जलवायु परिवर्तन से इंग्लैंड के बाढ़ में डूबने का खतरा, वैज्ञानिकों ने आपातकालीन अलर्ट जारी किया
ब्रिटेन की पर्यावरण एजेंसी ने कहा है कि, अगर जलवायु परिवर्तन रोकने के आपातकालीन कदम नहीं उठाए गये, तो इंग्लैंड खत्म हो जाएगा।
लंदन, अक्टूबर 13: आज से 100 साल पहले दुनिया पर इंग्लैंड का राज था, लेकिन कुदरत का खेल देखिए, कि वही इंग्लैंड आज तबाह होने के कगार पर पहुंच चुका है। इंग्लैंड के कई वैज्ञानिकों ने मिलकर एक रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें कहा गया है कि अगर इंग्लैंड ने 'आपातकालीन' कदम नहीं उठाए, तो इंग्लैंड का अस्तित्व ही मिट जाएगा। वैज्ञानिकों की एक टीम ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि, अगले साल की गर्मी में ही इंग्लैंड में बर्बादी मचने वाली है।

इंग्लैंड पर सबसे बड़ा खतरा
ब्रिटिश सरकार की एक एजेंसी ने बुधवारा को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि, इस साल जिस तरह की भयानक बाढ़ का सामना जर्मनी ने किया था, उससे भी खतरनाक बाढ़ का सामना अगले साल ब्रिटेन को करना होगा, जिसकी वजह से ब्रिटेन में भयानक स्तर पर बर्बादी फैलेगी। ब्रिटिश सरकार की एजेंसी ने कहा है कि, अगर देश जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए आपातकालीन कदम नहीं उठाता है, तो फिर ब्रिटेन में बर्बादी मचना तय है, जिसे रोकना नामुमकिन है। ब्रिटिश सरकार की एक एजेंसी की एक रिपोर्ट में पर्यावरण एजेंसी ने ग्लोबल वार्मिंग के कारण गर्म, शुष्क ग्रीष्मकाल, भीषण बाढ़, समुद्र में बढ़ते जलस्तर और पानी की आपूर्ति पर डराने वाली रिपोर्ट जारी की है।

2050 तक होगा बुरा हाल
ब्रिटेन सरकार की पर्यावरण एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, विश्व में औसत तापमान बढ़ने का अनुमानम 2 डिग्री सेल्सियस लगाया गया है, लेकिन अगर उससे कम तापमान भी बढ़ता है, तो ब्रिटेन में हर साल होने वाली बारिश में 6 प्रतिशत का इजाफा हो जाएगा। वहीं, 2050 तक ब्रिटेन में औसत बारिश 15 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ जाएगी, जिसका मतलब ये हुआ कि ब्रिटेन में हर तरफ बर्बादी ही बर्बादी होगी और ज्यादातर शहर, गांव और कस्बे पूरी तरह से पानी में डूब जाएंगे। ज्यादातर शहरों के अस्तित्व ही मिट जाएंगे। रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि 2050 तक लंदन में समुद्र का जलस्तर 23 सेंटीमीटर से 29 सेंटीमीटर बढ़ जाएगा, जिसका भयानक असर होगा और 2080 तक ब्रिटेन में समुद्र का जलस्तर करीब 45 सेंटीमीटर बढ़ जाएगा, जिसमें कई शहर हमेशा के लिए डूब जाएंगे।

