'ताइवान को चीन में मिलना ही होगा, इसी में सबकी भलाई', तीसरी बार ताजपोशी से पहले बोले जिनपिंग

एक्सपर्ट्स का कहना है कि, तीसरी बार सत्ता में आने के बाद शी जिनपिंग काफी ज्यादा आक्रामक तरीके से अपनी ताइवान नीति को आगे बढ़ाएंगे और दुनिया काफी तेजी से तनाव की तरफ आगे बढ़ेगा।

China Congress: चीन कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस की बैठक पहले शी जिनपिंग ने अपने एजेंडे का खुलासा कर दिया है और कम्युनिस्ट पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा है कि, चीन मजबूर परिस्थितियों में ही ताइवान को अपने देश में मिलाने के लिए बल प्रयोग का अधिकार अपने पास सुरक्षित रखता है। हालांकि, ताइवान का चीन में शांतिपूर्ण पुनर्मिलन चीन की पहली पसंद है। शनिवार को बीजिंग में एक संवाददाता सम्मेलन में कम्युनिस्ट पार्टी के प्रवक्ता सुन येली ने कहा कि, चीन और ताइवान का पुनर्मिलन ताइवान के हमवतन सहित सभी के हितों को पूरा करता है।

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    ताइवान पर चीन का ऐलान

    ताइवान पर चीन का ऐलान

    कम्युनिस्ट पार्टी के प्रवक्ता सुन येली ने कहा कि, बीजिंग शांतिपूर्वक ताइवान को अपने नियंत्रण में लाने के लिए हर संभव प्रयास करेगा। लेकिन, चीन ताइवान द्वीप पर कट्टरपंथियों और उनके विदेशी समर्थकों द्वारा समर्थित पूर्ण स्वतंत्रता की दिशा में किसी भी आंदोलन को बर्दाश्त नहीं करेगा, संभवतः संयुक्त राज्य अमेरिका, जो ताइवान का मुख्य सैन्य और राजनीतिक समर्थक है। आपको बता दें कि, ताइवान दशकों से चीनी आक्रमण के लगातार खतरे में रहा है, जो दावा करता है कि, लोकतांत्रिक रूप से शासित द्वीप को अपने क्षेत्र के हिस्से के रूप में एक दिन, यदि आवश्यक हो तो बल द्वारा जब्त कर लिया जाएगा। वहीं, त्साई इंग-वेन के 2016 में ताइवान में पहली बार राष्ट्रपति चुने जाने के बाद से बीजिंग ने ताइवान पर अपना दावा तेज कर दिया है और दावा किया है, कि वह एक "अलगाववादी" नेता हैं, और चीन ने उनके साथ बातचीत से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही चीन ने ताइवान को डिप्लोमेटिक तौर पर अलग थलग करने की पूरी कोशिश की है और बार-बार कहा है, कि बल का प्रयोग द्वीप को अपने नियंत्रण में लाने का एक विकल्प है।

    चीनी राष्ट्रपति ने क्या कहा?

    चीनी राष्ट्रपति ने क्या कहा?

    वहीं, कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस के 20वें अधिवेशन के दौरान शी जिनपिंग ने कहा कि, 'चीन ने इंसानी इतिहास में सबसे बड़ी लड़ाई गरीबी और भूख के खिलाफ लड़ी है और चीन का मकसद पूरी दुनिया से गरीबी खत्म करना है।' वहीं, इस दौरान चीनी राष्ट्रपति ने हांगकांग पर चीनी नियंत्रण का जिक्र करते हुए कहा कि, 'चीन की सुरक्षा के लिए हांगकांग की जलवायु, नदियों और पहाड़ों को संरक्षित करना जरूरी है।' इसके साथ ही शी जिनपिंग ने कहा कि, 'एक वक्त हांगकांग में जहां तहां अराजकता फैली रहती थी, लेकिन अब हांगकांग में पूरी तरह से शांति की स्थापना हो गई है।' उन्होंने कहा कि, 'हमने चीन की सुरक्षा के लिए अपनी सेना पीएलए को काफी मजबूत किया है, जिसके काफी बेहतरीन परिणाम भी देखने को मिले हैं।'

