औंधे मुंह गिरी चीन की अर्थव्यवस्था, एक के बाद एक गायब होते अधिकारी... शी जिनपिंग का 'द ग्रेट वार गेम'
China News: चीन में इन दिनों जासूसी कानूनों को अत्यंत कड़ा किया जा रहा है और एक के बाद एक वरिष्ठ अधिकारियों के "गायब" होने का सिलसिला जारी है। विदेश मंत्री के बाद रक्षा मंत्री और पीएलए के रॉकेट फोर्स के कई बड़े अधिकारी लापता हो चुके हैं और इन सबके बीच, आसपास के क्षेत्र में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) दूसरे देशों से बार बार पंगा ले रही है।
कम्युनिस्ट चीन को समझने की कोशिश करते समय सबे ज्यादा याद रखने वाली बात यह है, कि यह सारा खेल चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) की शक्ति को नियंत्रण करने के बारे में है और शी जिनपिंग, जो इस वक्त चीन में शीर्ष पर हैं, वो अपनी शक्ति को हथेली से फिसलने से रोकने के लिए अपनी मुट्ठी और कसते जा रहे हैं।

हालांकि, चीन में हमेशा से ऐसा होता रहा है, जब शीर्ष पर मौजूद शख्स अपनी शक्ति को संभालने के लिए दूसरों का बलिदान लेता है।
तो आखिर चीन में एक के बाद एक अधिकारी क्यों गायब हो रहे हैं, आइये अंदर की बात समझते हैं।
इस वक्त शायद एक भी चीनी अधिकारी ऐसा नहीं है, जो भ्रष्टाचार का दोषी न हो। कुछ अधिकारी भले ही साफ दिखते हों, लेकिन उस वक्त सोवियत संघ के जमाने के गुप्त पुलिस प्रमुख लावेरेंटी बेरिया के उस कथन को याद करना जरूरी है, कि "मुझे कोई आदमी दिखाओ और मैं तुम्हें उसमें अपराध दिखाऊंगा।"
इसलिए इस बात की संभावना नहीं है, कि चीनी मंत्री "भ्रष्टाचार" के कारण पकड़े गए हों और इसकी भी संभावना नहीं है, कि शी जिनपिंग सिर्फ एक या दो, भ्रष्ट अधिकारियों को सफाया कर रहे हैं। बल्कि, शी जिनपिंग इस वक्त जो कर रहे हैं, वो 'माओवादी क्रांति के जमाने का ही मॉडर्न तरीका है, जिसमें विरोधियों को दोषी ठहराया जाता था और फिर उन्हें मुक्ति दे दी जाती थी।'
तो फिर शी जिनपिंग ऐसा क्यों कर रहे हैं?
यह अधिकारियों का खराब प्रदर्शन हो सकता है। पीएलए के हालिया दिनों के कई अभ्यास फेल हो गये हैं और कई जगहों पर पीएलएन ने काफी खराब प्रदर्शन किया है। लिहाजा, हो सकता है चीन के रक्षा मंत्री चीजों को उतनी गंभीरता से नहीं ले रहे हों। लेकिन, क्या सिर्फ इतनी सी बात है?
यूएस मरीन ऑफिसर और पूर्व अमेरिकी डिप्लोमेट ग्रांट न्यूशम कहते हैं, कि "मुझे संदेह है कि शी जिनपिंग आंतरिक रूप से किसी बात को लेकर चिंतित हैं। उन्हें कुछ हलकों में विरोध होता दिख रहा है। इसमें कोई संदेह नहीं है, कि वर्षों से अपने प्रतिद्वंद्वियों का सफाया करने के बाद उनके बहुत सारे दुश्मन एक हो गए हों। यह तानाशाही और शासन की प्रकृति है, जो ताकत और धमकी से शासन करती है। सभी विरोधों को जड़ से उखाड़ दिया जाता है और विरोधियों का अस्तित्व खत्म कर दिया जाता है।"
तो क्या शी जिनपिंग का एंड-गेम शुरू हो गया?
1- क्षेत्रीय प्रभुत्व और नियंत्रण हासिल करना
2- जापानियों को सबक सिखाओ.
3- अमेरिकियों को एशिया से बाहर निकालो
4- और फिर वैश्विक प्रभुत्व हासिल करना
ग्रांट न्यूशम का मानना है, कि हो सकता है शी जिनपिंग के सोच रहे हों, कि चीन की सैन्य क्षमता में विस्तार के साथ साथ दुनिया पर प्रभुत्व जमाने का समय अब आ गया हो।
लेकिन, शी जिनपिंग शायद समझ नहीं पा रहे हैं, कि अमेरिका अब चीनी खतरों को लेकर काफी ज्यादा सतर्क हो चुका है और कई देशों ने भी चीन के खिलाफ मोर्चा खोलना शुरू कर दिया है।
लेकिन, हकीकत ये भी है, कि लैटिन अमेरिका और अफ्रीका में इस समय बीजिंग लगभग क्लीन स्वीप करने जैसे हालात में पहुंच चुका है। दक्षिण पूर्व एशिया और प्रशांत द्वीप समूह के कुछ हिस्से या तो चीन के पक्ष में हैं या चीन के पक्ष में जाने के लिए डगमगा रहे हैं। और फारस की खाड़ी और मध्य पूर्व में भी हाल ही में चीनी घुसपैठ देखी गई है।
लिहाजा, अपने समय का इंतजार करो और क्षमताओं को छिपाकर रखो, पूर्व चीनी राष्ट्रपति देंग जियाओपिंग की सलाह का अब और पालन नहीं किया जाएगा। लिहाजा हो सकता है, कि अब शी जिनपिंग एंड गेम शुरू करने के मूड में आ चुके हों।

तो क्या शी जिनपिंग अब युद्ध शुरू करने वाले हैं?
एक्सपर्ट्स का कहना है, कि हो सकता है कि चीन अब लड़ाई लड़ने के मूड में आ चुका है।
हालांकि, लड़ाई कैसी दिखेगी और कहां होगी, यह बहस का विषय है। लेकिन ताइवान और दक्षिण चीन सागर की संभावना लगती है।
भले ही अभी तक कोई शूटिंग नहीं हुई है, लेकिन अगर ताइवान, फिलीपींस और जापान के आसपास चीन की गतिविधियों को देखें, तो साफ पता चलता है, कि शी जिनपिंग आगे बढ़ रहे हैं। पीएलए ज्यादा से ज्यादा स्थानों पर बार बार सक्रिय हो रहा है और कई जगहों पर उसे अपने दोस्त रूस का भी साथ मिल रहा है।
और चीनी सेना अपनी क्षमताओं में सुधार करती रहती है। पीएलए की यह सारी गतिविधि प्रतिद्वंद्वी को प्रभावित और थका देती है। यह पीएलए और बीजिंग को अपने लक्ष्य की सैन्य प्रतिक्रियाओं और क्षमताओं के साथ-साथ चीनी दबाव के सामने खड़े होने के लिए, अपनी राजनीतिक रीढ़ को आकार देने की भी अनुमति देता है।
लिहाजा, हो सकता है की चीन किसी युद्ध की तैयारी कर रहा है और शी जिनपिंग, शायद चीन की अर्थव्यवस्था की परवाह किए बगैर युद्ध की दिशा में आगे बढ़ रहे हों।












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