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कोरोना काल में सिगरेट तस्करों की चांदी, गोल्ड तस्करी से ज्यादा मुनाफा, दुबई और म्यांमार में बने बेस कैंप

कोरोना काल में सोने की तस्करी से ज्यादा सिगरेट की तस्करी में मुनाफा हो रहा है। कस्टम की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है।

नई दिल्ली, अप्रैल 21: कोरोना वायरस की वजह से पूरी दुनिया में प्रतिबंध लगा हुआ है ऐसे में आपको जानकर हैरानी होगी कि नशीले पदार्थों की तस्करी काफी ज्यादा बढ़ गई है। कोरोना काल में भारत में सबसे ज्यादा नशीले पदार्थों की तस्करी की जा रही है और स्मगलर्स सबसे ज्यादा पैसा सिगरेट की तस्करी से कमा रहे हैं। खुलासा हुआ है कि स्मगलर्स ने भारत में तस्करी के लिए दो बड़े ठिकाने बनाए हैं। पहला ठिकाना तम्मु (म्यांमार) में बनाया गया है तो दूसरा ठिकाना दुबई है। बड़े बड़े अंतर्राष्ट्रीय स्मगलर्स के लिए ये दोनों जगह बेस कैंप बन गये हैं खासकर भारत में तस्करी के लिए। इन दोनों जगहों से भारत में बड़े बड़े ब्रांड्स के सिगरेट्स की तस्करी की जा रही है। रिपोर्ट में पता चला है कि तस्करों को सिगरेट्स की स्मगलिंग में काफी ज्यादा मुनाफा हो रहा है और ये मुनाफा सोने की तस्करी से भी ज्यादा है।ट

मलेशिया-इंडोनेशिया में नकली फैक्ट्रियां

मलेशिया-इंडोनेशिया में नकली फैक्ट्रियां

टीवी चैनल WION ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि मलेशिया और इंडोनेशिया में बड़े पैमाने पर भारतीय ब्रांड की सिगरेट्स की अवैध फैक्ट्रियां चलाई जा रही हैं। भारतीय एजेसियों ने म्यांमार स्थिति क्राइम सिंडिकेट का फांडाफोड़ किया है, जहां से विदेश ब्रांड्स की सिगरेट्स की भारत में तस्करी की जा रही थी। तस्करों के पास से कई ट्रकों में सिगरेट्स मिले हैं, जिनमें बड़े बड़े ब्रांड्स जैसे मार्लबोरो, 555 और इज सिगरेट्स शामिल हैं। भारतीय एजेंसियों ने करोड़ों रुपयों के सिगरेट्स बरामद किए गये हैं। आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक कस्टम कमिश्नर वीपी शुक्ला ने बताया है कि उनकी टीम ने दो ट्रक अवैध सिगरेट्स बरामद किए हैं, जिसकी सप्लाई उत्तर प्रदेश और नागालैंड में होने वाली थी। कस्टम कमिश्नर ने कहा है कि 'ये एक संवेदनशील इनवेस्टिगेशन है, जिसपर अभी मैं ज्यादा कॉमेंट नहीं करना चाहता हूं'। कस्टम कमिश्नर 1993 बैच के आईआरएस अधिकारी हैं, जिन्होंने भारत में कई स्मगलिंग ठिकानों का भांडाफोड़ किया है।