    ताइवान पर क्या बोले शी जिनपिंग

    ताइवान पर क्या बोले शी जिनपिंग

    कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस की बैठक में बोलते हुए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने काफी सख्ती दिखाने की कोशिश की और उन्होंने कहा कि, ताइवान की स्वतंत्रता और ताइवान को मिलने वाली विदेशी दखल को कम करने के लिए चीन ने काफी मजबूत कदम उठाए हैं। इसके आगे उन्होंने कहा कि, ताइवान को चीन अपना हिस्सा मानता है और ताइवान को मुख्य भूमि में मिलाने के लिए काम किए जा रहे हैं। इसके साथ ही चीनी राष्ट्रपति ने पार्टी के अंदर सफाई की भी बात की है, जिसको लेकर कहा जाता रहा है, कि शी जिनपिंग ने सख्ती के साथ अपने विरोधियों को ठिकाना लगा दिया है। उन्होंने कहा कि, "पार्टी के अंदर हमने बीमारियों को खत्म करने का काम किया है और इसके लिए कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, क्योंकि कुछ लोगों के हितों के लिए 140 करोड़ लोगों के साथ नाइंसाफी नहीं की जा सकती है।" इसके साथी ही उन्होंने इस बात के भी संकेत दिए हैं, कि आने वाले वक्त में भी पार्टी के अंदर, सेना के अंदर छिपे हुए खतरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

    ताइवान पर और आक्रामक होगा चीन!

    ताइवान पर और आक्रामक होगा चीन!

    एक्सपर्ट्स का कहना है कि, तीसरी बार सत्ता में आने के बाद शी जिनपिंग काफी ज्यादा आक्रामक तरीके से अपनी ताइवान नीति को आगे बढ़ाएंगे और चीन ने ताइवान द्वीप से चीन को अलग करने वाले 180 किमी चौड़े चैनल, ताइवान जलडमरूमध्य पर भी अधिकार क्षेत्र का दावा किया है, जिसमें चीनी युद्धपोत अनौपचारिक समुद्री सीमा का परीक्षण कर रहे हैं। वहीं, चीन ने साफ तौर पर अमेरिका को भी चेतावनी दी है और कहा है, कि चीन से उलझने पर कुछ हासिल नहीं होगा। आपको बता दें कि, चीन के विरोध के बाद भी अमेरिका ने ताइवान के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए हैं और अमेरिका ने साफ तौर पर घोषणा कर रखी है, कि ताइवान को अपनी रक्षा के लिए अमेरिका सैन्य साधन उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, अमेरिका अभी भी आधिकारिक तौर पर ताइवान को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता है। वहीं, कम्युनिस्ट पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि, "चीन के राष्ट्रीय कायाकल्प की ऐतिहासिक प्रक्रिया को कोई भी या कोई भी ताकत वापस नहीं ले सकती है।"

    कांग्रेस की जानकारी कब तक मिलेगी?

    कांग्रेस की जानकारी कब तक मिलेगी?

    ज्यादातर चीनी राजनीतिक घटनाओं की तरह इस बात की भी संभावना काफी कम है, कि कांग्रेस की जानकारी पहले जारी की जाएगी। कांग्रेस के परिणाम की घोषणा कई दिनों के बंद कमरे के सत्रों के बाद ही की जाएगी। वहीं, राजनीतिक पर्यवेक्षक और असंतुष्ट यिन वेहोंग ने कहा कि, शी जिनपिंग को खुले विरोध का सामना नहीं करना पड़ेगा, लेकिन सत्ता को अपने हाथों में केंद्रित करने के लिए पार्टी के पूर्व कॉलेजियम नेतृत्व शैली के साथ उन्हें सामंजस्य बिठाना होगा। आपको बता दें कि, यिन वेहोंग को शी जिनपिंग के खिलाफ विपक्षी विचारों के लिए बार-बार पुलिस उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है। यिन ने शंघाई के दक्षिण में स्थिति अपने घर से एक फोन कॉल में अलजजीरा को बताया कि, "ऐसा लगता है कि उन्होंने पहले से सभी लोगों के बीच विभाजिक केक को पूरा कर अपने हाथों मे ले लिया है और फैसला किया है, कि उसके पास ही सब कुछ होगा।"

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