चिप से लेकर AI इंडस्ट्री तक में भारत की तेज छलांग, US के साथ मिलकर चीन का दबदबा खत्म करने की तैयारी

G20 समिट से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई। इस बातचीत में उन्होंने मजबूत वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चैन बनाने पर अपने समर्थन को दोहराया।

भारत ने अमेरिका के 'रिप एंड रिप्लेस' पायलट प्रोजेक्ट का भी समर्थन किया, जिसका लक्ष्य अमेरिकी कंपनियों को चीनी कंपनियों हुआवेई और जेडटीई द्वारा बनाए गए दूरसंचार उपकरणों को हतोत्साहित करना है। यह एक संकेत है कि कैसे दोनों देशों की चीन से दूरी बढ़ती जा रही है।

India and US work on tech projects

भारत ने इसे अपने 5G लॉन्च के हिस्से के रूप में पहले ही लागू कर रखा है। भारत ने चीनी कंपनियों हुआवेई और जेडटीई को बैन कर दिया है। इन कंपनियों को ब्लॉक करने के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा के मुख्य कारण बताया गया।

शुक्रवार को भारत और अमेरिका द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों नेता यूएस रिप एंड रिप्लेस कार्यक्रम में भारतीय कंपनियों की भागीदारी के लिए तत्पर हैं। इसमें कहा गया है कि दोनों नेताओं ने जून 2023 में अमेरिकी कंपनियों माइक्रॉन, LAM रिसर्च और अप्लाइड मैटेरियल्स की तरफ से किए गए ऐलान के क्रियान्वयन पर संतोष जताया है।

आपको बता दें कि देर से इस इंडस्ट्री में एंट्री करने के बावजूद, मोदी सरकार चिप मेकिंग सेंटर के रूप में अपनी साख स्थापित करने के लिए निवेश को खूब प्रोत्साहित कर रही है।

मेमोरी बनाने वाली अमेरिकी कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी ने गुजरात में एक सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग यूनिट स्थापित करने के लिए 825 मिलियन डॉलर यानी करीब सात हजार करोड़ रुपये के निवेश का वादा किया है।

जानकारी के मुताबिक इस प्लांट पर कुल 2.75 अरब डॉलर की लागत आएगी। बाकी धनराशि केंद्र और राज्य सरकार से उपलब्ध करायी जाएगी। यह पता चला है कि गुजरात में इस प्लांट का निर्माण जल्द ही शुरू हो जाएगा। अगले साल के अंत तक इसकी असेंबली लाइनों से पहली चिप्स निकलने की उम्मीद है।

माइक्रोचिप टेक्नोलॉजी ने पहले भारत में अपने परिचालन का विस्तार करने के लिए अगले कुछ वर्षों के लिए 300 मिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा की थी, जिसमें हैदराबाद में एक नई अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) सुविधा खोलना शामिल है।

अमेरिकी चिप मेकर एडवांस्ड माइक्रो डिवाइसेज (AMD) ने कहा कि वह अगले पांच सालों में भारत में लगभग 400 मिलियन डॉलर का निवेश करेगी और बेंगलुरु के टेक हब में अपना सबसे बड़ा डिजाइन सेंटर बनाएगी।

लैम रिसर्च ने अपने सेमीवर्स सॉल्यूशन वर्चुअल फैब्रिकेशन प्लेटफॉर्म के माध्यम से दस सालों में 60,000 भारतीय इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने की योजना बनाई है। वहीं, एप्लाइड मटेरियल्स ने भारत में एक सहयोगी इंजीनियरिंग केंद्र स्थापित करने के लिए 400 मिलियन डॉलर के प्रस्तावित निवेश की घोषणा की है।

शुक्रवार को दिए साझा बयान में प्रधानमंत्री मोदी और बाइडेन ने दोनों नेताओं ने स्पेस और AI के विस्तार में सहयोग के माध्यम से भारत-अमेरिका की रक्षा साझेदारी को बढ़ाने और विविधतापूर्ण बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है।

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