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USV के खिलाफ युद्ध में हाइपरसोनिक हथियार उतारेगा चीन? ताइवान जीतने के प्लान ने US के उड़ाए होश!

China Hypersonic Missiles: यूक्रेन युद्ध पर वैसे तो पूरी दुनिया की नजर है, लेकिन चीन की नजर इस बात पर है, कि रूस कहां कहां मार खा रहा है। कैसे रूसी हथियारों को यूक्रेन खत्म कर रहा है, और रूस को आखिर दो सालों के युद्ध के बाद भी अभी तक कामयाबी नहीं मिली है?

2 सालों से चल रहे यूक्रेन युद्ध में एक बात का पता चला है, कि रूस के नौसैनिक ठिकानों और जहाजों को यूक्रेनी unmanned surface vessel (USV) ने लगातार पानी पिलाया है और कई रूसी जहाज अभी तक डूब चुके हैं। जिससे पता चलता है, है ये ड्रोन नावें कितनी खरनाक हो सकती हैं। चूंकी चीन शुरू से ही यूक्रेन युद्ध पर करीब से नजर रख रहा है, लिहाजा वो ड्रोन नावों (USV) की अहमियत जान चुका है।

China Hypersonic Missiles

यूक्रेन युद्ध में रूस की नौसेना को कैसे हुआ नुकसान?

यूक्रेनी मिसाइलों और ड्रोनों ने रूस के ब्लैक सी फ्लीट (बीएसएफ) पर इतने ज्यादा हमले किए, कि रूस को अपने बेड़े यूक्रेनी मिलाइलों और यूएसवी की पहुंच से दूर ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। पश्चिमी देशों के अधिकारी इसे यूक्रेन कम अहम रणनीतिक जीत बता रहे हैं, बावजूद इसके, कि देश के पास अपनी कोई खास नौसेना नहीं है।

सैन्य विश्लेषकों का मानना है, कि यूक्रेन ने यूएसवी का इस्तेमाल जिस तरह से किया है, उसने दुनिया को आधुनिक लड़ाई की एक शक्ल दिखाई है और उसने कई रूसी जहाजों को नुकसान पहुंचाने के अलावा, यूक्रेनी यूएसवी ने बंदरगाह की सुरक्षा को तोड़ने और संरक्षित नौसैनिक सुविधाओं की सुरक्षा में लगाए गये जहाजों को भी नुकसान पहुंचाकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है।

और अब रिपोर्ट है, कि यूक्रेनियन अकेले नहीं हैं, जिन्होंने एक शक्तिशाली दुश्मन के खिलाफ लड़ाई में यूएसवी का अधिग्रहण, उसका डेवलपमेंप और तैनाती की है। इस बात के सबूत हैं, कि संभावित चीनी आक्रमण के खिलाफ अपनी लड़ाकू क्षमता को बढ़ाने के लिए ताइवान भी यूएसवी का अधिग्रहण और बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रहा है।

USV के खिलाफ चीन की तैयारी क्या है?

अमेरिका स्थित वैश्विक नीति थिंक टैंक, रैंड कॉरपोरेशन ने इस साल जनवरी में प्रकाशित डिफेंस मैगजीन नेवल एंड मर्चेंट शिप्स में एक चीनी लेख की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित करवाया है। लेख इस बात की जानकारी देता है, कि कैसे चीन, रूस के खिलाफ यूक्रेन के यूएसवी युद्ध को देख रहा है और अपनी सेनाओं को ऐसे खतरों के खिलाफ, एक कार्य योजना तैयार करने के लिए निर्देश दे चुका है।

पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) के तीन विश्लेषकों ने इस लेख को लिखा है, कि जिसका शीर्षक है "यूएसवी के खिलाफ बंदरगाहों की रक्षा कैसे करें?" जिसमें कहा गया है, कि "विभिन्न प्रकार के यूएसवी का बड़े पैमाने पर उपयोग पहले से ही आधुनिक नौसैनिक युद्ध के लिए एक नया खतरा है।" इसमें चेतावनी दी गई है, कि यूएसवी पहले से ही पारंपरिक सैन्य सिद्धांतों, हथियार, उपकरण, संगठनात्मक संरचनाओं, युद्ध रणनीति और युद्ध दर्शन की प्रगति के लिए खतरा पैदा करते हैं।

