हजारों साल पहले चांद पर मौजूद थे एक्टिव ज्वालामुखी, 45 वर्ष बाद पृथ्वी पर लाए गए सैंपल से हुआ खुलासा
बीजिंग, 10 अक्टूबर। हमारी पृथ्वी करोड़ों साल पहले आग का गोला थी और यह धीरे-धीरे ठंडी होती गई। हालांकि आज भी पृथ्वी का गर्भ धधक रहा है जिसकी वजह से कई जगह सक्रिय ज्वालामुखी भी मौजूद हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज के समय शांत सा दिखने वाला हमारा चांद भी कभी आग का गोला हुआ करता था। चांद पर भी कई ज्वालामुखी थे जो लगातार फटते रहते थे और कई आज भी सक्रिय हो सकते हैं।

चीनी वैज्ञानिकों ने खोले चांद के राज
हाल ही में चीन द्वारा की गई एक रिसर्च में चांद को लेकर कई चौकाने वाली बातें सामने आई हैं। चीन के वैज्ञानिकों द्वारा चांद पर मौजूद ठोस लावा के कुछ अवशेष पृथ्वी पर लाए गए हैं, जो अमेरिका और सोवियत संघ के मिशन के दौरान लाए गए अवशेषों से उम्र में 1 वर्ष छोटे हैं। साइंस जर्नल में छपे एक लेख में वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया कि जितना सोचा गया था चांद उसके बाद ठंडा हुआ है।

चांद पर जहां कोई नहीं पहुंचा, वहां गया चीन
बता दें कि अमेरिका और सोवियत मिशनों से वापस लाए गए नमूने 2.9 अरब वर्ष से अधिक पुराने थे। पिछले साल के अंत में चीन द्वारा चलाए गए चांग'ए-5 लैंडर मिशन के तहत चांद से कुछ पत्थर के अवशेष पृथ्वी पर लाए गए। यह अवशेष चांद पर ऐसी जगह से लाए गए जहां आज तक कोई इंसान या मशीन नहीं पहुंचा था।

चांद पर मौजूद थे सक्रिय ज्वालामुखी
चीन द्वारा लाए गए नमूने लगभग 1.96 बिलियन वर्ष पुराने हैं जिससे पता चला है कि चांद पर ज्वालामुखी गतिविधि पहले की अपेक्षा अधिक समय तक बनी रही। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल दिसंबर में चीन ने एक ऑटोमेटिक मशीन को चांद के विशाल लावा मैदान ओशनस प्रोसेलरम में भेजा। इस जगह को 'ओशन्स ऑफ स्टॉर्म' भी कहा जाता है जहां आज तक ना मशीन पहुंचा था ना इंसान।
Recommended Video

चांद से 1731 ग्राम नमूने लेकर आया चीन
चीन ने यहां से लगभग 1731 ग्राम नमूने उठाए और पृथ्वी पर ले आया। इन अवशेषों से चीनी वैज्ञानिकों को चांद पर ज्वालामुखी गतिविधियों के बार में अहम जानकारी मिली है। पौराणिक चीनी देवी के नाम पर चलाए गए चांग'ए-5 मिशन का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि चांद पर कितने समय तक ज्वालामुखी सक्रिय रहे।

चांद पर मौजूद हैं रेडियो एक्टिव तत्व
ब्रिटेन के मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के एक ग्रह वैज्ञानिक कैथरीन जॉय ने कहा, 'यह चंद्रमा से अब तक का सबसे कम उम्र का लावा प्रवाह है। चीनी शोधकर्ताओं द्वारा लिखे आर्टिकल में बताया गया कि चंद्रमा के ओशनस प्रोसेलरम क्षेत्र में पोटेशियम, थोरियम और यूरेनियम सबसे अधिक हैं। ये ऐसे तत्व हैं जो समय तक रेडियो एक्टिव होते हुए गर्मी पैदा करते हैं।

दुनिया का तीसरा देश बना चीन
रिपोर्ट के मुताबिक चीन द्वारा भेजे गए लैडर ने चंद्रमा की सतह पर 100 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान का भी सामना किया। बता दें कि नासा के अपोलो अंतरिक्ष यात्रियों या सोवियत संघ के मानव रहित लूना मिशन के करीब 45 साल बाद चंद्रमा से कोई नमूना पृथ्वी पर आया है। इसके साथ ही चीन चांद से अवशेष लाने वाला तीसरा देश भी बन गया है। अगले पांच सालों में चांद के दक्षिणी ध्रुव का पता लगाने के लिए चीन अपने चांग'ई -6 और चांग'ए -7 चंद्र मिशन शुरू करने की योजना बना रहा है।
यह भी पढ़ें: वैज्ञानिकों ने देखा अब तक का सबसे अद्भुत नजारा, बृहस्पति जैसे ग्रह के पास बन रहा है नया चांद











Click it and Unblock the Notifications