COP26 सम्मेलन में शी जिनपिंग को नहीं दिया गया वीडियो लिंक? चीन ने दिखाया अड़ियल रवैया

चीन ने कहा है कि, उसे कोई कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता है और वो पहले से ही कई प्रतिज्ञाएं कर चुका है।

ग्लासको, नवंबर 03: चीन ने मंगलवार को आरोप लगाया है कि, राष्ट्रपति शी जिनपिंग को स्कॉटलैंड में सीओपी26 जलवायु वार्ता सम्मेलन में बोलने के लिए वीडियो लिंक उपलब्ध नहीं कराया गया, इसीलिए उन्होंने कार्यक्रम में वर्चुअल भाषण नहीं दिया। बल्कि, इसके जगह चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने लिखा हुआ बयान एक कागज के जरिए भेजा था।

''वीडियो लिंक नहीं दिया गया''

''वीडियो लिंक नहीं दिया गया''

शी जिनपिंग व्यक्तिगत तौर पर सीओपी-26 सम्मेलन में शामिल होने के लिए ग्लासको नहीं पहुंचे थे और उन्होंने यूनाइटेड नेशंस के इस वैश्विक कार्यक्रम में अपना लिखित बयान भिजवा दिया। जिसको लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन भी नाराज बताए जा रहे हैं। सिर्फ शी जिनपिंग ही नहीं, बल्कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इस सम्मेलन में शिरकत करने के लिए नहीं पहुंचे थे। हालांकि, पुतिन के नहीं जाने के पीछे रूस में अचानक कोविड-19 के मामलो में भारी बढ़ोतरी है और इस वक्त रूस में हर दिन एक हजार से ज्यादा लोग कोविड-19 की वजह से अपनी जान गंवा रहे हैं। लेकिन, चीन के राष्ट्रपति पिछले 21 महीनों से देश से बाहर नहीं जा रहे हैं और कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि, शी जिनपिंग को देश में तख्तापलट का डर दिख रहा है, लिहाजा वो चीन से बाहर नहीं निकल रहे हैं।

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    सीओपी26 में चीन ने भेजी चिट्ठी

    सीओपी26 में चीन ने भेजी चिट्ठी

    चीन की तरफ से आरोप लगाते हुए कहा गया है कि, राष्ट्रपति शी जिनपिंग को वीडियो लिंक नहीं दिया गया, जिसकी वजह से उन्होंने चिट्ठी भिजवा दी। इस चिट्ठी में जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए चीन की तरफ से कोई प्रतिज्ञा नहीं की गई थी, बल्कि सिर्फ ये आश्वासन दिया गया था कि, चीन 2060 तक जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल बंद कर देगा। इसके अलावा शी जिनपिंग की चिट्ठी में विश्व के दूसरे देशों को ही नसीहत दी गई थी और अपने वादों को पूरा करने के लिए कहा गया था। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने एक नियमित ब्रीफिंग में संवाददाताओं से कहा कि, "जैसा कि मैं इसे समझता हूं, सम्मेलन के आयोजकों ने वीडियो लिंक प्रदान नहीं की।"

    ग्लासको में हुआ था आयोजन

    ग्लासको में हुआ था आयोजन

    आपको बता दें कि, ब्रिटेन ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में सीओपी26 बैठक का आयोजन किया था, जिसका उद्देश्य शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन को सुरक्षित करना है और ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव को रोकने के लिए पेरिस समझौते के लक्ष्य को पूरा करते हुए वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ने से रोकना है। जलवायु परिवर्तन पर नजर रखने वालों ने चिंता जताते हुए कहा है कि, ग्लासगो से शी जिनपिंग की शारीरिक अनुपस्थिति ना होने का मतलब ये है कि, चीन इस दौर की बातचीत के दौरान और रियायतें देने के लिए तैयार नहीं है। हालांकि, बीजिंग ने कहा है कि उसने पिछले वर्ष में पहले ही कई प्रमुख प्रतिज्ञाएं की हुई हैं, जिसमें 2060 तक कार्बन उत्सर्जन को कम करने का वादा किया है, वहीं 2030 तक कुल सौर और पवन क्षमता को 1,200 गीगावाट तक बढ़ाने और 2026 में शुरू होने वाले कोयले के उपयोग पर अंकुश लगाने का वादा किया है।

    जलवायु परिवर्तन पर भी चीन बनाम अमेरिका

    जलवायु परिवर्तन पर भी चीन बनाम अमेरिका

    चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच लड़खड़ाते राजनयिक संबंध का असर जलवायु परिवर्तन पर भी पड़ता दिख रहा है। जलवायु-वार्मिंग ग्रीनहाउस गैसों के दो सबसे बड़े उत्सर्जक, जलवायु वार्ता के लेटेस्ट दौर के दौरान सबसे बड़े अवरोधों में से एक के रूप में उभर रहे हैं। बीजिंग ने दोनों पक्षों के बीच व्यापक संघर्षों से जलवायु को अलग करने के वाशिंगटन के प्रयासों को खारिज कर दिया है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने सितंबर में अमेरिकी जलवायु दूत जॉन केरी को बताया कि, अभी भी एक "रेगिस्तान" है जो जलवायु सहयोग के "नखलिस्तान" के लिए खतरा है। चीन के लिए विवाद का एक विशेष बिंदु शिनजियांग क्षेत्र है, जहां के सौर उपकरण आपूर्तिकर्ताओं सहित चीनी कंपनियों पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि, चीन देश के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में मानवाधिकारों के हनन को लेकर पश्चिमी देशों के दावों को खारिज करता है।

    चीन का अड़ियल रवैया

    चीन का अड़ियल रवैया

    चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग यी ने मंगलवार को कहा कि, "आप चीन को एक तरफा कोयला उत्पादन में कटौती करने के लिए नहीं कह सकते, जबकि दूसरी तरफ आपने चीनी फोटोवोल्टिक उद्योगों पर प्रतिबंध लगा दिया हैं।"कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा संचालित चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने सोमवार के संपादकीय में कहा कि, संयुक्त राज्य अमेरिका को मानवाधिकारों और अन्य मुद्दों पर हमला करते हुए जलवायु परिवर्तन पर बीजिंग को प्रभावित करने की कोशिश करने की भी उम्मीद नहीं करनी चाहिए। अखबार ने कहा कि, चीन के प्रति वाशिंगटन के रवैये ने "चीन के लिए तनाव के बीच निष्पक्ष बातचीत की किसी भी क्षमता को देखना असंभव" बना दिया है।

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