USV खतरे को चीनी विश्लेषकों ने भांपा

PLAN विश्लेषकों ने युद्ध में USV के इस्तेमाल के पांच महत्वपूर्ण फायदे बताए हैं। जैसे ये छिपने की कला में माहिर है, इसके उत्पादन में काफी कम खर्च आता है, इसे ऑपरेट करने में कम खर्च आता है, इसमें विनाश ने की शक्ति काफी ज्यादा है, ये आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आखार पर काम करता है।

इसके अलावा, USV में अलग अलग बमों का इस्तेमाल कर इसे और भी विध्वंसक बनाया जा सकता है।

इसके बाद चीनी एक्सपर्ट्स ने सलाह दी है, कि USV हमलों से कैसे किसी बंदरगाह और इन्फ्रास्ट्रक्चर को बचाया जा सकता है और इसको लेकर बकायदा लिस्ट तैयार की गई है। डिफेंस एक्सपर्ट्स ने कहा है, कि बड़े बंदरगाहों को दुश्मनों से छिपाना मुश्किल होता है और आधुनिक निगरानी उपकरण किस आसानी से बंदरगाहों के भीतर लक्ष्य की पहचान कर सकते हैं।

USV का बड़े पैमाने पर निर्माण कर रहा ताइवान

ताइवान की सेना एक बिना चालक दल वाले सतह पोत (USV) की 200 यूनिट्स खरीदने पर विचार कर रही है जिसका उपयोग कई उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। इस लिस्ट में लक्ष्य ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस (ELINT), टोही और निगरानी के लिए वियोज्य मॉड्यूल के साथ-साथ हमले करने वाले हथियार से लैस ड्रोन शामिल हैं।

ताइवान के सैन्य योजनाकारों का अनुमान है, कि 2026 तक बड़े पैमाने पर इन यूएसवी का उत्पादन शुरू हो जाएगा, जिसकी टेक्नोलॉजी राष्ट्रीय चुंग-शान इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (एनसीएसआईएसटी) विकसित करेगी।

रिपोर्टों के मुताबिक, काला सागर बेड़े (बीएसएफ) में यूक्रेनी USV ने बड़े पैमाने पर रूसी युद्धपोतों को नुकसान पहुंचाया है और ये स्ट्रैटजी, ताइवान के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ एडमिरल ली हसी-मिंग के सिद्धांत से भी मेल खाता है। लिहाजा, चीन ने इन यूएसवी हमलों से बचने के लिए हाइपरसोनिक मिसाइलों का विकल्प चुना है।

USV के खतरों से कैसे निपटेगा चीन?

बंदरगाहों पर USV खतरों का मुकाबला करने के लिए, चीनी नौसेना विशेषज्ञ ने त्रिस्तरीय डिफेंस प्लान लागू करने की सलाह दी है। 1- सेंसर, 2- डिफेंस और 3- अटैक।

PLAN विशेषज्ञों का कहना है, कि "यूएसवी दुश्मनों के इलाके में हस्तक्षेप करने और जासूसी करने में माहिर होते हैं और इनका कम्युनिकेशन लिंक काफी तगड़ा होता है। लिहाजा, चीनी एक्सपर्ट्स ने एक आधुनिक डिफेंस सिस्टम बनाने की सलाह दी है, जो इन तीनों तरीकों पर फिट बैठे और इस डिफेंस सिस्टम को खासतौर पर USV को ट्रैक करने के लिए डिजाइन करने की सलाह दी है।

विश्लेषकों का सुझाव है, कि चीन की "स्थानीय सरकारें, सार्वजनिक सुरक्षा और समुद्री मामलों" सहित विभिन्न खिलाड़ियों को इस रक्षा के लिए सूचना प्रवाह का कॉर्डिनेट करना चाहिए। वे इस रक्षात्मक प्रणाली के एक घटक के रूप में अस्थायी रक्षात्मक बाधाओं के महत्व पर जोर देते हैं, जैसे कि अमेरिका, रूस, सिंगापुर और अन्य देश बंदरगाहों, नौसैनिक अड्डों और अन्य बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए तैनात करते हैं।

इसके अलावा, चीन ने यूएसवी खतरों से निपटने के लिए "समेकित मल्टी-डोमेन स्ट्राइक सिस्टम" के विकास और कॉर्डिनेशन पर जोर दिया है। कुल मिलाकर, चीन युद्ध को लेकर काफी गंभीरता से तैयारी कर रहा है और इससे पता चलता है, कि ताइवान को लेकर चीन की प्लानिंग किस स्तर की है।

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