Explained: क्या WHO को फिर मामू बना रहा चीन? कोरोना वायरस को लेकर इन पांच सवालों के अभी तक नहीं मिले हैं जवाब?
HMPV flu outbreak: चीन ने शुक्रवार को देश में फ्लू के बड़े पैमाने पर प्रकोप की खबरों पर एक बार फिर से पर्दा डालते हुए कहा, कि सर्दियों के दौरान होने वाली सांस की बीमारियों के मामले पिछले साल की तुलना में इस साल कम गंभीर हैं। विदेश मंत्रालय ने यहां तक कहा, कि विदेशियों के लिए चीन की यात्रा करना सुरक्षित है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने चीन में इन्फ्लूएंजा ए और अन्य श्वसन रोगों के प्रसार पर पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में कहा, कि "सांस संबंधित संक्रमण सर्दियों के मौसम में चरम पर होता है।" लेकिन, अब भारत में भी इस वायरस ने दस्तक दे दिया है और बेंगलुरू में इस वायरस से पॉजिटिव एक बच्चा मिला है, जिसने भारत में चिंताएं बढ़ा दी हैं।

लेकिन, सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में अस्पतालों में भीड़भाड़ दिख रही है। उन्होंने कहा, "बीमारियां पिछले साल की तुलना में कम गंभीर और कम पैमाने पर फैली हुई प्रतीत होती हैं।" चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा, कि "मैं आपको आश्वस्त कर सकती हूं, कि चीनी सरकार चीन में चीनी नागरिकों और विदेशियों के स्वास्थ्य की परवाह करती है। चीन में यात्रा करना सुरक्षित है।"
इसके अलावा, उन्होंने सर्दियों में सांस संबंधित रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के संबंध में चीन के राष्ट्रीय रोग नियंत्रण और रोकथाम प्रशासन की तरफ से जारी दिशा-निर्देशों का भी जिक्र किया। लेकिन, पिछले कुछ दिनों से चीन में बड़े पैमाने पर फ्लू के प्रकोप की खबरें विदेशों में, खासकर भारत और इंडोनेशिया में फैल रही हैं। हालांकि, स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है, कि यह प्रकोप सर्दियों के दौरान होने वाली एक सालाना और मौसमी घटना है, क्योंकि चीन में पिछले कुछ महीनों से कड़ाके की ठंड पड़ रही है।
लेकिन, कई सवाल हैं, जिनके जवाब चीन नहीं दे रहा है, जिससे यह सवाल उठने लगे हैं, कि क्या यह कोरोना वायरस का ही एक प्रकार है?
5 साल पहले आखिरी वुहान शहर में क्या हुआ था? (HMPV Flu Outbreak in China)
पांच साल पहले भी, चीन के वुहान में कई लोग अचानक बीमार पड़ गये थे, जो दुनिया में पहले कभी नहीं देखा गया था। उस वक्त उस वायरस का कोई नाम नहीं था और न ही यह पता था, कि इससे कौन सी बीमारी होगी। लेकिन चीन के झूठ ने एक महामारी को जन्म दिया, जिसने पूरी दुनिया में लाखों लोगों की जान ले ली। कई महीनों तक दुनिया लॉकडाउन में जीने को मजबूर रही और काफी मुश्किल से इस घातक वायरस को कंट्रोल किया गया।
लेकिन यह वायरस अभी भी हमारे साथ है, हालांकि टीकाकरण और संक्रमण को कंट्रोल किया है, लेकिन खतरे को कम करके या लापरवाह होकर नहीं आका जा सकता है। कोरोना वायरस, अब महामारी के शुरुआती दिनों की तुलना में कम घातक है और अब इससे इक्का-दुक्का मामलों को छोड़ दें, तो यह जान लेने वाला वायरस नहीं बचा है। लेकिन, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता, कि ये वायरस भी विकसित हो रहा है, जिसका मतलब है, कि वैज्ञानिकों को इस पर बारीकी से नजर रखनी होगी, लेकिन हमेशा की तरह चीन कोई सही जानकारी नहीं दे रहा है।
SARS-CoV-2 वायरस आखिर कहां से आया था?
इस सवाल का जवाब किसी के पास अभी भी नहीं है।
वैज्ञानिकों को लगता है, यह चमगादड़ों में निकला हो सकता है और फिर रैकून कुत्ते, सिवेट बिल्लियां या चूहों या फिर मछलियों के जरिए वुहान के बाजार तक पहुंचा होगा। जहां से ये नवंबर 2019 में इंसानों में फैला होगा। इस बीमारी के फैलने का यह एक चक्र हो सकता है और शायद SARS नामक एक समान वायरस की पहली महामारी को ट्रिगर करता है। लेकिन यह सिद्धांत COVID-19 का कारण बनने वाले वायरस के लिए सिद्ध नहीं हुआ है। वुहान में कई रिसर्च प्रयोगशालाएं हैं जो कोरोनावायरस को इकट्ठा करने और उसका स्टडी करने में शामिल हैं, जिससे इस बात पर बहस बढ़ रही है, कि क्या वायरस प्रयोगशाला से लीक हुआ हो सकता है?
वैज्ञानिकों का कहना है, की चीन ने कभी भी सही जांच नहीं होने दी और डेटा नहीं दिए, जिससे महामारी की असली उत्पत्ति की वजह कई सालों तक पता नहीं चल सकती है, या हो सकता है, कि कभी पता भी ना चले।
COVID-19 से कितने लोग मरे?
कोरोना वायपस के संक्रमण से संभवतः 2 करोड़ से ज्यादा लोग मरे। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है, कि सदस्य देशों ने COVID-19 से 70 लाख से ज्यादा मौतों की सूचना दी है, लेकिन वास्तविक मृत्यु दर कम से कम तीन गुना ज्यादा होने का अनुमान है। यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक, अमेरिका में पिछले एक साल में औसतन लगभग 900 लोग प्रति हफ्ते COVID-19 से मर चुके हैं।
कोरोना वायरस सबसे ज्यादा वृद्ध लोगों को प्रभावित कर रहा है। CDC के मुताबिक, अमेरिका में पिछली सर्दियों में, 75 वर्ष और उससे ज्यादा आयु के लोग देश के लगभग आधे COVID-19 अस्पताल में भर्ती होने वाले और अस्पताल में होने वाली मौतों के लिए जिम्मेदार थे। WHO के निदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने कहा, "हम अतीत में COVID के बारे में बात नहीं कर सकते, क्योंकि यह अभी भी हमारे साथ है।"
वहीं, चीन में कोरोना वायरस से कितने लोगों की मौत हुई, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक नहीं है।

