बायकॉट से बौखलाया चीन, ग्लोबल टाइम ने लिखा 'जलाओ गाय के गोबर के दीए'
बीजिंग। दिवाली के लिए केवल एक सप्ताह का समय शेष बचा है। चीन और भारत के बीच चल रहे सीमा तनाव के चलते भारतीय बाजार में चीनी लैंप और सजावटी वस्तुओं की मांग में स्पष्ट गिरावट देखी गई है। कहीं-कहीं तो ये नदारद हैं। भारत द्वारा चीनी सामान के बॉयकाट से बौखलाए चीनी सरकार के मुखपत्र कहे जाने वाले ग्लोबल टाइम ने लिखा है कि, क्या गाय के गोबर से बने दीयों से भारत में ज्यादा अच्छी दिवाली मनेगी? एक तरह से ग्लोबल टाइम्स ने अपनी भड़ास इस लेख के जरिए निकाली है।

बायकॉट से भारत का अधिक नुकसान: चीन
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि, भारत-चीन के संबंध इस साल बुरे दौर से गुजर रहे हैं और इस बात को आसानी से समझा जा सकता है कि हर बार की तुलना में इस बार चीन के सामान का ज्यादा बड़े पैमाने पर बहिष्कार हो रहा है। पेपर लिखता है कि, इससे चीनी कारोबारियों को नुकसान होगा, लेकिन इससे ज्यादा भारतीयों भी नुकसान होगा। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि इससे गरीब भारतीयों के लिए दिवाली मनाना मुश्किल हो जाएगा। ग्लोबल टाइम्स ने भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स का जिक्र करते हुए लिखा कि, इस दिवाली सीजन में जयपुर के व्यापारियों ने चीनी लाइट्स और साजो-सामान की वस्तुएं नहीं बेचने का फैसला किया है। साथ ही, भारतीय उपभोक्ता भी भारत में बने सामान पर ज्यादा पैसा खर्च करने के लिए भी तैयार हैं।

चीन को करीब 400 अरब रुपये तक का नुकसान
पेपर आगे लिखता है कि, कुछ भारतीय अखबारों ने ये भी दावा किया है कि चीनी उत्पादों का बहिष्कार करने से चीन को करीब 400 अरब रुपये तक का नुकसान हो सकता है। पेपर ने लिखा कि, चीन की कुछ वस्तुओं के निर्यात पैमाने पर ये सोच दिखाती है कि चीन के निर्यात की ताकत को लेकर भारतीयों की समझ कितनी कम है। भारत में दिवाली एक प्रमुख त्योहार है लेकिन चीन के छोटी वस्तुओं के निर्यात में भारत की हिस्सेदारी बहुत कम है। चीन का झेजियांग प्रांत दुनिया का स्मॉल कमोडिटी का सबसे बड़ा हब है और क्रिसमस की तुलना में दिवाली में व्यापार का स्तर कुछ भी नहीं है।

इस साल की दिवाली पर चीन के उत्पाद कम देखने को मिलेंगे
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, महामारी और चीन-भारत के संघर्ष के बाद कई चीनी कंपनियों ने नुकसान से बचने के लिए घरेलू बाजार और पड़ोसी देशों में अपना कारोबार शिफ्ट कर लिया था। जो कंपनियां भारत में कारोबार कर रही हैं, उन्होंने भी किसी भी तरह के जोखिम से बचने के लिए कई कदम उठाए हैं। भारत की व्यापार नीति या टैरिफ की वजह से कई कंपनियों ने एडवांस पेमेंट लिया है। इन सारे कारणों की वजह से इस साल की दिवाली पर चीन के उत्पाद कम देखने को मिलेंगे और भारतीय उपभोक्ता भी धीरे-धीरे इसके असर को महसूस करेंगे।

भारतीयों को पुराने जमाने के दीयों से ही काम चलाना होगा: ग्लोबल टाइम्स
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, अगर भारत चीनी सामानों को मेड-इन-इंडिया प्रोडक्ट से रिप्लेस करना चाहता है तो उसे आधुनिक उत्पाद बनाने पर मेहनत करनी चाहिए ना कि पुराने-जमाने के दीये इस्तेमाल करने पर जोर डालना चाहिए। अखबार ने तंज कसते हुए लिखा है कि चीन के आधुनिक उत्पादों के बहिष्कार की कीमत के तौर पर कई भारतीयों को पुराने जमाने के दीयों से ही काम चलाना होगा।












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