Chinese Dominance: क्या है 'पगासा आईलैंड' जहां रहते हैं सिर्फ 300 लोग। चीन करने लगा है कब्जा!
Chinese Dominance: समुद्र में चीन के बढ़ते दखल से पूरी दुनिया के देश परेशान हैं, चीन द्वारा ताइवान की संप्रभुता के खिलाफ तो जो कदम उठाए जा रहे हैं उनका कोई हिसाब ही नहीं है। इसके अलावा हालात ये हो गए हैं कि अमेरिका को ऑस्ट्रेलिया में अपने हथियार तैनात करने पड़ रहे हैं। भारत के लिए भी चीन का रवैया एक बड़ा सिरदर्द बना हुआ है, चूंकि हम सीधा बॉर्डर साझा करते हैं तो यह और ज्यादा गंभीर हो जाता है। लेकिन भारत के अलावा भी कई सारे देश हैं जो इस देश से परेशान हैं, और इन्हीं में एक और नाम जुड़ रहा है फिलीपींस का।
300 लोगों का छोटा सा आइलैंड
दरअसल फिलीपींस का एक द्वीप है पगासा, कहने को यह छोटा सा द्वीप है लेकिन इसकी लोकेशन समुद्र में इतनी ज्यादा रणनीतिक है कि अब चीन इस पर भी आंख गड़ाने लगा है। 37 हेक्टेयर के अपने मामूली आकार और चुनौतीपूर्ण जीवन जीने के तरीकों के बावजूद, पगासा में लगभग 300 लोग रहते हैं। ये लोग जिंदा रहने के लिए मछली पकड़ने और सीमित खेती-बाड़ी पर निर्भर हैं, जिसमें रेत पर उगाई जा सकने वाली सब्जियां ही हो पाती हैं। लेकिन अब इसके आस-पास के समुंदर में चीनी जहाजों की मौजूदगी से उनका जीवन तेजी से परेशानी भरा हो रहा है।

छोटे देशों को निशाना बना रहा चीन
पिछले एक दशक में साउथ चाइना सी में चीन के आक्रामक विस्तार ने इस तनाव को बढ़ा दिया है। चीन ने जलमग्न कोरल रीफ्स (कैल्शियम कार्बोनेट से बने जीवों) पर कब्ज़ा करके और बड़े हवाई अड्डों का निर्माण करने में लगा है। अब सैकड़ों चीनी जहाज इन समुद्री क्षेत्रों में देखे जा रहे हैं, और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर अपना अधिकार भी जताने लगे हैं। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में से केवल वियतनाम और फिलीपींस ने ही चीन के खिलाफ मुखर होकर कार्रवाई की है। चूंकि, दोनों देेशों की सेनाएं चीन की तुलना में बहुत छोटी सी हैं इसलिए कोई खास असर होता नहीं दिख रहा।
क्या कहता है अंतर्राष्ट्रीय कानून?
पगासा फिलीपींस के लिए बहुत महत्व रखता है क्योंकि यह आंशिक रूप से डूबी हुई चट्टानों से अलग एक ठोस जमीन है। जिस पर हवाई अड्डे जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने में आसानी होगी। फिलीपींस राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के जोनाथन मलाया ने बीबीसी को दिए अपने इंटरव्यू में बताया कि पगासा द्वीप पर एक रनवे है जो यहां के लोगों को जीवन जीने में सहारा देता है। यहां फिलीपिनो समुदाय के लोग रहते हैं जिसमें से ज्यादातर मछुआरे ही हैं। इसके अलावा द्वीप का आकार ऐसा है कि यह समुद्र में नहीं डूब सकता। इसके अलावा यह फिलीपींस के क्वेजों से 12 नॉटिकल माइल्स के अंदर की दूरी पर स्थित है तो अंतर्राष्ट्रीय कानून के हिसाब से अगासा द्वीप फिलीपींस का ही कहा जाता है।
पगासा पहुंचने में लगते हैं 2-3 दिन
पलावन द्वीप से पगासा पहुंचने में नाव से दो से तीन दिन या हवाई जहाज से एक घंटा लगता है। हालांकि, दोनों मार्गों पर अक्सर मौसम संबंधी व्यवधान आते रहते हैं। हाल ही तक, रनवे की सीमाओं के कारण केवल छोटे विमान ही उतर सकते थे। अब, सी-130 जैसे बड़े विमान भी द्वीप तक पहुंच सकते हैं, हालांकि इनमें यात्रा करना सरकारी बसों में यात्रा करने जैसा ही होता है।
मछली पकड़ने से रोकते हैं चीनी जहाज