कौन-कौन से टीके उपलब्ध कराए गए?
वैज्ञानिकों और वैक्सीन निर्माताओं ने कोविड-19 वैक्सीन विकसित करने में रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जिससे दुनिया भर में करोड़ों लोगों की जान बच गई है - और यह जीवन को सामान्य स्थिति में वापस लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम था। वायरस के फैलने के करीब एक साल के अंदर ही अमेरिका और ब्रिटेन के स्वास्थ्य अधिकारियों ने फाइजर और मॉडर्ना द्वारा बनाए गए टीकों को मंजूरी दे दी। कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने के लिए mRNA टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हुआ, और इस टेक्नोलॉजी को बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने सालों तक कड़ी मेहनत की थी।
आज, नोवावैक्स द्वारा बनाई गई एक ज्यादा पारंपरिक वैक्सीन भी मौजूद है, और कुछ देशों ने कई और विकल्प आजमाए हैं। गरीब देशों में रोलआउट धीमा था, लेकिन WHO का अनुमान है कि 2021 से दुनिया भर में कोविड-19 टीकों की 13 बिलियन से अधिक खुराकें दी गई हैं।
लेकिन, कोविड-19 वैक्सीन को लेकर कई सवाल अभी भी उठ रहे हैं, जिनके जवाब नहीं मिले हैं। सवाल टीकों के सुरक्षित होने को लेकर है। भारत में कई लोगों की मौत हार्ट अटैक से हुए हैं और उनमें कोविड वैक्सीन कितनी जिम्मेदार है, इसका पता नहीं चल पाया है।
कोरोना वायरस का कौन सा वेरिएंट अभी हावी है?
वायरस जब अपनी प्रतिलिपियां बनाते हैं, तो उसकी वजह से आनुवंशिक परिवर्तन यानि म्यूटेशन होते हैं और यह वायरस भी इससे अलग नहीं है। वैज्ञानिकों ने इन वेरिएंट का नाम ग्रीक अक्षरों के नाम पर रखा: अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा और ओमिक्रॉन। डेल्टा, जिसने जून 2021 में अमेरिका में तबाही मचाई थी, वो अभी तक सबसे खतरनाक वेरिएंट माना गया।
फिर नवंबर 2021 के अंत में, एक नया वेरिएंट सामने आया, ओमिक्रॉन। टेक्सास में ह्यूस्टन मेथोडिस्ट के पैथोलॉजिस्ट डॉ. वेस्ले लॉन्ग ने कहा, "यह बहुत तेजी से फैला और कुछ ही हफ्तों में दुनिया में फैल गया।" हालांकि, ओमिक्रॉन, डेल्टा की तरह जानलेवा नहीं था और उस वक्त तक टीके भी लगने शुरू हो गये थे।
CDC ने कहा, कि अमेरिका में अब प्रमुख ओमिक्रॉन परिवार को XEC कहा जाता है, जो 45% वेरिएंट के लिए जिम्मेदार है। मौजूदा COVID-19 दवाएं और नवीनतम वैक्सीन बूस्टर इसके खिलाफ प्रभावी होनी चाहिए यह वास्तव में पहले से प्रसारित होने वाले वेरिएंट का रीमिक्सिंग है।"
5 सालों के बाद हम कोविड के बारे में क्या जानते हैं?
कोविड-19 ने दुनिया में लाखों लोगों की जिंदगी में भूचाल लाया और करोड़ों लोगों को मानसिक आघात दिए। लाखों लोग महीनों तक कोविड वायरस से जूझते रहे और कोविड के कई रूप ने लोगों को परेशान किया। कोविड की वजह से लोगों को हृदय संबंधी और संज्ञानात्मक परेशानी जिसे "ब्रेन फ़ॉग" के रूप में जाना जाता है, वो हुए। लेकिन, डॉक्टरों को नहीं पता कि केवल कुछ लोगों को ही लॉन्ग कोविड क्यों होता है। यह हल्के मामले के बाद और किसी भी उम्र में भी हो सकता है, हालांकि महामारी के शुरुआती वर्षों से दरों में गिरावट आई है। अध्ययनों से पता चलता है कि टीकाकरण जोखिम को कम कर सकता है। फिर भी यह पष्ट नहीं है कि लॉन्ग कोविड का कारण क्या है। यानि, कोविड को लेकर 5 सालों के बाद भी सारी जानकारियां नहीं है, जो यकीनन कभी भी फिर से दुनिया को परेशान कर सकती है।












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