पिघल रहा अल्पाइन ग्लेशियर, खतरे में यूरोप, जलवायु परिवर्तन मचाएगा तबाही
इटली में अल्पाइन ग्लेशियर (Alpine glacier) का एक बड़ा हिस्सा रविवार दोपहर को टूट कर नीचे गिर गया, जिसकी चपेट में आने से कम से कम सात लोगों की मौत हो गई। यूरोप इस वक्त जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहा है।
रोम, 5 जुलाई : दुनिया में जलवायु परिवर्तन का असर तेजी से दिखने लगा है। इंसान तरक्की की होड़ में प्रकृति का विनाश करता जा रहा है। सारी दुनिया आगे बढ़ने की चाहत में नेचर के सिग्नेचर को बदल कर रख दिया है। फिर हमने कहा, यह ग्लोबल वार्मिंग है। इस ग्लोबल वॉर्मिंग पर दुनिया के देश हर साल अलग-अलग देशों में बैठक करते हैं। इसके बाद भी प्रकृति मनुष्यों से संभलती नहीं दिख रही है। यूरोप वर्तमान में जलवायु परिवर्तन की समस्या से जूझ रहा है। जानकार बताते हैं कि, अगर समय रहते यूरोप नहीं संभला तो वहां भयानक प्राकृतिक आपदा भी आ सकती है।

गर्म हो रहा है यूरोप
जानकार बताते हैं कि, इटली का मौसम गर्म हो रहा है, जिससे ग्लेशियर पिघलता जा रहा है, नदियां सूख रही हैं। अगर ऐसा रहा तो आने वाले समय में हालात बद से बदतर हो जाएंगे। कुछ दिन पहले ही इटली की पो नदी के नाला बनने की खबर मिली थी, इसके बाद अब आल्प्स ग्लेशियर में तापमान बढ़ने की खबर मिली। जानकारी के मुताबिक, आल्प्स ग्लेशियर जलवायु परिवर्तन का शिकार हो गया है। यहां बढ़ते तापमान ने आल्प्स ग्लेशियर को और अधिक अस्थिर और खतरनाक बना दिया है। अधिकारियों ने इस त्रासदी के लिए भीषण तापमान को जिम्मेदार ठहराया है। यूरोप में गर्मी की कहर से प्रकृति के अमूल्य धरोहर नष्ट हो रहे हैं। इससे धरती पर रहने वाले प्राणी के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है।

अल्पाइन ग्लेशियर पिघल रहा है
खतरा अब दिखने लगा है, इटली में अल्पाइन ग्लेशियर (Alpine glacier) का एक बड़ा हिस्सा रविवार दोपहर को टूट कर नीचे गिर गया था, जिसकी चपेट में आने से कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई। मृतकों की संख्या की पुष्टि नहीं हो पाई है. यह भी पता नहीं चला है कि कितने लोग लापता हैं। नेशनल अल्पाइन एंड केव रेसक्यू कोर' ने ट्वीट किया कि मरमोलाडा चोटी इलाके में जारी बचाव में पांच हेलीकॉप्टर और खोजी कुत्तों की मदद ली जा रही। आपात सेवा ने ट्वीट में कहा, ''ग्लेशियर टूटने से इसकी चपेट में आकर पांच लोगों की मौत हो गई. घटना में आठ लोग घायल हुए जिनमें से दो की हालत गंभीर है।''

जलवायु परिवर्तन के कारण मानवीय संकट
वेनेटो क्षेत्र में स्थित एसयूईएम डिस्पैच सर्विस ने बताया कि 18 लोग बर्फ और चट्टानों के मलबे के बीच फंसे हैं, जिन्हें अल्पाइन रेसक्यू कोर के कर्मी निकालने में जुटे हैं. पूर्वी डोलोमाइट्स में मरमोलाडा सबसे ऊंची चोटी है जिसकी ऊंचाई लगभग 11,000 फुट है। अल्पाइन बचाव सेवा के प्रवक्ता वाल्टर मिलान ने 'राय चैनल' से कहा कि यह पता नहीं चल पाया है कि ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा किन कारणों से टूटा. उन्होंने कहा कि जून से इटली भीषण गर्मी का सामना कर रहा है. ग्लेशियर टूटने की वजह गर्मी भी हो सकती है।

पिछले साल जर्मनी में आई थी बाढ़
बता दें कि, जलवायु परिवर्तन के कारण पिछले साल जर्मनी में आई बाढ़ ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया था। एक रिसर्च में आशंका जताई गई है कि आने वाले समय में यूरोप को और खतरनाक मौसम का सामना करना पड़ सकता है। मौसम विज्ञानी नादिया ब्लोमेंजल ने ऐसा मॉडल दिया है जिससे पता चलता है कि यूरोप में जो मौसम हाल में देखने को मिला है वह हमेशा के लिए हो सकता है।

इंसानों पर प्रकृति का कहर
जर्मनी और बेल्जियम की बाढ़ में 180 लोगों की मौत हो गई थी। दूसरी ओर फ्रांस के 7000 हेक्टेयर क्षेत्र में जंगलों की आग में एक शख्स की मौत हो गई थी। उनका कहन है कि अगले 50 साल में ऐसा मौसम सामान्य होने लगेगा और यूरोप के जीवन को बदल देगा।












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