पहली बार हुआ ऐसा, इस देश में अब नहीं बचा एक भी ग्लेशियर, वैज्ञानिकों ने बताया अब किन देशों का है नंबर
वेनेजुएला आधुनिक इतिहास में ऐसा पहला देश बन गया है, जिसके सारे ग्लेशियर गायब हो गए हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक इस दक्षिण अफ्रीकी देश में बचा आखिरी ग्लेशियर भी गायब होकर एक मैदान बन गया है।
माना जा रहा है कि वेनेजुएला आधुनिक समय में अपने सभी ग्लेशियर खोने वाला पहला देश है। इंटरनेशनल क्रायोस्फीयर क्लाइमेट इनिशिएटिव (आईसीसीआई) ने कहा है कि वेनेजुएला का एकमात्र शेष ग्लेशियर- हम्बोल्ट या ला कोरोना बहुत छोटा हो गया था। ऐसे में इसे अब ग्लेशियर के बजाय आइस फील्ड के तौर पर वर्गीकृत किया गया है।

जलवायु परिवर्तन के कारण वैश्विक औसत तापमान बढ़ने के कारण ग्लेशियर पिघल रहे हैं, जिससे दुनिया भर में समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है। पिछली शताब्दी में वेनेजुएला से कम से कम 6 ग्लेशियर समाप्त हो गए थे।
सभी छह ग्लेशियर सिएरा नेवादा डी मेरिडा पर्वत श्रृंखला में स्थित थे, जिनमें से पांच 2011 तक गायब हो गए। वेनेजुएला में बस एक हम्बोल्ट ग्लेशियर ही बचा था, जो देश के दूसरे सबसे ऊंचे पर्वत पिको हम्बोल्ट के करीब था।
अनुमान लगाया गया था कि हम्बोल्ट ग्लेशियर कम से कम एक और दशक तक चलेगा, लेकिन ये समय से पहले ही अपने सिकुड़ गया। इस साल मार्च में कोलंबिया में लॉस एंडीज़ विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया कि ये ग्लेशियर अनुमान से कहीं अधिक तेजी से पिघला है और 450 हेक्टेयर से घटकर केवल 2 हेक्टेयर रह गया है।
हालांकि ग्लेशियर कहलाने के लिए बर्फ के किसी मैदान के आकार का कोई वैश्विक मानक नहीं है फिर भी ऐसा माना जाता है कि यदि कोई बर्फ का टुकड़ा 10 हेक्टेयर या उससे अधिक माप का होता है तो उसे ग्लेशियर मान लिया जाता है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक वेनेजुएला के बाद अब इंडोनेशिया, मैक्सिको और स्लोवेनिया से ग्लेशियर खत्म होने का खतर मंडरा रहा है। दुनिया हाल ही में अल नीनो जलवायु घटना का अनुभव कर रही है, जिसके कारण तापमान बढ़ जाता है और विशेषज्ञों का कहना है कि उष्णकटिबंधीय ग्लेशियरों के नष्ट होने की गति तेज हो सकती है।
वैज्ञानिकों ने कहा कि वेनेजुएला इस बात का दर्पण है कि उत्तर से दक्षिण तक क्या अंजाम होने वाला है। इसकी शुरुआत पहले कोलंबिया से होगी और फिर इक्वाडोर में, फिर पेरू और बोलीविया में ग्लेशियर एंडीज़ से पीछे हटते रहेंगे।
नवीनतम अनुमानों से पता चलता है कि वैश्विक स्तर पर 20 से 80 फीसदी ग्लेशियर 2100 तक नष्ट हो जाएंगे। इससे समुद्र के स्तर में 4.5 इंच की वृद्धि होगी, जिससे कई द्वीप समंदर में डूब जाएंगे।
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