मुनाफे का सौदा सिगरेट तस्करी

मुनाफे का सौदा सिगरेट तस्करी

डीआरआई यानि डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस के पूर्व डायरेक्टर डीपी दास ने खुलासा किया है कि सिगरेट्स की तस्करी स्मगलरों के लिए भारी मुनाफे का सौदा साबित हो रहा है। सिगरेट की तस्करी से होने वाला मुनाफा सोने और ड्रग्स की तस्करी से भी ज्यादा है। उन्होंने कहा कि अवैध तरीके से सिगरेट्स बनाने में काफी कम प्रोडक्शन खर्च आता है और इसकी बिक्री ऊंचे दामों पर होती है और तस्करी करने पर टैक्स भी नहीं लगता है। लिहाजा इसकी तस्करी से तस्करों को काफी ज्यादा मुनाफा होता है। वहीं, डीपी दास ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस को बताया है कि सिगरेट की तस्करी में कानूनी कार्रवाई का भी काफी कम डर होता है। उन्होंने कहा कि अगर कोई शख्स सोने की तस्करी करता है तो पकड़े जाने का डर काफी ज्यादा होता है और पकड़े जाने पर सजा भी काफी ज्यादा होती है। वहीं ड्रग्स की तस्करी में पकड़े जाने का डर तो ज्यादा है ही साथ ही सजा भी काफी खतरनाक मिलती है, ऐसे में अगर कोई तस्कर सिगरेट की तस्करी करता है तो उसपर मादक पदार्थों की तस्करी का मुकदमा नहीं चलता है, लिहाजा सिगरेट तस्करी में रिस्क काफी कम होता है।

50 अरब डॉलर से ज्यादा टैक्स का नुकसान

50 अरब डॉलर से ज्यादा टैक्स का नुकसान

डीआरआई यानि डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस के पूर्व डायरेक्टर डीपी दास ने खुलासा किया है है कि सिगरेट की स्मगलिंग की वजह से पूरी दुनिया को 50 अरब डॉलर से ज्यादा टैक्स का नुकसान होता है और इसका भारत पर भी असर हो रहा है। भारत को भी सिगरेट की स्मगलिंग की वजह से टैक्स का काफी नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि चूंकी भारत में सिगरेट्स कन्ज्यूम करने वाले ज्यादा लोग हैं, लिहाजा तस्करों ने अपना मार्केट भारत को बना लिया है।

कोरोना काल में सिगरेट तस्करी

कोरोना काल में सिगरेट तस्करी

आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक साल से ज्यादा वक्त से पूरी दुनिया में कोरोना महामारी फैली हुई है और ऐसे वक्त में सोने की तस्करी काफी कम हो गई है मगर तस्करों ने सिगरेट्स की तस्करी करना काफी ज्यादा शुरू कर दिया है। कस्टम ऑफिस के एक अधिकारी के मुताबिक 'कोरोना वायरस के दौर में लोगों के पास पैसों की कमी हो गई है लिहाजा लोग सोने में इन्वेस्ट करना काफी कम कर चुके हैं लेकिन जो सिगरेट पीते हैं, उनके लिए सिगरेट पीना छोड़ना आसान नहीं है। वहीं, कोरोना वायरस की वजह से अलग अलग हिस्सों में लॉकडाउन और नाइट कर्फ्यू या फिर अलग अलग पाबंदियां लगने की वजग से ज्यादातर समय पान की दुकाने भी बंद रहती हैं, लिहाजा लोग ज्यादा पैसे खर्च कर भी सिगरेट खरीद रहे हैं और तस्करों की चांदी हो रही है'।

दिल्ली, मुंबई और बड़े शहरों में तस्करी

दिल्ली, मुंबई और बड़े शहरों में तस्करी

कस्टम की रिपोर्ट के मुताबिक जब लखनऊ से गुजर रहे नागालैंड नंबर एक ट्रक को रोका गया तो उसमें से 2 करोड़ रुपये की विदेशी ब्रांड की सिगरेट बरामद की गई। जिसके बाद खुलासा हुआ है कि म्यांमार बॉर्डर के जरिए भारत में सिगरेट्स की तस्करी होती है और दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरू में सिगरेट की तस्करी की जाती है। कस्टम की रिपोर्ट में कहा गया है कि बेहद अनोखे अंदाज में तस्कर सिगरेट्स की तस्करी करते हैं और इसका चेन अब दिल्ली-एनसीआर, लखनऊ और हरियाणा तक बन गया है। लिहाजा अब पुलिस के लिए तस्करों के इस चेन को तोड़ना और तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें सजा दिलाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

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