस्तान के एयरपोर्ट, बंदरगाह, इस्लामाबाद के बड़े-बड़े पार्क और कई चिड़ियाघरों पर चीन का कब्जा हो चुका है। जिस तरह चीन ने श्रीलंका के हंबनटोटा पर कब्जा किया है, उसी तरह पाकिस्तान के कई संस्थानों पर अब चीन का कब्जा है। इसके साथ ही पाकिस्तान की विदेश नीति क्या होगी, उसपर भी एक समझौते के तहत करीब करीब कब्जा कर लिया है। लेकिन, अब पाकिस्तान की पॉलिटिकल पार्टियों को चीन ने ऐसा ऑफर दिया है, जिससे वो इनकार नहीं करने वाली हैं, क्योंकि बदले में चीन से उन्हें 'मोटा माल' मिलेगा, लेकिन इसके साथ ही आप समझ लीजिए कि पाकिस्तान की रही सही संप्रभुता भी चीन के हवाले हो जाएगी।

कम्यूनिस्ट पार्टी का बड़ा ऑफर
चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी ने कहा है कि वो पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टियों के साथ अच्छे संबंध बनाने के लिए पार्टनरशिप करना चाहती है, ताकि पाकिस्तान और चीन संबंध और मजबूत तो हो ही, इसके साथ ही चाइना-पाकिस्तान इकोनोमिक कॉरिडोर को तेजी मिले। पाकिस्तान स्थित चीन के राजदूत नोंग-रोंग ने पाकिस्तान-चायना इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित की गई वेबिनार में बोलते हुए कहा कि 'चायनीज कम्यूनिस्ट पार्टी, पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टियों के साथ बेहद महत्वपूर्ण और सहयोगी संबंध कायम करना चाहता है और हम इसके लिए पूरी आजादी देंगे कि पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टियां चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी के साथ अपने संबंध बनाए, संबंधों को विस्तार दें और दोनों देशों के बीच पॉलिटिकल पार्टी टू पॉलिटिकल पार्टी बातचीत हो, ताकि आने वाले नस्ल को, जेनरेशन के लिए एर बेहतर और खूबसूरत भविष्य का निर्माण किया जा सके।'

नींव में सीपीईसी
पाकिस्तान स्थित चीनी राजदूत मे कहा कि 'चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टियों के साथ मिलकर काम करने के तैयार है, ताकि सीपीईसी पॉलिटिकल पार्टिज ज्वाइंट कंसल्टेशन मैकेनिज्म का निर्माण किया जा सके। ताकि सीपीईसी और नये पाकिस्तान का जो सपना है, उसे पूरा किया जा सके।' इसके साथ ही चीनी राजदूत ने कहा कि 'इस पहल से दोनों देशों की राजनीतिक पार्टियों के बीच विचारों का आदान-प्रदान होगा, नीतियों का आदान-प्रदान होगा, लोग एक दूसरे से जुड़ सकेंगे और एक बेहतर राजनीतिक व्यवस्था और लोगों के लिए बेहतर वातावरण का निर्माण हो सकेगा और फिर सीपीईसी का काम काफी तेजी से हो सकेगा'। पाकिस्तानी मीडिया का कहना है कि सीपीईसी के लिए चीन पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टियों के साथ संबंध जोड़ना चाहती है।

राजनीतिक पार्टियां हाईजैक!
इससे पहले चीन सीपीईसी से संबंधित मामलों से निपटने के लिए पाकिस्तान की केन्द्रीय सरकार और प्रांतीय सरकारों के साथ अपने संबंधों को विस्तार दे रहा था। इसके साथ ही पाकिस्तान की आर्मी को भी चीन ने सीपीईसी प्रोजेक्ट में शामिल कर रखा है और पाकिस्तानी आर्मी के दर्जनों बड़े अधिकारियों को सीपीईसी से काफी पैसा कमाने का मौका मिला है। पिछले 2 सालों से सीपीईसी का काम रूका हुआ है, क्योंकि पाकिस्तान के पास पैसे नहीं है और चीन ने पिछले महीने ही पाकिस्तान को दिए जाना वाला 6 अरब डॉलर का लोन खारिज कर दिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि अब चीन पाकिस्तान के नेताओं को सीधे तौर पर खरीदना चाहता है और सबसे बड़ी बात ये है कि पाकिस्तानी नेता खुद बिकना चाहते हैं। पाकिस्तानी मीडिया का कहना है कि बीजिंग ने पहले ही पाकिस्तान की सरकार पर मजबूत पकड़ बना रखी है लेकिन क्या अब चीन पाकिस्तान के राजनीतिक सिस्टम में भी घुसना चाहता है और क्या चीन अब पाकिस्तान की सरकारी तंत्र में भी दखल देना चाहता है।

राजनीतिक पार्टियों को मदद
चीन ने कहा है कि वो पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टियों से अपने संबंध को विस्तार देना चाहता है ताकि दोनों देशों का द्विपक्षीय संबंध और मजबूत हो। इसके लिए वो पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टियों को मदद देगा। इसका साफ साफ मतलब ये है कि चीन ने अब पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टियों को खरीदने का ही फैसला कर लिया है। ऐसा चीन ऑस्ट्रेलिया में करने की कोशिश कर चुका है और पिछले साल रिपोर्ट आई थी कि ऑस्ट्रेलिया के कई नेताओं को चीन ने पैसे देने का ऑफर दिया था और ऑस्ट्रेलिया के नेता राजी भी हो गये थे, लेकिन बाद में ऑस्ट्रेलियन नेता चीन की मदद करने से मुकर गये थे और उसके बाद ही चीन-ऑस्ट्रेलिया संबंध काफी खराब हो गया है। अगर पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टियां चीन के इस जाल में फंसती हैं, तो इसका मतलब साफ होगा कि पाकिस्तान की संप्रभुता, देश की आजादी गंभीर खतरे में आ जाएगी। और अगर कोई चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी के मकसद से अंजान है, तो फिर बात अलग है। सीपीईसी इस संबंध के मूल में है, जिसका साफ मतलब है कि पाकिस्तान में सीपीईसी को लेकर ऊभरे किसी भी मतभेद को चीन जड़ से खत्म कर देना चाहता है। क्योंकि, अब पाकिस्तानी एक्सपर्ट भी कहने लगे हैं कि चीन ने सीपीईसी के नाम पर पाकिस्तान को कर्ज के दलदल में धकेल दिया है। लिहाजा, अगर पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टियां चीन के इस आखिरी जाल में फंस गई, और फसेंगी हीं, तो फिर पाकिस्तान को चीन का स्थाई गुलाम बनने से कोई रोक नहीं सकता है।












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