भारतीय क्षेत्र डेमचोक में चीनियों ने गाड़े तंबू, LAC पर गंभीर हो सकता है तनाव- बहुत बड़ा खुलासा

चीन ने भारतीय क्षेत्र डेमचोक में तंबू गाड़ दिए हैं और बार बार कहने के बाद भी तंबू हटाने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं।

नई दिल्ली, जुलाई 26: भारत-चीन विवाद के बीच एलएसी को लेकर बहुत बड़ा खुलासा हुआ है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक चीनियों ने भारतीय हिस्से डेमचोक में तंबू लगा लिए हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने भारत सरकार के बड़े अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि भारतीय क्षेत्र डेमचोक में चारडिंग नाला के पास चीनियों ने तंबू गाड़ दिए हैं और बार बार कहने के बाद भी चीनी उस हिस्से को खाली करने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। आपको बता दें कि डेमचोक वही क्षेत्र है, जहां करीब 20 दिन पहले चीन ने अपने सैनिकों को भेजा था। (सभी तस्वीर फाइल)

भारतीय क्षेत्र में घुसे चीनी

भारतीय क्षेत्र में घुसे चीनी

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय अधिकारियों ने डेमचोक में घुसे लोगों को 'सिविलियन' कहा है और कहा है कि उन लोगों को जगह खाली करने के लिए कहा गया, लेकिन पूरे इलाके में अभी भी उनकी मौजूदगी बरकरार है। आपको बता दें कि डेमचोक में पहले भी भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच संघर्ष हो चुका है। पहले भी चीन के सैनिक गाड़ियों के साथ भारतीय क्षेत्र में घुस चुके हैं। 2014 में जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत का दौरा किया था, उस वक्त भी चीन के सैनिक डेमचोक में घुस चुके थे और जब पीएम मोदी ने शी जिनपिंग से इसकी शिकायत की थी, उसके करीब एक हफ्ते के बाद चीन के सैनिकों ने डेमचोक इलाके को खाली किया था। लेकिन, इस बार कहा गया है कि चीन के सैनिक नहीं, बल्कि चीन के आम नागरिक डेमचोक में तंबू गाड़ चुके हैं।

डेमचोक में तनाव की स्थिति

डेमचोक में तनाव की स्थिति

आपको बता दें कि डेमचोक में पहले भी भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना हो चुका है। 1990 के दशक में इंडिया-चायना ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप्स (JWG) की बैठकों के दौरान दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए थे कि डेमचोक और ट्रिग हाइट्स वास्तविक नियंत्रण रेखा पर विवादित बिंदु हैं। जिसके बाद दोनों देशों के बीच नक्शों का आदान-प्रदान भी किया गया था। जिसके तहत एलएसी पर 10 अलग अलग क्षेत्रों को मान्यताएं दी गईं थीं। जिसमें समर लुंगपा, डेपसांग बुलगे, प्लाइंट 6556, चांग्लुंग नाला, कोंगका ला, पैंगोंग त्सो नॉर्थ बैंक, माउंट सजुन, स्पंगगुर, डचमेले और चुमार शामिल हैं। लेकिन, पिछले साल भारत और चीन के बीच जब पूर्वी लद्दाख में तनाव पढ़ गया तो इन 10 क्षेत्रों के अलावा पूर्वी लद्दाख में शामिल पांच और क्षेत्रों को भी इसमें शामिल कर लिया गया। अधिकारियों के मुताबिक इन नये पांच क्षेत्रों में गलवान घाटी में केएम120, श्योक सुला में पीपी-15 और पीपी17ए, रेचिन ला और रेजांग ला शामिल हैं।

कारलिग दिवस के बात बातचीत

कारलिग दिवस के बात बातचीत

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने सोमवार को कोर कमांडर-स्तर के 12वें दौर की बैठत के लिए प्रस्ताव रखा था, लेकिन भारत ने इस चर्चा को कुछ दिनों के लिए स्थगित करने को कहा। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने कहा कि 26 जुलाई को भारत 1999 के कारगिल युद्ध में पाकिस्तान पर जीत के उपलक्ष्य में कारगिल दिवस के रूप में मनाता है, लिहाजा चर्चा को कुछ दिनों के लिए स्थगित करने के लिए कहा गया। सूत्रों ने कहा कि कोर कमांडर स्तर की वार्ता अब अगस्त के पहले हफ्ते में या शायद उससे आगे होने की संभावना है। इससे पहले दोनों देशों के बीच पिछली कोर कमांडर-स्तरीय वार्ता पूर्वी लद्दाख को लेकर अप्रैल महीने में हुई थी, जिसमें सेना को पीछे लेने को लेकर बातचीत की गई थी।

एलएसी पर क्या चाहता है भारत ?

एलएसी पर क्या चाहता है भारत ?

भारत सरकार के उच्च अधिकारियों के मुताबिक, चीन के साथ बातचीत इसलिए आगे नहीं बढ़ पा रही है क्योंकि भारत चाहता है कि जितने भी विवादित प्वाइंट्स हैं, उन सभी जगहों से चीनी सैनिकों को बाहर किा जाए और सभी विवादित प्वाइंट्स को मुक्त करवाया जाए। वहीं चीन चाहता है कि सेनाएं पीछे हटें और जो अतिरिक्स सेनाओं को बुलाया गया है, उन्हें वापस किया जाए। एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक फिलहाल स्थिति स्थिर है और अभी तक स्थिति '2019 लेवल' तक नहीं पहुंची है। भारतीय अधिकारी ने कहा है कि ''मौजूदा स्थिति पिछले साल के मुकाबले कहीं ज्यादा बेहतर है''। भारतीय अधिकारी ने कहा कि ''फरवरी के बाद से चीन की तरह से ना कोई सीमा रेखा का उल्लंघन किया गया है और ना ही दोनों देशों की सेनाओं का आमना-सामना हुआ है।

एलएसी पर वर्तमान स्थिति

एलएसी पर वर्तमान स्थिति

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अधिकारी ने कहा कि दोनों देशों के सैनिक कहीं पर भी 'आमने-सामने' नहीं हैं और समस्या का समाधान इसलिए नहीं हो रहा है, क्योंकि हमने विश्वास खो दिया है और यही कारण है कि दोनों देशों के पास इस क्षेत्र में लगभग 50,000 सैनिक तैनात हैं। सूत्रों ने कहा कि, चीन पूर्वी लद्दाख में अपने सैनिकों की अदला-बदली कर रहा है, और "बहुत तेज गति से सैन्य बुनियादी ढांचे" का विकास कर रहा है। जिसमें चीन ने एलएसी पर कई विध्वंसक हथियार तैनात किए हैं। सूत्रों ने कहा कि अपने गहराई वाले क्षेत्रों में चीनी सैनिकों के लगभग चार डिवीजन G219 राजमार्ग के साथ तैनात हैं, जो अक्साई चिन से होकर गुजरता है और जो अशांत शिनजियांग और तिब्बत प्रांतों को जोड़ता है।

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