चीन ने पाकिस्तान को बेचे 50 Armed Drones, भारत की इस नए हथियार के खिलाफ क्या है तैयारी ?
नई दिल्ली। Armed Drones to Pakistan: पाकिस्तान के साथ हुए एक बड़े रक्षा सौदे के मुताबिक चीन ने पाकिस्तान को 50 आर्म्ड ड्रोन बेचे हैं। इसके साथ ही चीन ने प्रोपेगैंडा वार भी शुरू कर दिया है। चीन की सरकारी मीडिया ने इस डील को भारत के लिए बुरे सपने की तरह बताया है। चीन की सरकारी मीडिया में छप रही रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के पास अभी जो संसाधन हैं उसके साथ वह ऊंचाई वाले इलाकों में इन नए हथियारों को मुकाबला नहीं कर सकता।

रिपोर्ट में लीबिया, सीरिया और हाल ही में अजरबैजान में ड्रोन के महत्वपूर्ण रोल का भी हवाला दिया गया है कि कैसै इन क्षेत्रों में चीनी और तुर्की ड्रोन ने दुश्मन के पारंपरिक बख्तरबंद वाहनों को भेदकर उनका बचाव और रक्षा कवच बरबाद कर दिया था। चीनी मीडिया ने कहा भारत की जो अभी जमीनी हकीकत है उसके हिसाब से भारत बड़ी संख्या में ड्रोन हमलों को विफल करने में सक्षम नहीं है।
चीन के दावों में कितना दम ?
अफ्रीका और एशिया में चीनी ड्रोन के रोल की बात तो सही है लेकिन सैन्य जानकार भारत को लेकर चीन के दावों को गलत बताते हैं। सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि ड्रोन वहां पर सफल हैं जहां उन्हें खुला एयरस्पेस मिलता है या फिर जिस हवाई क्षेत्र में हमला करने वाला देश अपना प्रभुत्व रखता हो। इसे ऐसे समझ सकते हैं कि अफगानिस्तान और इराक में अमेरिका ड्रोन स्ट्राइक के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं क्योंकि इन देशों की अपनी कोई एयरफोर्स नहीं है जो जवाबी कार्रवाई कर सके। एक तरह से इन देशों के हवाई क्षेत्र पर अमेरिका का प्रभुत्व है जिसके चलते वह अपने ड्रोन हमले आसानी से कर लेता है। लेकिन भारतीय क्षेत्र में ऐसा नहीं है। भारत के पास अपनी मजबूत वायुसेना है और एयर डिफेंस सिस्टम है जिसके चलते इन ड्रोन के लिए भारत से लगी सीमा पर कार्रवाई आसान नहीं होगी।
जहां तक जम्मू कश्मीर से लगी लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) और चीन से लगी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) की बात है इस क्षेत्र की रडार से कड़ी निगरानी की जाती है और फाइटर जेट इन इलाकों में उड़ान भरते रहते हैं। ऐसे में अगर यहां कोई ड्रोन आने की कोशिश करता है तो वह मार गिराया जाएगा।
ड्रोन भारत के लिए कितने जरूरी ?
लेकिन पाकिस्तान द्वारा चीन से ड्रोन प्राप्त करने के बाद अब भारत के लिए भी ड्रोन हथियार और एंटी ड्रोन सिस्टम खरीदने की जरूरत बढ़ गई है क्योंकि इन मानव रहित विमानों को बिना एलओसी या एलएसी पार किए ही हवा से जमीन पर हमले के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। ये ड्रोन जमीन पर भारतीय तोपों और जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की जद में आए बिना कार्रवाई को अंजाम दे सकते हैं।
अगर अभी की बात करें तो भारत के पास एक भी आर्म्ड ड्रोन नहीं है। भारतीय नौसेना दुश्मनों की पहचान करने और समुद्री क्षेत्र में निगरानी रखने के अमेरिका से दो ड्रोन लीज पर ले रही है। जबकि इजरायल के हेरॉन ड्रोन को हथियारों के साथ अपग्रेड होने में अभी समय है।
भारत ने 2015 में सेना के लिए नए हथियारों की जरूरतों के लिए काम शुरू करते हुए जिसके बाद मिसाइल सिस्टम के लिए सौदे की शुरुआत हुई और तीन साल बाद रूस के साथ S-400 मिसाइल का सौदा हो सकता। अगले साल भारत को इसके मिलने की उम्मीद है। रक्षा क्षेत्र की सरकारी कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स एंटी ड्रोन रडार-सिस्टम लेकर आई है लेकिन अभी इसकी मैदान में उपयोगिता साबित होनी बाकी है।
ड्रोन के आने से बदलेगी लड़ाई की तस्वीर
जहां तक चीनी मीडिया और सेना की प्रोपेगैंडा वार में इन ड्रोन के बहाने भारतीय सेना की तुलना आर्मेनिया, सीरिया और अफ्रीकी देशों से करने की है तो भारत इलेक्ट्रॉनिक्स का एक मीडियम रेंज रडार सिस्टम भी इन ड्रोन को पहचान सकता है। लेकिन घुसपैठिए ड्रोन को L-70 या ZU-23 एयर डिफेंस गन का इस्तेमाल करके गिराना बहुत महंगा है। एक चीनी विंग लूंग-II ड्रोन एक फाइटर की कीमत के दसवें हिस्से के बराबर है। इसे मारने के लिए लाखों डालर की कीमत वाले एयर-टू-एयर मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल करना कोई बुद्धिमानी नहीं है।
इस तरह के हथियारों से बचने के लिए भारतीय सेना फ्रंट-लाइन पर बड़े कंक्रीट ह्यूम पाइप के साथ सुरंग का उपयोग कर रही है। लेकिन ये तो मानना पड़ेगा कि एकीकृत रक्षा नेटवर्क के बिना दुश्मन के ड्रोन का सटीक निशाना अच्छी से अच्छी रक्षा योजनाओं को फेल कर सकता है।












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