रिपोर्ट से ब्रिटेन में हाहाकार
ब्रिटिश सरकार की पर्यावरण एजेंसी की अध्यक्ष एम्मा हॉवर्ड बॉयड ने कहा कि "जलवायु परिवर्तन निश्चित है'' और सामने बस दो उपाय हैं, या तो उसे ''रोको या मरो''। यानि, एजेंसी ने साफ तौर पर कह दिया है कि, ग्लोबल वॉर्मिंग को चाहे तो रोक लो, या फिर मरने के लिए तैयार हो जाओ। उन्होंने कहा कि, "अगर हम सही चीजें करते हैं तो हम जलवायु आपातकाल से सफलतापूर्वक निपट सकते हैं, लेकिन हमारे पास प्रभावी अनुकूलन उपायों को लागू करने के लिए समय समाप्त हो रहा है,"। उन्होंने कहा कि, ''अगर ब्रिटेन को बचाना है, तो सरकार को किसी भी तरह से उपाय करने ही होंगे और लोगों को आपातकालीन आवाज उठाने ही होंगे, इसके अलावा अब सारे विकल्प खत्म हो चुके हैं''। आपको बता दें कि, सिर्फ ब्रिटेन ही नहीं, चीन को लेकर भी पिछले दिनों ऐसी ही डराने वाली रिपोर्ट आई है, जिसमें कहा गया है कि, चीन के कई औद्योगिक शहर जल्द ही समुद्र में डूब जाएंगे।

चीन को लेकर डराने वाली रिपोर्ट
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक रूस के पूर्वीय तटीय शहरों पर बहुत बड़ा खतरा मंडरा रहा है और अगले कुछ सालों में चीन पर इसका असर दिखना शुरू हो जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक जब चीन की जनसंख्या, जीडीपी को समुद्री लेवल बढ़ने के साथ जोड़ा गया और फिर रिपोर्ट तैयार की गई, तो पता चला है कि चीन बहुत बड़े खतरे में घिर चुका है। रिपोर्ट से पता चला कि चीन के सबसे महत्वपूर्ण शहरों में काफी तेज समुद्री ज्वार आएगा और उन शहरों में औद्योगिक उत्पादन पूरी तरह से बंद करना पड़ेगा। फाइनेंसियल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि साल 2100 के आते आते चीन के बड़े बड़े औद्योगिक शहरों पर समुद्री बाढ़ और ज्वार की वजह से ताला पड़ जाएगा। बचने का एक ही रास्ता है, वो है ग्लोबल वॉर्मिंग को कम करके क्लाइमेट चेंज को रोकना, जो संभव नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि क्लाइमेट चेंज होने की वजह से समु्द्र में पानी का लेवल काफी ज्यादा बढ़ जाएगा, जो चीन के पूर्वी तटीय शहरों के लिए विनाशकारी होगा।

शंघाई पर सबसे बड़ा खतरा
शंघाई शहर, चीन का सबसे बड़ा आर्थिक शहर माना जाता है और वहां पर चीन की बड़ी बड़ी प्रतिष्ठित कंपनियां हैं। शंघाई शहर यांग्ज़ी नदी और हांग्जो बे के बीच स्थिति है और समुद्री बाढ़ और ज्वार की चपेट में आने वाला ये सबसे पहला और बड़ा शहर होगा। साल 2019 के आंकड़ों के मुताबिक शंघाई शहर से चीन करीब 974 बिलियन डॉलर का व्यापार करता है, जो चीन की जीडीपी का बड़ा हिस्सा है और समुद्री बाढ़ की चपेट में सबसे पहले ये शहर आएगा।

समुद्री ज्वार से कितना नुकसान
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा नहीं है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से ये शहर डूब जाएंगे, बल्कि यहां से व्यापार करना नामुमकिन के बराबर हो जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि लगातार समुद्री तूफान आने से बार बार इन्फ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचेगा। एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट पर भारी प्रभाव पड़ेगा। पानी की आपूर्ति की कमी हो जाएगा और सबसे बड़ा खतरा ये है कि बार बार तूफान और बाढ़ आने से इन शहरों की मिट्टी की कसाव काफी ज्यादा कमजोर हो जाएगी, लिहाजा यहां उत्पादन करना बेहद मुश्किल हो जाएगा। तूफान की वजह से व्यापार को बार बार रोकना पड़ेगा और उत्पादन बंद करना पड़ेगा, जिससे चीन के इन शहरों का आर्थिक विकास पूरी तरह से रूक जाएगा, जिसका असर चीन की जीडीपी पर पड़ेगा।
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