एक सुपरहिट एक्शन फिल्म से प्रेरित है चीनी की ‘वुल्फ वॉरियर्स डिप्लोमेसी’, भारत के लिए बहुत बड़ा खतरा

नई दिल्ली। भारतीय सीमा का बार-बार अतिक्रमण करनेवाला चीन अब भले बातचीत की वकालत कर रहा हो लेकिन वह भरोसे के काबिल नहीं। ऐसा इस लिए क्यों कि 'वुल्फ वॉरियर्स डिप्लोमेसी’ ने चीन टीठ और खतरनाक बना दिया है। उसकी दिखावटी उदारता किसी बड़े प्रहार की तैयारी है। क्या है 'वुल्फ वॉरियर्स डिप्लोमेसी’ और इससे भारत को क्या खतरा है ? 'वुल्फ वॉरियर्स डिप्लोमेसी’ चीन की मेगाहिट एक्शन फिल्म 'वुल्फ वारियर्स’ पर आधारित है। इस फिल्म की टैगलाइन थी- अगर एक हजार मील दूर बैठा भी कोई चीन का अपमान करेगा तो वह जरूर नतीजा भोगेगा। ऐसा बहुत कम होता है कि कोई फिल्मी कंटेंट किसी देश की डिसीजन मेकिंग को प्रभावित करे। लेकिन उग्र राष्ट्रवाद पर आधारित फिल्म 'वुल्फ वारियर्स’ सीरीज ऐसी सुपर हिट हुई कि जनता और सरकार का नजरिया ही बदल गया। चीन को महाशक्तिमान के रूप में देखा जाने लगा। उदारवादी विदेशनीति की जगह आक्रमक विदेशी नीति अपनाने पर जोर दिया जाने लगा। भारत के साथ सीमा विवाद और कोरोना विवाद के समय चीन खुल कर 'वुल्फ वॉरियर्स डिप्लोमेसी’ पर अमल कर रहा है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने रविवार को एक प्रेस वार्ता में कहा कि चीन का जानबूझ कर अपमान किया जा रहा है और अब वह इसका जोरदार प्रतिकार करेगा। चीनी विदेश मंत्री ने हालांकि के ये बात कोरोना विवाद के संदर्भ में कही, लेकिन इससे भारत को भी संकेत समझ जाना चाहिए।

फिल्म ‘वुल्फ वॉरियर्स' का प्लॉट

फिल्म ‘वुल्फ वॉरियर्स' का प्लॉट

‘वुल्फ वारियर्स' चीनी देशभक्ति पर आधारित एक एक्शन फिल्म है जो 2015 में रिलीज हुई थी। फिल्म बेहद कामयाबी रही। 2017 में इसका सिक्वल ‘वुल्फ वारियर्स-2' आया। ‘वुल्फ वारियर्स-2' ने तो चीनी बॉक्सऑफिस पर तहलका मचा दिया। सबसे सफल चीनी फिल्म के तमगे के साथ इसने 5 हजार 94 करोड़ रुपये (765.6 मिलियन डॉलर) का कारोबार किया। भारत में कोई फिल्म तीन-चार सौ करोड़ का बिजनेस करती है तो तारीफों के पुल बांध दिये जाते हैं। लेकिन जिस फिल्म ने पांच हजार करोड़ का बिजनेस किया उसके असर का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस फिल्म का निर्देशन वु जिंग ने किया था और उन्होंने ही लीड रोल प्ले किया था। वु जिंग ने चीन के स्पेशल फोर्स के पूर्व सैनिक ली फेंग का किरदार निभाया है। ली फेंग एक सिक्रेट मिशन पर अफ्रीका जाता है। अफ्रीकी देशों को राहत पहुंचाने का काम सोमालियाई समुद्री लुटेरों से बाधित है। अफ्रीका के कई देशों में गृहयुद्ध की स्थिति है। यूरोप और अमेरिका विद्रोही गुटों को समर्थन दे रहे हैं। उस समय अफ्रीका में लामानला नामक एक संक्रामक बीमारी फैली हुई। डॉ. चेन नामक चीनी वैज्ञानिक अफ्रीका में ही इसका वैक्सीन तैयार करने में जुटे हैं। अमेरिकी माफिया ‘बिग डैडी' डॉ. चेन को मार कर वैक्सीन का फार्मूला लेना चाहता है। फैक्ट्री में काम कर रहे कई चीनी नागरिकों को बंधक बना लिया जाता है। चीन का जांबाज कमांडो ली फेंग हजारों मिल दूर अपनी ताकात से अफ्रीका में चीन के गौरव की रक्षा करता है। अमेरिकी माफिया बिग डैडी बेरहमी से मारा जाता है। कहानी का यह प्लॉट चीनी लोगों के दिलोदिमाग पर छा गया। इस फिल्म का संदेश था, चाहे कोई कितना भी दूर क्यों न हो, अगर वह चीन की तरफ आंख उठाने की जुर्रत करेगा, तो नष्ट हो जाएगा।

