कोरोना वायरस को लेकर खोली थी सरकार की पोल, महिला पत्रकार को तड़पाकर मार रहे हैं शी जिनपिंग
वुहान में कोविड-19 कवरेज करने वाली महिला पत्रकार चीन की जेल में मौत के मुहाने पर पहुंच गई है।
बीजिंग, नवंबर 05: झांग झानो, उन चुनिंदा पत्रकारों में से हैं, जिन्होंने वुहान में कोरोना वायरस संक्रमण फैलने की खबर सबसे पहले बतौर नागरिक पत्रकार छापी थी और दुनिया को बताया था कि, चीन में एक वायरस फैला है, जो काफी खतरनाक है। लेकिन, चीन की सरकार की आलोचना करना मतलब, मौत को दावत देना है और झांग झानो के साथ भी यही हो रहा है। झांग झानो अब जेल में मौत के करीब पहुंच चुकी हैं और आशंका जताई जा रही है कि, जेल में बंद झांग झानो की जान जा सकती है।
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कोरोना वायरस पर रिपोर्ट
वुहान में कोविड ऑउटब्रेक होने के बाद झांग झानो उन शुरूआती पत्रकारों में से थीं, जो मौके पर पहुंची थी और कोविड-19 के खिलाफ चीन की प्रारंभिक प्रतिक्रिया का कवरेज किया था, लेकिन चीन में फ्री प्रेस जैसी कोई चीज नहीं है और नागरिकों के लिए आवाज उठाना प्रतिबंधित है, लिहाजा झांग झानो को जेल में बंद कर दिया और पिछले डेढ़ साल से ज्यादा वक्त से झांग झानो चीन की जेल में बंद हैं। लेकिन अब उन्होंने चीन की तानाशाह शी जिनपिंग सरकार के खिलाफ सत्याग्रह शुरू कर दिया है और उन्होंने चीन की जेल में भूख हड़ताल शुरू कर दिया, लेकिन अब रिपोर्ट आ रही है कि, भूख हड़ताल की वजह से झांग झानो की तबीयत काफी बिगड़ गई है और उनकी जान अब खतरे में पड़ चुकी है।

शी जिनपिंग की खोली थी पोल
कोविड रिस्पॉंस को लेकर चीन की सरकार की पोल खोलने के आरोप में जेल में बंद नागरिक पत्रकार झांग झानो भूख हड़ताल पर जाने के बाद मौत के करीब हैं और उसके परिवार ने उनकी तत्काल रिहाई की मांग कीहै और वैश्विक मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से उन्होंने झांग झानो की जिंदगी बचाने की गुहार लगाई है। झांग झानो चीन की एक पूर्व वकील हैं और उनकी उम्र 38 साल है, जिन्होंने फरवरी 2020 में वुहान की यात्रा की थी और अपने स्मार्ट फोन में चीनी अधिकारियों को लेकर कई सवाल उठाए थे। उन्होंने अपने वीडियो में बताया था कि, चीन की सरकार का इंतजाम कितना खराब है, लोगों को क्या तकलीफें हो रही हैं और वुहान में लोगों को कैसे जेल में बंद करके रखा गया है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में शी जिनपिंग की तानाशाही की पोल खोलकर रखी दी थी, लेकिन चीन की सरकार ने उनके एक भी वीडियो को चीन से बाहर नहीं जाने दिया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

मई में हुई थी गिरफ्तारी
झांग झानो को मई 2020 में फर्जी आरोपों में गिरफ्तार किया गया था और फिर उन्हें शांति भंग करने के आरोपों में चार साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। चीन में इस आरोप को सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों के खिलाफ धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जाता है और फिर उन्हें काफी सख्त सजा सुनाई जाती है, ताकि कोई और शख्स कम्यूनिस्ट पार्टी के खिलाफ आवाज नहीं उठा सके। इस बीच झांग झानो के परिवार ने कहा है कि, भूख हड़ताल की वजह से झांग झानो की तबीयत काफी बिगड़ गई और उनका वजन काफी गिर गया और इस स्थिति में उनका ज्यादा समय तक जिंदा रहना मुश्किल है। झांग झानो के भाई झांग जू ने पिछले हफ्ते एक ट्विटर अकाउंट पर इस मामले की पुष्टि की है।

जबरन दिया जा रहा खाना
रिपोर्ट के मुताबिक, झांग झानो पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और उन्हें नाक की नलियों के माध्यम से जबरन खाना खिलाया गया था, हालांकि उनकी कानूनी टीम ने इससे ज्यादा जानकारी उनके घरवालों को भी नहीं दी। उनके भाई ने लिखा है कि, इस हिसाब से ''वह आने वाली कड़ाके की सर्दी से नहीं बच पाएगी।" उन्होंने अपनी बहन से पत्रों में "अपना ख्याल रखने" का आग्रह किया है। झांग जू की पोस्ट ने उनकी बहन की रिहाई के लिए नए सिरे से मुहिम शुरू कर दी है और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने गुरुवार को चीनी सरकार से "उन्हें तुरंत रिहा करने का आग्रह किया ताकि वह अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर सके और उचित चिकित्सा प्राप्त कर सके जिसकी उसे सख्त जरूरत है"। एमनेस्टी के एक अधिकारी ग्वेन ली ने एक बयान में कहा कि झांग को हिरासत में लेना "मानवाधिकारों पर शर्मनाक हमला" था।

परिवार का आरोप
नागरिक पत्रकार झांग झानो के एक करीबी ने नाम ना बताने की शर्त पर कहा कि, तीन हफ्ते पहले परिवार ने सरकार से जेल में झांग झानो से मिलने की गुहार लगाई थी, लेकिन सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई। वहीं, समाचार एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, एपी झांग झानो के भाई झांग जू तक पहुंचने में कामयाब नहीं हो पाया, वहीं उनकी झांग झानो की मां ने इस पूरे मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं, शंघाई जेल प्रशासन की तरफ से जब समाचार एजेंसी एएफपी ने झांग झानो को लेकर जानकारी जाननी चाही, तो जेल प्रशासन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई। वहीं, रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) के अनुसार, झांग अब बिना मदद के न चल सकती हैं और न ही अपना सिर उठा सकती हैं।












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