Xi Jinping के बड़े प्लान के लिए चीन तैयार, मार्च में दुनिया की सबसे बड़ी संसद में लगेगी मुहर

बीजिंग। National Peoples' Comgress of China: चीन का वार्षिक संसद सत्र अगले साल 5 मार्च से आयोजित होने जा रहा है। इस सत्र में चीन कई महत्वपूर्ण सुधारों के साथ ही 14वीं पंचवर्षीय योजना को भी मंजूरी दी जानी है। इसके साथ ही राष्ट्रपति शी जिनपिंग के महत्वाकांक्षी योजनाओं को मंजूरी दिया जाना भी शामिल है।

एनपीसी में चीन की राष्ट्रीय नीति पर लगती है मुहर

एनपीसी में चीन की राष्ट्रीय नीति पर लगती है मुहर

चीन की नेशनल पीपल्स कांग्रेस (NPC), जिसमें 3000 लोग शामिल होते हैं जो कि अधिकांश सत्ताधारी कम्युनिष्ट पार्टी ऑफ चाइना (CPC) के सदस्य होते हैं, की बैठक हर साल मार्च में आयोजित की जाती है। लेकिन दिसम्बर 2019 में आई कोरोना महामारी के चलते इस साल पहली बार यह बैठक मई में आयोजित की गई थी। इसे दुनिया की सबसे बड़ी पार्लियामेंट्री बॉडी कहा जाता है।

चीन में वन पार्टी रूल को देखते हुए चीन की संसद सिर्फ रबर स्टाम्प का काम करती है। इसका काम कम्युनिष्ट पार्टी ऑफ चाइना के निर्णयों पर मुहर लगाना होता है। एनपीसी सत्र दो सप्ताह तक चलता है इसमें चीन की सलाहकार बॉडी सीपीसीसीसी भी शामिल होती है। दोनों को मिलाकर इसमें शामिल होने वाले सदस्यों की संख्या 6 हजार हो जाती है।

एनपीसी के सत्र में प्रधानमंत्री ली केकियांग की कार्य रिपोर्ट को अनुमोदित करके वर्ष के लिए राष्ट्रीय एजेंडा सेट किया जाता है। 2021 के लिए इसके एजेंडे में 2021 से 2025 के लिए चीन की 14वीं पंचवर्षीय योजना को मंजूरी देना है। साथ ही विजन 2035 को मंजूरी देना भी है जिसमें चीन के नए सामाजिक और आर्थिक लक्ष्यों को 2035 तक अपनाने का लक्ष्य रखा गया है।

चीन का भारी-भरकम रक्षा बजट होगा पारित

चीन का भारी-भरकम रक्षा बजट होगा पारित

सीपीसी के चार दिवसीय अधिवेशन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के महत्वाकांक्षी विजन 2035 को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। पारंपरिक रूप से प्रधानमंत्री चीन की जीडीपी के लिए नए लक्ष्यों की घोषणा करते हैं जो कि पहले ही कमजोर चल रही है। इस बार 1976 के बाद पहली बार ली ने जीडीपी लक्ष्य घोषित नहीं किए थे। ली ने कहा था कि वह इस बार लक्ष्यों को घोषित नहीं कर रहे हैं क्योंकि चीन समझ रहा है कि इस बार कोविड-19 महामारी और विश्व के बदले आर्थिक और व्यापारिक माहौल में विकास लक्ष्यों के बारे में अनुमान लगाना मुश्किल है।

एनपीसी सत्र के दौरान ही चीन दुनिया की 22 लाख सैनिकों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी सेना पीपल्स रिपब्लिक आर्मी (पीएलए) के लिए बजट जारी करता है। पिछले साल चीन 179 अरब अमेरिकी डॉलर का बजट जारी किया था। जो कि अमेरिका के 792 अरब डॉलर के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बजट था। वहीं अंतरराष्ट्रीय वाचडॉग संस्था स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के अनुसार 2019 में चीन का रक्षा बजट 232 अरब अमेरिकी डॉलर था। हाल ही में सीपीसी ने पीएलए को 2027 तक अमेरिका की तरह पूरी तरह आधुनिक सेना के रूप में तैयार करने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में इस बार रक्षा बजट के और बढ़ाए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।

चीन के नए इकॉनॉमिक मॉडल पर मुहर

चीन के नए इकॉनॉमिक मॉडल पर मुहर

इसके साथ ही शी जिनपिंग ने हाल ही में चीन के विकास मॉडल को पूरी तरह नई दिशा में मोड़ने की बात कही थी। इसके तहत चीन अपने विकास मॉडल को 2021 में पूरी तरह बदलने जा रहा है। इसके तहत अब चीन निर्यात आधारित विकास मॉडल की जगह घरेलू खपत पर जोर देगा।

आने वाली पंचवर्षीय योजना में चीन का लक्ष्य आधुनिक समाजवादी देश बनने की दिशा में काम करना होगा। इसके लिए मुख्य रूप से घरेलू संचलन पर आधारित एक नए विकास मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा।

चीनी राष्ट्रपति ने पिछले दिनों एशिया पैसिफिक इकॉनॉमिक कॉरपोरेशन (APEC) के सीईओ से संवाद में कहा था "विकास का नया मॉडल एक रणनीतिक फैसला है जो चीन में विकास की वर्तमान स्थितियों के अध्ययन, आर्थिक वैश्वीकरण और दुनिया में बदली परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया गया है।" पिछले महीने की जिनपिंग की अध्यक्षता वाली कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) की प्रमुख बैठक आयोजित हुई थी। बैठक में राष्ट्रीय आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए 2021-25 की 14वीं पंचवर्षीय योजना के प्रस्तावों पर मुहर लगी थी। इस योजना में वर्ष 2035 की लंबी दूरी के लक्ष्यों को अपनाने की बात कही गई थी।

ट्रेड वार से परेशान है चीन

ट्रेड वार से परेशान है चीन

ट्रेड वार से परेशान है चीन दुनिया में चीन आर्थिक मोर्चे पर कई महत्वपूर्ण देशों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है जिनमें सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति अमेरिका प्रमुख है। ऐसे में चीन ने 14वीं पंचवर्षीय में देश के घरेलू बाजार को मजबूत करके निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भरता कम करने को प्राथमिकता दी है। विजन 2035 एक दीर्घकालिक योजना है जिसमें शी जिनपिंग का दृष्टिकोण साफ झलक रहा है।

बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के खिलाफ ट्रेड वार छेड़ रखी है जिसके चलते कई कंपनियों ने चीन से अपना बोरिया बिस्तर समेट लिया है। यही वजह है कि अब दुनिया की फैक्ट्री कहलाने का चीन का रुतबा कमजोर पड़ा है। ख्वावे और टिकटॉक जैसी कंपनियों पर प्रतिबंध के चलते चीन को बड़ा झटका लगा है। भारत ने भी चीन के कई उत्पादों पर प्रतिबंध लगाकर उसे कमजोर किया है।

चीन के इस निर्णय के पीछे देश की जीडीपी में निर्यात की निर्भरता कम होना भी वजह है। जीडीपी में विदेशी व्यापार का प्रतिशत 2006 में 67 प्रतिशत था जो कि 2019 में घटकर 32 प्रतिशत रह गया है। जीडीपी का अधिशेष 9.9 प्रतिशत से घटकर 1 प्रतिशत से कम पर पहुंच चुका है। वहीं 2007 के बाद वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद 7 सालों में चीन की जीडीपी में घरेलू मांग में 100 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

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