भारत पर ही इस डिप्लोमेसी का पहला प्रयोग

भारत पर ही इस डिप्लोमेसी का पहला प्रयोग

इस फिल्म के बाद चीन ने अपनी विदेश नीति को बेहद आक्रामक बना दिया। उसने विदेशी दूतावासों में वैसे राजनयिकों को तैनात किया जो देश से जुड़े मसलों पर बेहद आक्रामक रुख अख्तायार करने की योग्यता रखते हों। इन राजदूतों को इस बात की छूट दी गयी कि वे कड़े अल्फाजों में अपनी बात रखें। ऐसा करने में अगर राजनयिक मर्यादा टूटती भी है तो वे इसकी परवाह न करें। चीन के हित को सुरक्षित रखने के लिए वे मजबूती से पक्ष रखें। यानी चीन ने अपने राजनयिकों को ‘वुल्फ वारियर्स' के रूप में प्रमोट करना शुरू कर दिया। वुल्फ वारियर मतलब फुर्तिला और चालाक योद्धा। चीन की इसी नीति को वुल्फ वारियर्स डिप्लोमेसी कहा जाता है। इस नीति के बनते ही चीन ने सबसे पहले भारत पर ही इसे लागू किया। 2017 में जब डोकलाम में भारत-चीन सीमा विवाद चरम पर था तब दिल्ली स्थित चीनी राजदूत लू चाओहुई ने कहा था, इस विवाद को सुलझाने का एक तरीका युद्ध भी है। यानी चीनी राजदूत ने खुलेआम भारत को युद्ध की धमकी दी थी।

‘चीनी' की मिठास भरोसे लायक नहीं

‘चीनी' की मिठास भरोसे लायक नहीं

वुल्फ वॉरियर्स डिप्लोमेसी के तहत ही अब चीनी राजदूत दूसरे देशों के अंतरिक मामले में हस्तक्षेप करने लगे हैं। कोरोना संकट के समय पेरिस स्थिति चीनी दूतावास ने अपनी वेबसाइट पर लिख दिया था, फ्रांस ने अपने बुजुर्गों को कोरोना से मरने के लिए केयर होम्स में छोड़ दिया है। चीनी दूतावास की इस टिप्पणी पर फ्रांस में बवाल मच गया। चीनी राजदूत लु शाये को फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय बुलाया गया। राजनयिक मर्यादा तोड़ने के लिए लु को चेतावनी दी गयी। लेकिन हुआ क्या ? फ्रांस की तो मिट्टीपलीद हो गयी जब कि लु को थोड़ी नसीहत ही सुननी पड़ी। यानी चीन के राजदूत अब ढीठ हो गये हैं। चीनी रणनीति यही है कि गलती कर के भी मजबूती से डटे रहो। अपनी गलतियों के छिपाने के लिए तर्क गढ़ो और उसका समुचित प्रचार करो। मौजूदा सीमा विवाद पर चीन के दिल्ली स्थिति राजदूत सून वेईडोंग अब समझौते की भाषा बोलने लगे हैं। लेकिन चीन कई बार मीठी बातें बोल कर भारत के पीठ में खंजर भोंक चुका है। 2020 के पहले चार महीने में ही चीन 170 बार भारतीय सीमा का अतिक्रमण कर चुका है। 2019 में उसने पहले चार महीनों में 110 बार घुसपैठ की थी। इतना कुछ होने के बाद भी क्या चीन की मीठी बातों पर भरोसा किया जाना चाहिए ?

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