नेपाल के पीएम प्रचंड और भारत की करीबियों से चिढ़ता चीन, कहा भारत की वजह से चीन को नुकसान

चीनी मीडिया को नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्‍प कमल प्रचंड और भारत की करीबियों से परेशानी । कहा भारत समर्थित नीतियों की वजह से चीन के कई प्रोजेक्‍ट्स को हो रहा है खासा नुकसान।

बीजिंग। नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्‍प कमल प्रचंड अगले हफ्ते चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं और इससे पहले चीनी मीडिया की ओर से उनका विरोध करने वाले सुर उठने लगे हैं। चीन की सरकारी मीडिया की ओर से जो नया बयान आया है उसमें साफ है कि चीन को नेपाल और भारत की करीबियों से कितनी नफरत है।

नेपाली पीएम को लगाई फटकार

चीनी मीडिया की ओर से नेपाल के पीएम को फटकार लगाई गई है और कहा गया है कि नेपाल और चीन के रिश्‍ते प्रचंड की वजह से सबसे निचले स्‍तर पर चले गए हैं। इसकी वजह है उनकी भारत समर्थित नीतियों की वजह से कई चाइनीज प्रोजेक्‍ट्स का रुका होना। ग्‍लोबल टाइम्‍स की ओर से लिखे एक आर्टिकल में कहा गया है कि पिछले कुछ समय से पीएम प्रचंड और कम्‍यूनिस्‍ट पार्टी ऑफ नेपाल के चेयरमैन, चीन के लिए दोस्‍ताना रवैया रखते थे।

क्‍यों चीन के करीब हुआ था नेपाल

क्‍यों चीन के करीब हुआ था नेपाल

इस आर्टिकल में इस बात का भी ध्‍यान दिलाया गया है कि कैसे नेपाल, भारत विरोधी सुरों के साथ नेपाल, चीन के करीब हुआ था। आर्टिकल के मुताबिक जब पिछले वर्ष अगस्‍त में प्रचंड ने दूसरी बार पीएम के तौर पर जिम्‍मा संभाला तो उसके बाद उन्‍होंने भारत का दौरा किया और नवंबर में भारत के राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी का स्‍वागत किया। आर्टिकल के मुताबिक, 'प्रचंड की भारत समर्थित नीतियों की वजह से चीन-नेपाल के रिश्‍ते काफी कमजोर हो गए हैं।'

जिनपिंग से होगी प्रचंड की मीटिंग

जिनपिंग से होगी प्रचंड की मीटिंग

प्रचंड ने पिछले वर्ष केपी शर्मा ओली की जगह नेपान के प्रधानमंत्री का पद संभाला था। ओली को चीन का बड़ा समर्थक माना जाता है। प्रचंड 23 मार्च से चीन के पांच दिवसीय दौरे पर रवान होंगे और यहां पर वह एशिया एनुअल कांफ्रेंस के बोआओ फोरम में शिरकत करेंगे। प्रचंड इस दौरान नेपाल के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात कर सकते हैं। जिनपिंग पिछले वर्ष दक्षिण एशिया के दौरे पर थे लेकिन उन्‍होंने नेपाल का दौरा नहीं किया था।

प्रचंड से नाराज जिनपिंग

प्रचंड से नाराज जिनपिंग

बताया गया कि जिनपिंग चीन-नेपाल रेल लिंक जैसे चीनी प्रोजेक्‍ट्स में कोई तरक्‍की न होने से काफी नाराज थे। हालांकि उन्‍होंने अक्‍टूबर में गोवा में आयोजित ब्रिक्‍स शिखर सम्‍मेलन से अगल प्रचंड से मुलाकात की थी। चीन के लिए ओली का कार्यकाल बहुत ही नुकसानदायक साबित हुआ था।

भारत का प्रभाव कम करने की कोशिशें

भारत का प्रभाव कम करने की कोशिशें

ओली के कार्यकाल में तिब्‍बत के रास्‍ते रेल और हाइवे लिंक को बढ़ाने की जो योजना चीन ने तैयार किया था उसे बड़ा धक्‍का लगा था। चीन, नेपाल में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए इन प्रोजेक्‍ट्स को पूरा करना चाहता है। नेपाल कई बातों के लिए भारत पर सर्वाधिक निर्भर है और चीन इस प्रभाव को कम करने के रास्‍ते तलाश रहा है।

भारत की शह पर गिरी ओली सरकार

भारत की शह पर गिरी ओली सरकार

ग्‍लोबल टाइम्‍स ने जो आर्टिकल मंगलवार को लिखा है उसमें ओली सरकार के गिरने के लिए प्रचंड को जिम्‍मेदार बताया गया और शायद ही उन्‍हें प्रोजेक्‍ट्स में बाधा डालने वाला भी करार दिया गया है। आर्टिकल के मुताबिक बड़े पैमाने पर यह माना जाता है कि प्रचंड ने चीन का समर्थन करने वाली ओली सरकार को गिराया है और यह काम उन्‍होंने भारत की शह पर किया है। ओली सरकार के गिरने के बाद भारत का समर्थन करने वाली सरकार के बनने का रास्‍ता भी साफ हो सका।

14 मई के बाद बदलेगी सत्‍ता

14 मई के बाद बदलेगी सत्‍ता

आर्टिकल के मुताबिक 14 मई के बाद जब स्‍थानीय चुनाव होंगे तो प्रचंड अपनी शक्तियां देउबा को स्‍थानांतर‍ित कर देंगे। अगर प्रचंड चीन के साथ कुछ बड़ी डील कर भी लेते हैं तो भी उन डील्स का वही हश्र होगा जो प्रचंड के कार्यकाल में ओली की साइन की हुई डील का हुआ है। उन डील्‍स को देउबा की ओर से खत्‍म कर दिया जाएगा।

 खत्‍म करने होंगे मतभेद

खत्‍म करने होंगे मतभेद

इस आर्टिकल में यह भी कहा गया है कि चीन, भारत और नेपाल को अपने मतभेदों को खतम करके समान हितों के लिए काम करना होगा ताकि ये देश समृद्धता की ओर बढ़ सकें। हालांकि इसमें यह भी कहा गया है कि प्रचंड का कार्यकाल खत्‍म होने वाला है। ऐसे समय में प्रचंड का दौरा नेपाल और चीन के द्विपक्षीय संबंधों के लिए काफी महत्‍वपूर्ण साबित हो सकता है।

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