पगासा में जीवन पहले से ही बहुत मुश्किल है। यहां के लोग भोजन और बाकी ज़रूरतों के लिए बाहरी सहायता पर बहुत ज़्यादा निर्भर हैं। शिक्षिका रीलिन लिम्बो द्वीप को शांतिपूर्ण बताती हैं, लेकिन बहुत कम मेडीकल फेसिलिटी जैसी चुनौतियों को स्वीकार करती हैं। पगासा में कई लोगों के लिए मछली पकड़ना प्राथमिक आजीविका है। फिर भी, चीनी जहाजों ने इसे और भी मुश्किल बना दिया है। मछुआरे लैरी ह्यूगो ने बड़े चीनी जहाजों से टक्कर ले चुके हैं जिसमें उनकी एक लकड़ी की मामूली नाव को चीनी जहाज ने टक्कर मार दी थी, जिसके बाद वे चर्चा में आ गए थे।
पगासा का इतिहास
1971 में तूफ़ान के दौरान ताइवान के पीछे हटने के बाद 1978 में फिलीपींस ने औपचारिक रूप से पगासा पर कब्ज़ा कर लिया। तब से, कठोर परिस्थितियों के बावजूद यहां लोगों की बसाहट को फिलीपींस की सरकार ने जारी रखा और उसके लिए लोगों तक सुविधाएं पहुंचाना शुरू किया। वो बात अलग है कि, बिजली और मोबाइल कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाएं सिर्फ़ चार साल पहले ही आई हैं। चीनी जहाजों ने यहां के मूलनिवासियों को एक सीमित इलाके तक मछली पकड़ने के लिए मजबूर कर दिया है। इससे बाहर जाने पर उनके साथ झड़प हो जाती है। इसके अलावा यहां की हवाई पट्टी पर लैंड होने वाले प्लेन के पायलट को चीन से यह कहते हुए धमकी मिलती रहती है कि वे चीनी एयर स्पेस में घुस रहे हैं। इन सभी कारणों के चलते और चीन के अतिक्रमण के खिलाफ फिलीपीन सरकार द्वारा हर सप्ताह राजनयिक विरोध दर्ज कराया जाता है जो अब बेअसर मालूम पड़ता है, क्योंकि पगासा के इलाके में अब चीन के जहाज बने ही रहत हैं।
राष्ट्रपति भी चीन के आगे झुके
दूसरी तरफ, फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते भी चीन के खिलाफ बोलने से बचते हैं। उसका कारण हैं कि उन्हें भी अपने देश को चलाने के लिए चीनी इन्वेस्टमेंट की जरूरत पड़ती है। अगर विरोध ज्यादा हुआ तो ये इन्वेस्टमेंट किसी भी दिन बंद हो सकता है। लिहाजा मुश्किलें और चीन की समुद्र में तानाशाही हर पल बढ़ रही है जिसका अभी कोई ठोस इलाज नजर नहीं आता।
आपकी इस मामले पर क्या राय है, हमें कॉमेंट में बताएं।
-
Gold Silver Price Today: सोना चांदी धड़ाम, सिल्वर 15,000 और गोल्ड 4000 रुपये सस्ता, अब इतनी रह गई कीमत -
Khamenei Last Photo: मौत से चंद मिनट पहले क्या कर रहे थे खामनेई? मिसाइल अटैक से पहले की तस्वीर आई सामने -
38 साल की फेमस एक्ट्रेस को नहीं मिल रहा काम, बेच रहीं 'ऐसी' Photos-Videos, Ex-विधायक की बेटी का हुआ ऐसा हाल -
Uttar Pradesh Petrol-Diesel Price: Excise Duty कटौती से आज पेट्रोल-डीजल के दाम क्या? 60 शहरों की रेट-List -
KBC वाली तहसीलदार गिरफ्तार, कहां और कैसे किया 2.5 करोड़ का घोटाला? अब खाएंगी जेल की हवा -
Lockdown का PM मोदी ने क्या सच में ऐलान किया? संकट में भारत? फिर से घरों में कैद होना होगा?- Fact Check -
साथ की पढ़ाई, साथ बने SDM अब नहीं मिट पा रही 15 किलोमीटर की दूरी! शादी के बाद ऐसा क्या हुआ कि बिखर गया रिश्ता? -
Kal Ka Mausam: Delhi-Noida में कल तेज बारिश? 20 राज्यों में 48 घंटे आंधी-तूफान, कहां ओलावृष्टि का IMD अलर्ट? -
27 की उम्र में सांसद, अब बालेन सरकार में कानून मंत्री, कौन हैं सोबिता गौतम, क्यों हुईं वायरल? -
'मेरा पानी महंगा है, सबको नहीं मिलेगा', ये क्या बोल गईं Bhumi Pednekar? लोगों ने बनाया ऐसा मजाक -
Gajakesari Yoga on Ram Navami 2026: इन 4 राशियों की बदलेगी किस्मत, पैसा-सम्मान सब मिलेगा -
IPS Success Love Story: एसपी कृष्ण ने अंशिका को पहनाई प्यार की 'रिंग', कब है शादी? कहां हुई थी पहली मुलाकात?












Click it and Unblock the Notifications